रतलाम जेल में मुक्ति दिवस के आयोजन ने छोटी दिवाली
को आत्मचिंतन और अपनत्व से जोड़ा। 7 नवंबर 2026 को कृष्णा गुरुजी
(कृष्ण कान्त मिश्रा) ने रतलाम जिला जेल में महिला बंदियों के साथ
रूप चौदस मनाई। इस अवसर पर 50 से अधिक महिला बंदियों ने सकारात्मक
बदलाव और नई शुरुआत का संकल्प लिया।
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी की यह पहल लगातार
आठवें वर्ष आयोजित हुई। महिला बंदियों के साथ
>>>>>मिठाई और सौंदर्य प्रसाधन सामग्री साझा की गई। साथ ही, उन्हें
अपने भीतर की अच्छाई पहचानने और जीवन को नई दिशा देने का संदेश दिया गया।
रतलाम जेल में मुक्ति दिवस: भीतर के नरकासुर पर विजय
“काम, क्रोध, लोभ और इच्छा रूपी नरकासुर आज भी जीवित है।”
— कृष्णा गुरुजी
कृष्णा गुरुजी ने नरकासुर को मन के विकारों का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि अनियंत्रित इच्छाएँ, क्रोध और लोभ हमारे निर्णयों
को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इन भावनाओं को पहचानना और संयम
अपनाना आवश्यक है।
उनके अनुसार, रूप चौदस अपने मन को सुंदर बनाने का भी अवसर है।
आत्मचिंतन, करुणा और जिम्मेदार व्यवहार से जीवन में बदलाव आ सकता है।
इसी भावना के साथ इस उत्सव को ‘मुक्ति दिवस’ के रूप में मनाया गया।
महिला बंदियों ने लिया नई शुरुआत का संकल्प
कार्यक्रम में महिला बंदियों ने ऐसा कोई कार्य नहीं करने का संकल्प
लिया, जिसके कारण दोबारा जेल आना पड़े। उन्होंने अपने विचारों और
व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने की भावना व्यक्त की।
कृष्णा गुरुजी ने कामना की कि अगली दीपावली वे अपने घर में
भाई-बहनों और परिजनों के साथ मना सकें। उन्होंने परिवार से दूर
रहने की पीड़ा पर आत्मीय संवाद किया। इस बातचीत का उद्देश्य
बंदियों को अपनत्व देना और भविष्य के प्रति आशा जगाना था।
त्योहार पर अकेलेपन की पीड़ा समझने का प्रयास
कृष्णा गुरुजी ने महिला बंदियों से कहा कि त्योहार पर अपनों की
याद और गहरी हो जाती है। इसी भावना को समझते हुए वे हर वर्ष
बंदियों के बीच उत्सव की खुशियाँ साझा करने आते हैं।
इस पहल के आठवें वर्ष वे रतलाम पहुँचे। उन्होंने महिला बंदियों
को स्वयं से जुड़ने और अपनी सकारात्मक क्षमताओं को पहचानने
के लिए प्रेरित किया। किसी की बात ध्यान से सुनना और उसके
साथ समय बिताना भी सेवा का एक रूप है।
सौंदर्य प्रसाधन के साथ आंतरिक सुंदरता का संदेश
संवाद के बाद महिला बंदियों को मिठाई और सौंदर्य प्रसाधन सामग्री
वितरित की गई। इस अवसर पर कृष्णा गुरुजी ने मन की सुंदरता का
महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि करुणा, सद्भाव और अच्छे विचारों
से व्यक्तित्व निखरता है।
इस प्रकार रतलाम जेल में मुक्ति दिवस का आयोजन
बाहरी सज्जा के साथ आंतरिक परिवर्तन से भी जुड़ा।
रूप चौदस के माध्यम से आत्मसम्मान और सकारात्मक सोच का संदेश
साझा किया गया।
विचाराधीन युवा बंदियों से भी हुआ संवाद
श्री लक्ष्मण सिंह भदोरिया के अनुरोध पर कृष्णा गुरुजी ने
19 से 21 वर्ष आयु के विचाराधीन युवा बंदियों से भी बातचीत की।
उन्होंने संयम, आत्मचिंतन और जिम्मेदार निर्णयों का महत्व बताया।
साथ ही, युवाओं को अपने भविष्य के लिए रचनात्मक दिशा चुनने
के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में श्री लक्ष्मण सिंह भदोरिया, जेलर श्री मकवाना,
श्री पिंकू यादव एवं श्री नितेश पटेल उपस्थित रहे।
उनके सहयोग से बंदियों के साथ त्योहार का अपनापन साझा किया गया।
इंदौर, भोपाल, देवास और उज्जैन के बाद रतलाम
पूर्व वर्षों में इंदौर, भोपाल, देवास और उज्जैन की जेलों में
यह उत्सव आयोजित हो चुका है। लगातार आठवें वर्ष इस पहल के
अंतर्गत रतलाम जिला जेल की महिला बंदियों के साथ छोटी दिवाली मनाई गई।
कृष्णा गुरुजी की वेबसाइट के
सामाजिक सेवा कार्यों के विवरण
में पुराने “Roop Chaturdashi” आयोजन का संदर्भ और बंदियों के
साथ तस्वीर उपलब्ध है। यह पृष्ठ त्योहारों को मानवीय सेवा से
जोड़ने वाली गतिविधियों की झलक देता है।
इसके अतिरिक्त,
भैरवगढ़ जेल में गुरु पूर्णिमा और मार्गदर्शक दिवस का लेख
भी पढ़ें। इसमें बंदीजनों के साथ आत्मचिंतन और सही मार्गदर्शन
पर हुए संवाद का विवरण है।
डिजिटल मीडिया में मुक्ति दिवस की खबर
आयोजन से संबंधित समाचार पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक खोलें।
अमर उजाला की रिपोर्ट में महिला बंदियों के संकल्प, सामग्री
वितरण और आठवें वर्ष की इस पहल का उल्लेख है।
अमर उजाला: रतलाम जिला जेल में महिला बंदियों ने लिया नई शुरुआत का संकल्प
ईखबरटुडे: महिला बंदियों संग छोटी दिवाली और रूप चौदस का आयोजन
कार्यक्रम की YouTube वीडियो रिपोर्ट
वीडियो रिपोर्ट सीधे YouTube पर देखें
मन में आशा का दीप जलाएँ
रतलाम जेल में मुक्ति दिवस का संदेश है कि
आत्मचिंतन और सकारात्मक प्रयास जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
त्योहार पर किसी अकेले व्यक्ति की बात सुनना और उसके साथ
खुशियाँ साझा करना भी सार्थक पहल है।
आइए, इस दीपावली अपने घर के साथ किसी के मन में भी आशा का
दीप जलाएँ। अपनत्व, सेवा और संवेदना से त्योहार का उजाला
अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।
शुभ दीपावली!
कृष्णा गुरुजी (कृष्ण कान्त मिश्रा)
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी

