विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 का “आध्यात्मिक चेतना सेवा सम्मान” प्रदान किया। उनका गृहस्थ जीवन, आध्यात्मिक संस्कार और
निःस्वार्थ सेवा इस सम्मान की प्रेरणा बने।
उनके जीवन में अध्यात्म केवल पूजा के समय दिखाई नहीं देता। वह उनकी दिनचर्या, गृहस्थ जीवन, भजन
और लोगों तक सनातन धर्म का ज्ञान पहुँचाने की भावना में भी दिखाई देता है। इसी निःस्वार्थ समर्पण ने मुझे प्रभावित किया।
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से चल रही गणेश आरती के मानवीकरण की मुहिम में
हम ऐसे व्यक्तित्वों को पहचान रहे हैं, जो अपनी क्षमता से दूसरों के जीवन में सकारात्मक योगदान देते हैं। तिवारी जी का सम्मान
इसी सेवा दृष्टि की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
गृहस्थ जीवन में अध्यात्म का समर्पण
पंडित अतुल रामनारायण तिवारी जी इंदौर के निवासी हैं। उन्होंने मानव संसाधन विषय में MBA (HR) किया है।
वर्तमान में वे इंदौर में पेट्रोल पंप संचालित कर रहे हैं। उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। परिवार और व्यवसाय की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए
वे आध्यात्मिक साधना तथा सेवा के लिए समय निकालते हैं। मुझे उनके जीवन का यही पक्ष विशेष रूप से प्रेरक लगा।
हम कई बार सोचते हैं कि आध्यात्मिक जीवन के लिए पारिवारिक जिम्मेदारियों से अलग होना आवश्यक है।
तिवारी जी की दिनचर्या हमें जिम्मेदारियों के साथ साधना के लिए स्थान बनाने की प्रेरणा देती है।
परिवार के प्रति कर्तव्य, नियमित उपासना और समाज के साथ ज्ञान साझा करना उनके जीवन में साथ-साथ चलते हैं।
माता-पिता से मिले संस्कार और अगली पीढ़ी में आध्यात्मिक ज्योति
उनके उपलब्ध कराए परिचय के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय पंडित रामनारायण जी तिवारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।
उनकी माताजी स्वर्गीय श्रीमती कस्तूरी देवी तिवारी आध्यात्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। माता-पिता से ही उन्हें बचपन में धार्मिक अध्ययन, उपासना और संस्कारों की प्रेरणा मिली।
परिवार के परिचय में उनके पिता का संबंध ब्रह्मलीन धर्मसम्राट श्री करपात्री जी महाराज तथा
ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी की शिष्य-परंपरा से बताया गया है।
पंडित अतुल रामनारायण तिवारी जी स्वयं भी स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी के दीक्षित शिष्य हैं।
मुझे उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह लगी कि बचपन में प्राप्त आध्यात्मिक चेतना को उन्होंने जीवन में बनाए रखा। साथ ही
, अपने बच्चों में भी वेद-पुराण के अध्ययन, धार्मिक जिज्ञासा और सजग जीवन की प्रेरणा जगाई।
माता-पिता से मिले संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना भी एक महत्वपूर्ण पारिवारिक सेवा है।
बचपन में मिली आध्यात्मिक ज्योति को अपने जीवन में बनाए रखना और बच्चों के भीतर भी उसे प्रज्वलित करना—
तिवारी जी के व्यक्तित्व का यही पक्ष मुझे विशेष रूप से प्रभावित करता है।
ब्रह्म मुहूर्त का शंखनाद और नियमित उपासना
इंदौर की पत्रकार कॉलोनी में तिवारी जी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त की साधना और शंखनाद से आरंभ होती है।
उनका शंखनाद आसपास के वातावरण में भक्ति का भाव जगाता है। इसके बाद वे नियमित पूजा, पाठ और धार्मिक अध्ययन में समय देते हैं।
यह उनके जीवन में अनुशासन और श्रद्धा का सहज परिचय है।
मेरी दृष्टि में आध्यात्मिक चेतना का एक पक्ष अपनी दिनचर्या को सजग बनाना भी है। प्रतिदिन साधना के लिए समय निकालना,
अपने व्यवहार में संयम रखना और दूसरों के साथ सद्भाव से जुड़ना इस चेतना को जीवन में उतारने के तरीके हैं।
तिवारी जी का सम्मान उनकी इसी निरंतरता और समर्पण को प्रणाम है।
उनके दिए परिचय में शंख के माध्यम से मंत्रों के उद्घोष की साधना का भी उल्लेख है।
वे इसे देवकृपा से प्राप्त एक प्राचीन सनातनी विद्या मानते हैं। उसी परिचय के अनुसार, वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद जी ने
भी उनका शंख द्वारा मंत्रोच्चार सुना और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। यह उनके लिए आस्था और साधना से जुड़ा विशेष अनुभव है।
शंख वादन के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मान
कृष्णा गुरुजी को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, पंडित अतुल रामनारायण तिवारी जी को शंख वादन के लिए
