Ganesh Chaturthi 2026 पर विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 की “बाँझन को गर्भ देत” श्रेणी में दो चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।
डॉ. आस्था माथुर और डॉ. रितु सुराना हरिप्रिया को यह सम्मान संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
दोनों चिकित्सक अंकुरा हॉस्पिटल, इंदौर से जुड़ी हैं। वे प्रजनन स्वास्थ्य और मातृत्व सेवाओं में योगदान दे रही हैं।
कृष्णकांत मिश्रा (कृष्णा गुरुजी) ने दोनों चिकित्सकों को विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 की ट्रॉफी प्रदान की।
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 का वीडियो देखें
सम्मान समारोह और इस मानवीय पहल की झलक नीचे दिए गए वीडियो में देखिए।
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Ganesh Chaturthi 2026 पर मातृत्व सेवा का सम्मान
Ganesh Chaturthi 2026 पर यह सम्मान गणेश आरती के मानवीयकरण अभियान के अंतर्गत प्रदान किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य आरती के भावों को वास्तविक मानव सेवा से जोड़ना है।
जो व्यक्ति किसी के जीवन की बाधा दूर करता है, वह उसके लिए विघ्नहर्ता बन जाता है।
“बाँझन को गर्भ देत” सेवा सम्मान
गणेश आरती में एक प्रसिद्ध पंक्ति आती है—“बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।”
कृष्णा गुरुजी ने इसमें “पुत्र” के स्थान पर “गर्भ” शब्द अपनाने की अपील की है।
उनका मानना है कि प्रार्थना स्वस्थ संतान के लिए होनी चाहिए। उसमें पुत्र और पुत्री का भेद नहीं होना चाहिए।
इस विचार को संबंधित लेख में विस्तार से समझाया गया है।
गणेश आरती में “बाँझन को गर्भ देत” क्यों गाएँ
यह सम्मान चिकित्सा संबंधी शब्दावली नहीं है। यह गणेश आरती के मानवीयकरण से जुड़ी सेवा श्रेणी है।
डॉ. आस्था माथुर का मातृत्व सेवाओं में योगदान
डॉ. आस्था माथुर प्रजनन स्वास्थ्य, बांझपन उपचार और मातृत्व सेवाओं से जुड़ी हुई हैं।
वे गर्भधारण में कठिनाई का सामना कर रहे दंपतियों को चिकित्सकीय परामर्श और मार्गदर्शन देती हैं।
प्रत्येक दंपती की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए सही जांच और विशेषज्ञ परामर्श जरूरी होता है।
उनकी सेवा और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण को इस सम्मान के माध्यम से रेखांकित किया गया।
डॉ. रितु सुराना हरिप्रिया भी सम्मानित
डॉ. रितु सुराना हरिप्रिया को भी विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 प्रदान किया गया।
वे महिलाओं के स्वास्थ्य, मातृत्व और संबंधित चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
दोनों चिकित्सकों का सम्मान उस सेवा भावना के लिए हुआ, जो परिवारों में नई आशा जगाती है।
यह सम्मान किसी उपचार की सफलता की गारंटी नहीं देता। इसका उद्देश्य चिकित्सकीय सेवा का अभिनंदन करना है।
सम्मान समारोह में कौन उपस्थित रहा?
सम्मान समारोह में अंकुरा हॉस्पिटल के चिकित्सक और कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. पारितोष आनंद, एमडी और श्री अमित जैन, मार्केटिंग हेड उपस्थित थे।
सुश्री प्रगति प्रधान, कम्युनिटी मार्केटिंग ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
पलक मिश्रा, भट्टिया जी और पिंकू यादव सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
बांझपन क्या है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन
बांझपन को प्रजनन प्रणाली से संबंधित बीमारी मानता है।
बारह महीने के नियमित प्रयास के बाद गर्भधारण न होना इसकी सामान्य परिभाषा में आता है।
यह समस्या महिला या पुरुष, दोनों से संबंधित कारणों से हो सकती है।
इसलिए जांच की जिम्मेदारी केवल महिला पर डालना उचित नहीं है। दोनों साथियों का मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।
WHO के अनुसार, दुनिया में लगभग हर छह में से एक वयस्क बांझपन का अनुभव करता है।
सही जानकारी और संवेदनशील व्यवहार मरीजों को भावनात्मक सहयोग प्रदान कर सकते हैं।
IVF क्या है?
