इंदौर के कुष्ठ सेवा सदन में कृष्णा कांत मिश्रा (कृष्णा गुरुजी) ने लगातार आठवें वर्ष भगवान गणेश की स्थापना की। इस अवसर पर लगभग 15 वर्षों से कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों की सेवा कर रहीं सुश्री यामिनी निवासकर को “कोढ़न को काया देत—कुष्ठ सेवा सम्मान” के अंतर्गत विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में कुष्ठ सेवा सदन के सदस्यों, कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों और सेवाभावी नागरिकों ने सामूहिक रूप से भगवान गणेश की आरती की। सभी ने श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजन में भाग लिया।
गणेश आरती से मानव सेवा की संकल्प-यात्रा
कृष्णा गुरुजी ने गणेश आरती की भावानुकूल पंक्तियों—
“अंधन को आँख देत, कोढ़न को काया।
बाँझन को गर्भ देत, निर्धन को माया॥”
—को मानव सेवा की संकल्प-यात्रा का आधार बनाया है।
कृष्णा गुरुजी का मानना है कि गणेश आरती के ये चार भाव केवल गाने के लिए नहीं हैं। इन्हें जरूरतमंद लोगों की सेवा के माध्यम से जीवन में उतारना चाहिए।
इसी विचार से “विघ्नहर्ता अवॉर्ड–2026” की विभिन्न सेवा श्रेणियाँ निर्धारित की गई हैं। इसके अंतर्गत ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जा रहा है,
जो दूसरों के जीवन के विघ्न दूर करके उनके लिए सच्चे विघ्नहर्ता बन रहे हैं।
यामिनी निवासकर को “कोढ़न को काया देत” सम्मान
इस संकल्प-यात्रा के अंतर्गत सुश्री यामिनी निवासकर को “कोढ़न को काया देत—कुष्ठ सेवा सम्मान” प्रदान किया गया।
यामिनी निवासकर पिछले लगभग 15 वर्षों से कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों की निरंतर सेवा कर रही हैं।
उनके समर्पण और सेवाभाव के लिए कृष्णा गुरुजी ने अपने सहयोगियों अनिल कुमार, उमापति पांडे और पिंको यादव के साथ उन्हें विघ्नहर्ता अवॉर्ड प्रदान किया।
“नई काया देने वाला परमात्मा है, लेकिन किसी पीड़ित व्यक्ति की सेवा करके उसके जीवन को सहारा देने वाला सेवाभावी व्यक्ति ही हमारे लिए सच्चा गणपति और सच्चा विघ्नहर्ता है।
यामिनी निवासकर के भीतर हमें मानवता के रूप में साक्षात् गणेश दिखाई देते हैं।”
कृष्णा गुरुजी की यह बात सुनकर उपस्थित लोगों ने तालियाँ बजाकर यामिनी निवासकर की सेवा का अभिनंदन किया।
त्योहारों की खुशियाँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें
कृष्णा गुरुजी ने कहा कि त्योहारों का आनंद केवल अपने घर और परिवार तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
समाज के वंचित, उपेक्षित और जरूरतमंद लोगों को भी त्योहारों की खुशियों में सहभागी बनाना चाहिए।
“त्योहार तभी सार्थक होते हैं, जब उनकी प्रसन्नता समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।”
कृष्णा गुरुजी पिछले आठ वर्षों से कुष्ठ सेवा सदन में भगवान गणेश की स्थापना करके गणेशोत्सव को मानव सेवा से जोड़ रहे हैं।
कुष्ठ सेवा सदन के सदस्यों ने जताई प्रसन्नता
कुष्ठ सेवा सदन के गंगाराम ने कहा, “कृष्णा गुरुजी प्रत्येक वर्ष हमारे बीच आकर भगवान गणेश की स्थापना करते हैं।
हमें इस आयोजन की प्रतीक्षा रहती है और उनके आने से बहुत प्रसन्नता मिलती है।”
जसवंता बाई ने भावुक होकर कहा, “भगवान गणेश स्वयं हमारी सहायता करने नहीं आते, लेकिन उन्होंने कृष्णा गुरुजी और दूस
रे सेवाभावी लोगों के रूप में अपने बंदे हमारे पास भेज रखे हैं। ये लोग हमारी सहायता करते हैं, इसके लिए हम हृदय से उनका धन्यवाद करते हैं।”
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026 की आगे की यात्रा
गणेशोत्सव के शेष दिनों में कृष्णा गुरुजी ऐसे सेवाभावी व्यक्तियों और संस्थाओं के घर जाकर उन्हें विघ्नहर्ता अवॉर्ड–2026 प्रदान करेंगे
, जो समाज के लोगों के जीवन से कठिनाइयाँ दूर करके उनके विघ्नहर्ता बन रहे हैं।
इस सम्मान-यात्रा में राष्ट्रपति पुरस्कार और पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत सेवाभावी व्यक्तित्व भी शामिल हैं।
इनमें पूजा गर्ग और सत्येंद्र लोहिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवा करने वाली विभूतियाँ सम्मिलित हैं।
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समाचार-पत्रों में विघ्नहर्ता अभियान
कृष्णा गुरुजी की गणेश आरती के मानवीयकरण और विघ्नहर्ता अवॉर्ड की
संकल्प-यात्रा को समाचार-पत्रों ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर पढ़ें
अमर उजाला: कृष्णा गुरुजी का विघ्नहर्ता सम्मान और मानव सेवा अभियान
स्वतंत्र समय, इंदौर ने भी “कुष्ठ सेवा सदन में आठवें वर्ष गणेश स्थापना, यामिनी को मिला विघ्नहर्ता सेवा सम्मान”
शीर्षक से इस आयोजन को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
विघ्नहर्ता अभियान की 2024 से 2026 तक की यात्रा
विघ्नहर्ता अवॉर्ड केवल एक वर्ष का आयोजन नहीं, बल्कि त्योहारों को मानव सेवा से जोड़ने की निरंतर संकल्प-यात्रा है।
इसके पिछले वर्षों की गतिविधियाँ और सम्मान यहाँ पढ़ें:
विघ्नहर्ता 2024: कुष्ठ आश्रम में गणेश स्थापना और मानव सेवा
विघ्नहर्ता 2025: “अंधन को आँख देत” अभियान का सातवाँ वर्ष
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2025 का ऑनलाइन समापन
गणेश आरती के मानवीयकरण का संदेश
कृष्णा गुरुजी के अनुसार भगवान गणेश की आरती तभी जीवन में सार्थक होती है, जब हम स्वयं किसी जरूरतमंद व्यक्ति का विघ्न दूर करने का प्रयास करें।
समाज के लिए साक्षात् गणेश वही है, जो किसी पीड़ित के जीवन का विघ्न दूर करके उसका विघ्नहर्ता बन जाए।
गणेश जी के स्वरूप और मानव सेवा के संबंध को विस्तार से समझने के लिए यह संबंधित लेख पढ़ें:
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— कृष्णा कांत मिश्रा (कृष्णा गुरुजी)
Author of Kaliyug Puran
Spiritual Mentor, Yoga Teacher and Humanitarian
जीवन आपका, सुझाव मेरा।
सौजन्य: कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी, इंदौर
संपर्क: 9826070286