लंदन की वर्ल्ड रिकॉर्ड संस्था से सम्मान भी प्राप्त हुआ है।
यह उपलब्धि उनकी शंख-साधना और संगीतात्मक अभिव्यक्ति के परिचय का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
वेद-पुराण के ज्ञान को लोगों तक पहुँचाने की सेवा
तिवारी जी वेदों और अठारह पुराणों का अध्ययन कर रहे हैं। वे संस्कृत में गायन करते हैं और श्री गणेश पुराण की कथा भी कहते हैं।
धार्मिक प्रसंगों को याद रखने और उन्हें लोगों के साथ साझा करने का उनका उत्साह मुझे प्रभावित करता है।
इस माध्यम से वे सनातन धर्म के ज्ञान और भक्ति की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
ज्ञान का सामाजिक महत्व तब बढ़ता है, जब वह दूसरों के लिए उपयोगी बने। धार्मिक प्रसंगों को साझा करने से लोगों में जिज्ञासा जाग सकती है।
वे अपने जीवन, आचरण और कर्तव्यों पर विचार कर सकते हैं। तिवारी जी का यह प्रयास आध्यात्मिक सेवा की ऐसी अभिव्यक्ति है,
जिसमें अध्ययन के साथ संवाद भी जुड़ा है।
खजराना गणेश मंदिर में भजन और भक्ति
तिवारी जी इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में प्रातःकाल भजन गायन भी करते हैं।
उनका स्वर और भक्ति भाव श्रद्धालुओं को उपासना से जोड़ता है।
इसके अतिरिक्त, वे अपने आसपास के मंदिर में गणेश पूजा, शिव पूजा और अन्य धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं।
खजराना गणेश मंदिर इंदौर की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार,
इसका निर्माण महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था।
मंदिर के बारे में प्रामाणिक जानकारी के लिए इंदौर जिला प्रशासन का खजराना मंदिर परिचय पढ़ सकते हैं।
मंदिर में भजन गाना उनके लिए सेवा का एक माध्यम है। वे अपनी आवाज, समय और धार्मिक रुचि को ईश्वर की उपासना तथा लोगों में
आध्यात्मिक जागरूकता के लिए समर्पित करते हैं। इस सहज और निःस्वार्थ भाव का सम्मान करना मुझे आवश्यक लगा।
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026: आध्यात्मिक चेतना सेवा सम्मान
विघ्नहर्ता अवॉर्ड का उद्देश्य समाज में सेवा के विविध रूपों को सामने लाना है। नेत्रदान, पीड़ितों की देखभाल, शिक्षा और
अन्य मानवीय कार्यों के साथ आध्यात्मिक ज्ञान तथा सद्भाव का प्रसार भी समाज में सकारात्मक योगदान दे सकता है।
तिवारी जी को दिया गया “आध्यात्मिक चेतना सेवा सम्मान” उनकी इसी भूमिका की पहचान है।
गणेश आरती के मानवीकरण की मुहिम हमें प्रेरित करती है कि आराधना के भाव हमारे कर्म में दिखाई दें।
इस विचार को विस्तार से समझने के लिए मेरा लेख गणेश जी को मंगलमूर्ति क्यों कहते हैं? — Kaliyug Puran और Krishna Guruji पढ़ें।
सेवा के अन्य प्रेरक व्यक्तित्वों का सम्मान
गणेश चतुर्थी 2026 इसी श्रृंखला में नेत्रदान की सेवाओं के लिए श्री नंदकिशोर व्यास को सम्मानित किया गया।
उनका परिचय विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026: “अंधन को आँख देत” नेत्रदान सेवा सम्मान लेख में पढ़ सकते हैं।
कुष्ठ प्रभावित लोगों की सेवा से जुड़ी कड़ी के लिए कुष्ठ सेवा सदन में गणेश स्थापना और यामिनी निवासकर का सम्मान भी देखें।
अभियान की पिछली यात्रा विघ्नहर्ता 2025 और गणेश आरती के मानवीकरण की मुहिम में उपलब्ध है।
सम्मान समारोह का YouTube वीडियो
पंडित अतुल रामनारायण तिवारी जी को विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 के अंतर्गत “आध्यात्मिक चेतना सेवा सम्मान” प्रदान करने का वीडियो देखें।
सम्मान का वीडियो सीधे YouTube पर देखें।
गणेश चतुर्थी 2026 पर मेरी ओर से सेवा और समर्पण को नमन
तिवारी जी में मैंने एक ऐसे गृहस्थ का उदाहरण देखा है,
जो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ ईश्वर की सेवा में समय देता है।
वे अपने ज्ञान और स्वर को समाज के साथ साझा करते हैं। ऐसे व्यक्तित्व हमें याद दिलाते हैं
कि सेवा के लिए हमारी अपनी क्षमताएँ ही शुरुआत बन सकती हैं।
गणेश चतुर्थी 2026 पर मेरा संकल्प है कि त्योहारों के माध्यम से ऐसे सेवाभावी व्यक्तित्वों को समाज के सामने लाया जाए।
उनकी साधना और समर्पण से अन्य लोग भी प्रेरणा लें।
श्री अतुल रामनारायण तिवारी जी को आध्यात्मिक चेतना सेवा सम्मान देते हुए मैं उनकी निःस्वार्थ सेवा को नमन करता हूँ।
— Krishna Kant Mishra (Krishna Guruji)
Author of Kaliyug Puran
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी
जीवन आपका, सुझाव मेरा।
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