सर्वपितृ अमावस्या तर्पण: ऑनलाइन जुड़ा विश्व परिवार
सर्वपितृ अमावस्या तर्पण के इस आयोजन में ऑनलाइन पितृ तर्पण और अंतरराष्ट्रीय सामूहिक तर्पण के माध्यम से देश-विदेश के परिवार जुड़े।
Sarva Pitru Amavasya पर कृष्णा गुरुजी ने पूर्वजों के स्मरण, कृतज्ञता और सेवा का संदेश दिया।
10 अक्टूबर 2026 को आध्यात्मिक चिंतक कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’ के सान्निध्य में यह निःशुल्क कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी की इस पहल का केंद्र इंदौर बना। वहीं उज्जैन के सिद्धवट, हरिद्वार, ऋषिकेश और पुष्कर से पंडितों ने सहभागिता की।
आयोजन का विशेष भाव था—अपने पितरों के साथ उन्हें भी याद करें, जिनका तर्पण करने वाला कोई नहीं है।
इसलिए अपने पूर्वजों के साथ अज्ञात और असमय दिवंगत लोगों की आत्मशांति के लिए भी प्रार्थना की गई।
इंदौर से देश-विदेश तक पहुँची सामूहिक प्रार्थना
ऑनलाइन सत्र में अमेरिका, कनाडा, दुबई, सिंगापुर और यूरोप के विभिन्न स्थानों से लोग जुड़े।
इस माध्यम से दूर रहने वाले परिवारों को भी एक साथ पूर्वजों का स्मरण करने का अवसर मिला।
सहभागियों ने अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और दिवंगत प्रियजनों को नमन किया। साथ ही उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की,
जिन्होंने असमय किसी अपने को खो दिया। इस तरह आयोजन ने इंदौर, उज्जैन और पुणे को श्रद्धा के एक सूत्र में जोड़ा।
भागीरथपुरा के दिवंगतों को श्रद्धांजलि
सर्वपितृ अमावस्या पर इंदौर के भागीरथपुरा की दूषित पेयजल त्रासदी में दिवंगत हुए लोगों का विशेष स्मरण किया गया।
उनकी आत्मशांति और शोकाकुल परिवारों को संबल मिलने की प्रार्थना हुई।
कृष्णा गुरुजी ने कहा कि किसी परिवार का दुःख केवल उसी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाज को संवेदना के साथ उसके साथ खड़ा होना चाहिए।
इसी भावना से कार्यक्रम में अपने परिवार के पूर्वजों के अतिरिक्त अन्य दिवंगतों को भी श्रद्धांजलि दी गई।
पुणे के केतन अग्रवाल की स्मृति में तर्पण
पुणे के युवा केतन अग्रवाल की स्मृति में भी सामूहिक तर्पण और प्रार्थना की गई। कृष्णा गुरुजी ने उनके पिताजी श्री विशाल अग्रवाल को कार्यक्रम में आमंत्रित किया था।
उनसे टेलीफोन पर चर्चा कर केतन की स्मृति में किए गए तर्पण की जानकारी भी दी गई।
किसी युवा का असमय चले जाना परिवार के लिए गहरा आघात होता है। इसलिए सहभागियों ने केतन को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिजनों के लिए धैर्य और संबल की कामना की।
उज्जैन सिद्धवट से ऑनलाइन पितृ तर्पण
उज्जैन का पावन सिद्धवट तीर्थ भी इस आयोजन में शामिल हुआ। सिद्धवट से लालू गुरु ने कृष्णा गुरुजी के सान्निध्य में ऑनलाइन जुड़कर तर्पण संपन्न कराया।
उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सिद्धवट मंदिर और पावन शिप्रा के दर्शन कराए।
इसके साथ अन्य तीर्थस्थलों से जुड़े पंडितों ने भी प्रार्थना में सहभागिता की। ऋषिकेश से माँ गंगा के दर्शन कराए गए।
इस प्रकार ऑनलाइन माध्यम ने दूर बैठे लोगों को तीर्थ दर्शन और सामूहिक स्मरण से जोड़ा।
- उज्जैन, सिद्धवट: लालू गुरु
- हरिद्वार: पंडित राजीव शर्मा
- ऋषिकेश: पंडित दिनेश जी
- पुष्कर: योगेश पराशर जी
सर्वपितृ अमावस्या पर ब्राह्मण भोजन और सेवा
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजन से जुड़े इन सभी तीर्थस्थलों पर ब्राह्मणों को भोजन कराया गया।
उज्जैन के सिद्धवट पर लालू गुरु ने तर्पण के साथ ब्राह्मण भोजन की स्थानीय व्यवस्था संपन्न कराई।
इसके अतिरिक्त अलग-अलग स्थानों पर जरूरतमंदों के लिए भोजन सेवा की गई।
मुंबई के हाजी अली क्षेत्र स्थित दिव्यांगजनों की संस्था में भी भोजन की व्यवस्था की गई।
कृष्णा गुरुजी ने सेवा में भोजन पाने वालों की पसंद और सम्मान का ध्यान रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा भोजन दिया जाए,
जिसे लोग प्रसन्नता से ग्रहण करें। इस प्रकार श्रद्धा के साथ अपनापन भी व्यक्त हो सकता है।
जिनका कोई नहीं, उनके लिए भी प्रार्थना
कृष्णा गुरुजी ने बताया कि वे लगभग बारह वर्षों से इस भावना के साथ आयोजन करते आ रहे हैं। ऑनलाइन कार्यक्रमों से पहले वे स्वयं उज्जैन जाकर सिद्धवट पर तर्पण करते थे
। उन्होंने लगभग 150 लोगों की लावारिस अस्थियों के विसर्जन में सेवा का अवसर मिलने का भी स्मरण किया।
इस वर्ष भी अज्ञात दिवंगतों और आपदाओं में जीवन खोने वाले लोगों को सामूहिक प्रार्थना में स्थान दिया गया।
धार्मिक आस्था के अनुरूप अतृप्त आत्माओं की शांति और सद्गति की कामना की गई।
“हम हमारे लिए तो बहुत कुछ कर रहे हैं, क्यों न हम किसी और के लिए?”
