
महाकाल की भस्मारती का रहस्य: शिव और भस्म का क्या संबंध है?
कृष्णा गुरुजी (कृष्णा कांत मिश्रा) एक आध्यात्मिक चिंतक, योग साधक और ‘कलियुग पुराण’ के लेखक हैं। वे जटिल आध्यात्मिक विषयों को तर्कपूर्ण, सरल और समकालीन भाषा में समझाने के लिए जाने जाते हैं। योग, ध्यान, मानवता, उत्सव रूपांतरण, दिव्य एस्ट्रो हीलिंग तथा सर्वधर्म प्रार्थना के माध्यम से वे लोगों को अपने भीतर के दिव्य तत्व को पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं। इस लेख में प्रस्तुत विचार ‘कलियुग पुराण’ की आध्यात्मिक दृष्टि पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य परंपराओं के पीछे छिपे संकेतों को आधुनिक संदर्भ में समझाना है।








