रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष भी कृष्णा गुरुजी बीमा अस्पताल के पीछे स्थित कुष्ठ सेवा सदन, इंदौर जाकर वहां रहने वाली बहनों से राखी बंधवाएंगे। यह पहल केवल एक त्योहार मनाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की उपेक्षित बहनों को सम्मान, अपनापन और सुरक्षा का भरोसा देने का प्रयास है।
बीमा अस्पताल के पीछे, कुष्ठ सेवा सदन इंदौर में रक्षाबंधन 2026
📍 स्थान: कुष्ठ सेवा सदन, बीमा अस्पताल के पीछे, इंदौर
आमतौर पर रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और रक्षा-वचन का पर्व माना जाता है। कृष्णा गुरुजी इस भावना को परिवार की सीमाओं से आगे ले जाते हुए उन बहनों तक पहुंचाना चाहते हैं जिन्हें बीमारी, सामाजिक दूरी या परिस्थितियों के कारण अक्सर उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
“सच्चा रक्षाबंधन वही है जिसमें सुरक्षा और सम्मान का भाव उन बहनों तक भी पहुंचे जिन्हें समाज अक्सर भूल जाता है।” — कृष्णा गुरुजी
रक्षाबंधन 2026 कब है?
वर्ष 2026 में रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को है। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। राखी बांधने का समय शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। शहर-आधारित मुहूर्त के लिए Drik Panchang का Raksha Bandhan 2026 विवरण देखें और भद्रा काल से बचें।
इंदौर कुष्ठ सेवा सदन की बहनों से राखी क्यों?
कुष्ठ रोग को लेकर समाज में आज भी कई गलत धारणाएं और दूरियां दिखाई देती हैं। बीमारी से अधिक पीड़ा कई बार सामाजिक उपेक्षा देती है। ऐसे में किसी आश्रम में जाकर साथ बैठना, संवाद करना, राखी बंधवाना और सम्मान देना एक शक्तिशाली सामाजिक संदेश बन जाता है।
- हर बहन सम्मान और अपनापन पाने की अधिकारी है।
- बीमारी किसी व्यक्ति की गरिमा कम नहीं करती।
- त्योहार केवल परिवार तक सीमित न रहकर सेवा का माध्यम बन सकते हैं।
- रक्षा का अर्थ भावनात्मक और सामाजिक सुरक्षा भी है।
2025 की पहल की निरंतरता
रक्षाबंधन 2025 पर कृष्णा गुरुजी ने इंदौर कुष्ठ सेवा सदन में उपेक्षित बहनों से राखी बंधवाई थी और उन्हें सुरक्षा व सम्मान का संदेश दिया था। इस वर्ष वह उसी सेवा-भाव को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं। पिछले वर्ष की पूरी पहल यहां पढ़ें: रक्षाबंधन 2025 पर कृष्णा गुरुजी की अनूठी पहल। इस सेवा-पहल की खबर अमर उजाला में प्रकाशित रक्षाबंधन 2025 कवरेज में भी पढ़ें।
राखी का आध्यात्मिक अर्थ
राखी केवल कलाई पर बांधा गया धागा नहीं है। यह विश्वास, जिम्मेदारी और परस्पर सम्मान का प्रतीक है। सच्ची रक्षा में व्यक्ति के आत्मसम्मान, स्वास्थ्य, भावनाओं और अधिकारों की रक्षा भी शामिल है। बहन भी भाई की भावनात्मक शक्ति, सलाहकार और रक्षक होती है; इसलिए रक्षाबंधन एकतरफा वचन नहीं, बल्कि परस्पर सहयोग का पर्व है।
समाज कैसे जुड़ सकता है?
- अपने आसपास के वृद्धाश्रम, अनाथालय या सेवा संस्थान में समय बिताएं।
- जरूरतमंद महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य या आत्मनिर्भरता में सहयोग दें।
- कुष्ठ रोग और अन्य बीमारियों से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करें।
- उपहार के साथ सम्मान, संवाद और जरूरत के समय साथ देने का संकल्प लें।
- पर्यावरण-अनुकूल राखी और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें।
कृष्णा गुरुजी का संदेश
कृष्णा गुरुजी का मानना है कि त्योहार की पूजा तभी पूर्ण होती है जब उसका भाव हमारे कर्म में दिखाई दे। यदि एक उपेक्षित बहन को यह अनुभव हो कि वह अकेली नहीं है, तो वही रक्षाबंधन की सच्ची सफलता होगी।
इस रक्षाबंधन पर हम केवल राखी न बांधें, बल्कि ऐसा संकल्प बांधें जो पूरे वर्ष हमारे व्यवहार में दिखाई दे। परिवार के साथ-साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और अपनापन जोड़ें।
संबंधित लेख और उपयोगी लिंक
- रक्षाबंधन 2025: कुष्ठ आश्रम में कृष्णा गुरुजी की पहल
- कृष्णा गुरुजी की सामाजिक सेवा पहल
- अमर उजाला: कुष्ठ सेवा सदन में रक्षाबंधन 2025
- कृष्णा गुरुजी से संपर्क करें
- भारत सरकार से संबंधित 2026 holiday list PDF
आप सभी को रक्षाबंधन 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।

