विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2025 ऑनलाइन समापन | बने किसी के विघ्नहर्ता

विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2025 ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय समापन पोस्टर—गणेश रेखाचित्र, स्वर्ण ट्रॉफी और संदेश “बने किसी के विघ्नहर्ता”
विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2025 का ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय समापन राष्ट्रगान से शुरू हुआ। कृष्णा गुरुजी ने गणेश आरती के मानवीकरण का संदेश दिया और संकल्प ध्यान कराया—“बने किसी के विघ्नहर्ता।” विभिन्न क्षेत्रों के सच्चे सेवकों को सम्मानित किया गया।

Share This Post

विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2025 ऑनलाइन समापन: बने किसी के विघ्नहर्ता

इंदौर, 7 सितम्बर 2025: शहर-शहर गणेश विसर्जन के बीच, एक भावनात्मक और अनूठा आयोजन हुआ—विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2025 का ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय समापन। Moreover, इस कार्यक्रम ने सेवा और करुणा का स्पष्ट संदेश दिया। In addition, देश-विदेश से सैकड़ों लोग लाइव जुड़े।

राष्ट्रगान से हुई शुरुआत

Additionally, समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई और इसके बाद अवॉर्डीज़ का परिचय एक शॉर्ट प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से दिखाया गया। Next, सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया गया और कार्यक्रम की रूपरेखा साझा हुई।

कृष्णा गुरुजी का संदेश: गणेश आरती का मानवीय संदेश

Therefore, कृष्णा गुरुजी ने बताया कि गणेश आरती की पंक्तियाँ—“अन्धन को आंख देत, कोड़न को काया, बाझन को पुत्र देत, निर्धन को माया”—हमें किसी की आँख बनकर देखभाल करने, सहारा देने और मदद का हाथ बढ़ाने की प्रेरणा देती हैं। As a result, इसी सोच से ‘विघ्नहर्ता अवॉर्ड’ शुरू हुआ, जो सच्चे सेवकों को पहचान देता है।

भावुक कर देने वाले क्षण

Meanwhile, कार्यक्रम में कई प्रेरक वक्तव्य हुए:

  • For example, अनिल रांका (109 बार रक्तदान): “सेवा को यह पहचान मिलना मेरे लिए सम्मान है।”
  • Similarly, डॉ. श्वेता वालिया: “नेत्रदान सबसे बड़ी सेवा है—संकल्प लें।”
  • Likewise, स्व. सुरेंद्र पोरवाल की धर्मपत्नी: “देहदान का निर्णय कठिन था, पर आज गर्व है।”
  • For instance, दिव्यांग अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पूजा गर्ग: “यह अवॉर्ड नई ऊर्जा देता है।”
  • Furthermore, पत्रकार कमलेश सेन: “36 वर्षों की पत्रकारिता में यह अलग तरह का सम्मान है।”
  • Consequently, जितेंद्र सुमन (मानसिक अस्पताल सेवा): “17 वर्षों की सेवा को सच्ची पहचान मिली।”

संकल्प ध्यान

Finally, अंत में कृष्णा गुरुजी ने संकल्प ध्यान कराया। Overall, सभी ने तय किया कि वे जीवन में किसी न किसी रूप में “किसी के विघ्नहर्ता” बनेंगे।

संचालन और वैश्विक सहभागिता

Additionally, कार्यक्रम का संचालन जयलक्ष्मी (सिएटल, USA) ने किया और आभार वंशिका शर्मा (लखनऊ) ने जताया। Moreover, ह्यूमनिटी फाउंडेशन के कृष्णेन जी, प्रतिभा गुप्ता (USA), कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर के सदस्य तथा USA, कनाडा, दुबई, मलेशिया सहित कई देशों के लोग जुड़े।

इस वर्ष सम्मानित विघ्नहर्ता

  1. शहीद सुशील नाथियाल – ऑपरेशन सिंदूर (मरणोपरांत)
  2. स्व. सुरेंद्र पोरवाल – देह दानी (मरणोपरांत)
  3. एम.वाय. आई बैंक टीम – “अन्धन को आंख देत”
  4. जसंता बाई – “कोड़न को काया” (कुष्ठ रोग सेवा)
  5. डॉ. निकिता रावल – “बाझन को गर्भ देत”
  6. राजन रानाडे – “निर्धन को माया” (मुफ्त शिक्षा)
  7. पूजा गर्ग – दिव्यांग, कैंसर जागरूक करने की मिसाल
  8. जितेंद्र सुमन – “बुद्धि प्रदायक” (मानसिक अस्पताल सेवा)
  9. कैलाश विजयवर्गीय – पर्यावरण सेवा (51 लाख पौधारोपण)
  10. सर्वप्रिय बंसल – मुफ्त फिजियो सेंटर
  11. कमलेश सेन – पत्रकारिता सेवा

वीडियो: प्रमुख क्षण (38:03 से)

प्रेस कवरेज

अमर उजाला कवरेज: समाज के सच्चे सेवकों को ‘विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2025’ से सम्मान


विघ्नहर्ता अवॉर्ड—गणेश आरती के संदेश को मानव सेवा में बदलने का सतत प्रयास, कृष्णा गुरुजी के मार्गदर्शन में।


Subscribe To Our Newsletter

Get updates and learn from the best

More To Explore

दशहरा पर गिलकी के भजिए विषय की फीचर इमेज में नमस्कार करते Krishna Guruji, रावण दहन, हरी गिलकी और भजियों की थाली।
FESTIVAL TRANSFORMATION

दशहरे पर गिलकी क्यों खाई जाती है? Kaliyug Puran से Krishna Guruji की व्याख्या

दशहरे पर गिलकी के भजिए खाने की मालवा की परंपरा क्या संदेश देती है? कृष्णा गुरुजी कलियुग पुराण की दृष्टि से इसे महामृत्युंजय मंत्र के मुक्ति-भाव और भीतर के विकारों से मुक्त होने के संकल्प से जोड़ते हैं।

रावण दहन का महत्व: जलते रावण के प्रतीक के साथ नमस्कार मुद्रा में कृष्णा गुरुजी और भीतर के दस विकारों के दहन का संदेश।
Blog

रावण दहन का महत्व: इस विजयादशमी भीतर के दस विकारों का भी दहन करें

रावण दहन का महत्व केवल पुतला जलाने तक सीमित नहीं है। यह अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे दस विकारों को पहचानने का अवसर है। कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी समझाते हैं कि ज्ञान का सदुपयोग, आत्मचिंतन और ध्यान कैसे विजयादशमी को सार्थक बना सकते हैं।

Do You Want To Boost Your Business?

drop us a line and keep in touch

Register Now

Lorem Ipsum dolar