Ganesh Chaturthi 2026 पर
“अंधन को आँख देत — नेत्रदान सेवा सम्मान” प्रदान किया गया। कृष्णा गुरुजी द्वारा शुरू की गई
गणेश आरती के मानवीकरण की मुहिम में यह सम्मान उन सेवाभावी व्यक्तियों को समर्पित है, जो दूसरों के जीवन की वास्तविक बाधाएँ दूर करते हैं।
इंदौर में हुए इस सम्मान अवसर पर उनकी पुत्री भावना व्यास भी उपस्थित थीं।
साथ ही, कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी से अनिल कुमार जी, पलक मोटवानी और पिंकू यादव उपस्थित रहे।
इस पहल का उद्देश्य सेवा के कार्यों को समाज के सामने लाना और अधिक लोगों को मानवीय जिम्मेदारी से जोड़ना है।
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हम भगवान गणेश से अपने विघ्न दूर करने की प्रार्थना करते हैं। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कृष्णा गुरुजी प्रश्न रखते हैं
—क्या हम भी किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन का विघ्न दूर कर सकते हैं? किसी जरूरतमंद को सहारा देना
, किसी परिवार को सही जानकारी देना और सेवा के लिए समाज को प्रेरित करना इसी संकल्प के रूप हैं।
“अंधन को आँख देत, कोढ़न को काया,
बाँझन को गर्भ देत, निर्धन को माया।”
कृष्णा गुरुजी इन पंक्तियों के सेवा भाव को सामाजिक जीवन से जोड़ते हैं।
उनके अनुसार, आरती की भावना हमारे व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।
इसलिए नेत्रदान के लिए जागरूकता फैलाने वाले, कुष्ठ प्रभावित लोगों की सेवा करने वाले
और जरूरतमंदों के जीवन में सहारा बनने वाले लोग इस मुहिम के प्रेरणास्रोत हैं।
इस विचार को विस्तार से समझने के लिए पढ़ें: गणेश जी को मंगलमूर्ति क्यों कहते हैं? — Kaliyug Puran और Krishna Guruji।
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026
नंदकिशोर व्यास और महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति
श्री नंदकिशोर व्यास लंबे समय से नेत्रदान, अंगदान और देहदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
उनके सेवा योगदान को पहचानते हुए उन्हें “अंधन को आँख देत” श्रेणी में विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके साथ
उन परिवारों और सहयोगियों की भावना को भी नमन करता है, जो दान के संकल्प को आगे बढ़ाते हैं।
दधीचि देहदान समिति के वर्ष 2022 के ई-जर्नल की संस्थाओं की सूची में Maharshi Dadhichi Dehdan Angdan Samiti, Indore और
श्री नंदकिशोर व्यास का उल्लेख है। इसमें समिति का कार्यक्षेत्र नेत्रदान, अंगदान और देहदान बताया गया है।
इंदौर की समिति का प्रकाशित संदर्भ यहाँ देखें।
“अंधन को आँख देत” का नेत्रदान सेवा संदेश
इस श्रेणी का मानवीय संदेश है कि हम दृष्टि संबंधी कठिनाइयों का सामना कर रहे लोगों के प्रति संवेदनशील बनें।
नेत्रदान की जानकारी परिवार तक पहुँचाना और लोगों को अधिकृत संस्थाओं से जोड़ना भी महत्वपूर्ण सेवा है।
सही जानकारी मिलने पर परिवार जागरूक और सूचित निर्णय ले सकते हैं।
नेत्रदान हर प्रकार की दृष्टिहीनता का उपचार नहीं है। दान किए गए कॉर्निया का प्रत्यारोपण उपयुक्त रोगियों की सहायता कर सकता है।
इसलिए नेत्रदान के संबंध में जानकारी और प्रक्रिया के लिए अधिकृत नेत्र बैंक से संपर्क करना चाहिए।
अंग एवं ऊतक दान के आधिकारिक संसाधनों के लिए राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन — NOTTO की वेबसाइट देखें।
अगली कड़ी: “कोढ़न को काया” सेवा सम्मान
इसी मुहिम में कुष्ठ प्रभावित लोगों की सेवा को भी सम्मान दिया गया है।
कुष्ठ सेवा सदन में आठवें वर्ष गणेश स्थापना के अवसर पर यामिनी निवासकर को “कोढ़न को काया देत
— कुष्ठ सेवा सम्मान” के अंतर्गत विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 प्रदान किया गया।
यह कड़ी देखभाल के साथ सम्मान, अपनत्व और सामाजिक सहयोग का संदेश देती है।
संबंधित लेख पढ़ें: कुष्ठ सेवा सदन में गणेश स्थापना और विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026।
साथ ही, विघ्नहर्ता 2025 और गणेश आरती के मानवीकरण की पिछली कड़ी में अभियान की यात्रा पढ़ सकते हैं।
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 का सम्मान वीडियो
श्री नंदकिशोर व्यास को सम्मान प्रदान करने के अवसर का YouTube Shorts वीडियो नीचे देखें।
सम्मान समारोह का वीडियो YouTube पर देखें।
दस सम्मान, दूसरों के विघ्न दूर करने का संकल्प
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 की इस श्रृंखला में कुल दस सम्मान दिए जाएंगे। प्रत्येक सम्मान समाज को यह याद दिलाएगा कि
अपनी क्षमता से किसी का कष्ट कम करना भी भक्ति की अभिव्यक्ति हो सकती है।
त्योहार के उत्साह के साथ सेवा का संकल्प जुड़ने पर उसका प्रभाव लोगों के जीवन तक पहुँचता है।
Kaliyug Puran में व्यक्त कृष्णा गुरुजी की इसी सामाजिक दृष्टि को गणेश आरती में “बाँझन को गर्भ देत” क्यों गाएँ? लेख में भी समझ सकते हैं।
प्रार्थना संतान की हो, उसके लिंग की नहीं—यह संदेश आराधना में समानता और संवेदना जोड़ता है।
— कृष्णा गुरुजी
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी
जीवन आपका, सुझाव मेरा।

