दशहरे पर गिलकी क्यों खाई जाती है? Kaliyug Puran से Krishna Guruji की व्याख्या

दशहरा पर गिलकी के भजिए विषय की फीचर इमेज में नमस्कार करते Krishna Guruji, रावण दहन, हरी गिलकी और भजियों की थाली।

दशहरे पर गिलकी के भजिए खाने की मालवा की परंपरा क्या संदेश देती है? कृष्णा गुरुजी कलियुग पुराण की दृष्टि से इसे महामृत्युंजय मंत्र के मुक्ति-भाव और भीतर के विकारों से मुक्त होने के संकल्प से जोड़ते हैं।

रावण दहन का महत्व: इस विजयादशमी भीतर के दस विकारों का भी दहन करें

रावण दहन का महत्व: जलते रावण के प्रतीक के साथ नमस्कार मुद्रा में कृष्णा गुरुजी और भीतर के दस विकारों के दहन का संदेश।

रावण दहन का महत्व केवल पुतला जलाने तक सीमित नहीं है। यह अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे दस विकारों को पहचानने का अवसर है। कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी समझाते हैं कि ज्ञान का सदुपयोग, आत्मचिंतन और ध्यान कैसे विजयादशमी को सार्थक बना सकते हैं।

नवरात्रि का विज्ञान से संबंध: महाकाल गुरुकुल में संवाद | Kaliyug Puran | Krishna Guruji

नवरात्रि का विज्ञान से संबंध विषय की फीचर इमेज में नमस्कार करते कृष्णा गुरुजी और माँ दुर्गा का चित्र।

नवरात्रि का विज्ञान से संबंध और जीवन में उसकी उपयोगिता समझाने के लिए कृष्णा गुरुजी ने उज्जैन के महाकाल गुरुकुल में सौ से अधिक बटुक ब्राह्मणों से संवाद किया। जानिए कलियुग पुराण की दृष्टि से ऋतु परिवर्तन, अनुशासन और आत्मचिंतन का संदेश।

नवरात्रि चौथा दिन: माँ कूष्मांडा और हृदय चक्र ध्यान | Kaliyug Puran | Krishna Guruji

नवरात्रि चौथा दिन: माँ कूष्मांडा, हृदय चक्र पर ध्यान करती आकृति और नमस्कार करते कृष्णा गुरुजी।

नवरात्रि चौथा दिन माँ कूष्मांडा की आराधना का दिन है। कृष्णा गुरुजी कलयुग पुराण की दृष्टि से इसे हृदय चक्र ध्यान से जोड़ते हैं। जानें प्रेम, करुणा और अपनत्व का संदेश। साथ ही, मूलाधार से हृदय चक्र तक निर्देशित ध्यान का अनुभव करें।

नवरात्रि तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा और नाभि चक्र ध्यान | Kaliyug Puran

नाभि चक्र ध्यान के लिए माँ चंद्रघंटा, नाभि पर सुनहरे प्रकाश वाली ध्यान मुद्रा और नमस्ते करते कृष्णा गुरुजी।

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा के स्मरण के साथ करें नाभि चक्र ध्यान। कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी समझाते हैं ईर्ष्या और तुलना से अपनत्व की ओर बढ़ने का संदेश। वीडियो के साथ जानें ध्यान की सरल विधि और आत्मचिंतन का महत्व।

सर्वपितृ अमावस्या पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन तर्पण: इंदौर से विश्व तक | Krishna Guruji

सर्वपितृ अमावस्या के अंतरराष्ट्रीय सामूहिक तर्पण का बैनर, नमस्कार मुद्रा में कृष्णा गुरुजी और दीपों से सजे घाट का चित्रण।

सर्वपितृ अमावस्या पर कृष्णा गुरुजी के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सामूहिक तर्पण का केंद्र बना इंदौर। भागीरथपुरा के दिवंगतों, पुणे के केतन अग्रवाल और अज्ञात आत्माओं की शांति के लिए देश-विदेश से प्रार्थना हुई। उज्जैन सिद्धवट, हरिद्वार, ऋषिकेश और पुष्कर की सहभागिता के साथ ब्राह्मण भोजन एवं जरूरतमंदों की सेवा की गई।

सर्वपितृ अमावस्या 2026: सात तीर्थों से ऑनलाइन सामूहिक तर्पण | Krishna Guruji

सर्वपितृ अमावस्या 2026 पर सात पितृ तीर्थों से ऑनलाइन सामूहिक तर्पण का चित्र, कृष्णा गुरुजी की मुस्कुराती तस्वीर के साथ।

सर्वपितृ अमावस्या पर कृष्णा गुरुजी सात पितृ तीर्थों को जोड़कर निःशुल्क ऑनलाइन सामूहिक तर्पण आयोजित करेंगे। 10 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे ज्ञात-अज्ञात और असमय दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

पितृपक्ष में क्या हमारी अगली पीढ़ी करेगी हमारा श्राद्ध? | Kaliyug Puran | Krishna Guruji

पितृपक्ष में अगली पीढ़ी के श्राद्ध पर प्रश्न वाला चित्र, नमस्कार करते कृष्णा गुरुजी और भोजन करते ब्राह्मण का दृश्य।

व्यस्त जीवन में श्राद्ध की परंपरा कैसे आगे बढ़े? Krishna Guruji से जानें बच्चों को पूर्वजों, पारिवारिक संस्कार और कृतज्ञता से जोड़ने का सरल विचार।

पितृ तर्पण क्या है? जल अर्पण का अर्थ और कृतज्ञता | Krishna Guruji In Kaliyug Puran

पितृ तर्पण क्या है? कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी

पितृ तर्पण केवल जल अर्पित करने की परंपरा नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सेवा का भाव है। जानिए तर्पण का शास्त्रीय अर्थ, हस्ततीर्थों की महत्ता और कलियुग पुराण की दृष्टि से युवा पीढ़ी इसे आज के जीवन में कैसे समझ सकती है।

Register Now

Lorem Ipsum dolar