IVF का पूरा नाम इन विट्रो फर्टिलाइजेशन है। यह सहायक प्रजनन तकनीक का एक रूप है।
इस प्रक्रिया में निषेचन शरीर के बाहर प्रयोगशाला में किया जाता है।
इसके बाद चयनित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।
हालांकि, प्रत्येक दंपती को IVF की आवश्यकता नहीं होती। उपचार का निर्णय विशेषज्ञ जांच के बाद करते हैं।
इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी व्यक्तिगत चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं हो सकती।
अंकुरा हॉस्पिटल का स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क
अंकुरा हॉस्पिटल
महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।
इसकी सेवाओं में प्रसूति, स्त्री रोग, फर्टिलिटी, मातृत्व और बाल चिकित्सा शामिल हैं।
अंकुरा हॉस्पिटल की वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में इसके 19 केंद्र पांच राज्यों में संचालित हैं।
इसका नेटवर्क हैदराबाद, पुणे, भुवनेश्वर, विजयवाड़ा, तिरुपति, खम्मम और इंदौर तक फैला है।
अस्पताल की यात्रा हैदराबाद से आगे बढ़ी। आज इसका नेटवर्क कई शहरों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है।
अंकुरा का कार्य केवल IVF तक सीमित नहीं है। यह महिला और बाल स्वास्थ्य की व्यापक सेवाएं देता है।
स्वस्थ जीवन के वैश्विक लक्ष्य से संबंध
मातृ स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग हैं।
संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य 3
सभी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण पर केंद्रित है।
सुरक्षित मातृत्व और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं इस वैश्विक उद्देश्य को आगे बढ़ाती हैं।
गणेश आरती का मानवीयकरण
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 का उद्देश्य आरती के भावों को वास्तविक सामाजिक सेवा से जोड़ना है।
जो व्यक्ति किसी दूसरे का जीवन-विघ्न दूर करता है, वह उसके लिए विघ्नहर्ता बनता है।
नेत्रदान की सेवा को “अंधन को आँख देत” के भाव से जोड़ा गया है।
नंदकिशोर व्यास को दिया गया “अंधन को आँख देत” सम्मान
कुष्ठ रोगियों की सेवा को “कोढ़न को काया देत” के भाव से जोड़ा गया है।
कुष्ठ सेवा सदन में विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026
मातृत्व सेवाओं में योगदान को “बाँझन को गर्भ देत” श्रेणी से सम्मानित किया गया।
इन श्रेणियों का उद्देश्य समाज के वास्तविक विघ्नहर्ताओं को पहचान देना है।
सम्मान का मानवीय संदेश
कृष्णा गुरुजी ने कहा कि चिकित्सा केवल व्यवसाय नहीं है। इसमें संवेदना और विश्वास भी जरूरी हैं।
बांझपन से गुजर रहे दंपती शारीरिक कठिनाइयों के साथ भावनात्मक दबाव भी सहते हैं।
ऐसे समय चिकित्सक का संवेदनशील व्यवहार परिवार को साहस और आशा प्रदान करता है।
डॉ. आस्था माथुर ने मरीजों की सेवा पूरी निष्ठा से जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
दोनों चिकित्सकों का सम्मान उनके चिकित्सा और मानवीय योगदान का अभिनंदन है।
यह कार्यक्रम कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी, इंदौर के सौजन्य से आयोजित हुआ।
इस सेवा पहल की शुरुआत कृष्णकांत मिश्रा (कृष्णा गुरुजी) ने की है।
इस प्रकार, Ganesh Chaturthi 2026 पर चिकित्सा सेवा और मानवीय संवेदना का प्रेरक संदेश सामने आया।
जीवन आपका, सुझाव मेरा।
— कृष्णकांत मिश्रा (कृष्णा गुरुजी)
Author of Kaliyug Puran
Spiritual Mentor, Yoga Teacher and Humanitarian
स्वास्थ्य सूचना:
यह लेख केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। उपचार से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लें।