कलयुग पुराण की दृष्टि: कृतज्ञता और करुणा
कलयुग पुराण की अपनी व्याख्या में कृष्णा गुरुजी ने परंपराओं का भाव सरल भाषा में समझाने पर जोर दिया।
उनके अनुसार, अगली पीढ़ी को विधि के साथ उसका उद्देश्य भी समझाना आवश्यक है।
इससे युवा श्रद्धा, कृतज्ञता और सामाजिक जिम्मेदारी को अपने जीवन से जोड़ सकते हैं।
सत्र में देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण को धन्यवाद के भाव से समझाया गया:
- देव ऋण: प्रकृति और जीवन को सहारा देने वाली शक्तियों के प्रति कृतज्ञता।
- ऋषि ऋण: ऋषियों, गुरुओं और ज्ञान देने वालों के प्रति सम्मान।
- पितृ ऋण: माता-पिता और पूर्वजों के प्रति धन्यवाद, जिनसे जीवन और संस्कार मिले।
ध्यान के दौरान सहभागियों से अपने पूर्वजों का स्मरण करने का आग्रह किया गया।
साथ ही जिनके माता-पिता जीवित हैं, उन्हें उनके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा दी गई।
अगली पीढ़ी को सेवा का संस्कार दें
कृष्णा गुरुजी ने अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। इस वर्ष उन्होंने अपनी माता की स्मृति में वृद्धाश्रम जाकर वृद्धजनों को भोजन परोसा।
उन्होंने परिवारों से आग्रह किया कि बच्चों को भी दिवंगत प्रियजनों की स्मृति में सेवा करना सिखाएँ।
इसके लिए वृद्धाश्रम, कुष्ठ सेवा आश्रम या जरूरतमंद परिवारों तक अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग पहुँचाया जा सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पारंपरिक तिथि याद न होने पर परिवार परिचित कैलेंडर की तारीख पर भी स्मरण
और भोजन सेवा कर सकता है। यह व्यस्त जीवन में सेवा की निरंतरता बनाए रखने का उनका प्रस्ताव था।
Remember with gratitude. Serve with compassion.
अपने पूर्वजों को प्रेम से याद करें। उनकी स्मृति में किसी जरूरतमंद के जीवन में सहारा बनें।
सर्वपितृ अमावस्या आयोजन की मीडिया कवरेज
इस आयोजन की समाचार कवरेज के लिए साझा किए गए अमर उजाला और दैनिक भास्कर के लिंक नीचे उपलब्ध हैं।
संबंधित प्रकाशन की वेबसाइट पर मूल समाचार पढ़ें।
अमर उजाला: भागीरथपुरा के दिवंगतों के लिए अंतरराष्ट्रीय सामूहिक तर्पण का समाचार
दैनिक भास्कर: समाचार कवरेज पढ़ें
सर्वपितृ अमावस्या ऑनलाइन तर्पण: वीडियो देखें
दोनों वीडियो नीचे उपलब्ध हैं। इन्हें यहाँ या सीधे YouTube पर देखा जा सकता है।
कार्यक्रम का वीडियो
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आयोजन से संबंधित दूसरा वीडियो
विश्व परिवार का आभार
कृष्णा गुरुजी ने सहयोगी पंडितों, जयलक्ष्मी जी, Divine Astro Healing परिवार और जुड़े सभी सहभागियों का आभार व्यक्त किया।
उनके सहयोग से तीर्थ दर्शन, सामूहिक प्रार्थना और भोजन सेवा का यह आयोजन संभव हुआ।
सत्र का समापन सामूहिक शांति पाठ से हुआ।
पितृ देवेभ्यो नमः।
ॐ शान्तिः शान्तिः
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आध्यात्मिक चिंतक | Spiritual Thinker
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी

