रक्षाबंधन 2026: कृष्णा गुरुजी ने कुष्ठ सेवा सदन की बहनों के साथ मनाया पर्व

रक्षाबंधन 2026 कृष्णा गुरुजी का कुष्ठ सेवा सदन की उपेक्षित बहनों के साथ रक्षाबंधन मनाने का संदेश
रक्षाबंधन 2026 कृष्णा गुरुजी ने इंदौर के कुष्ठ सेवा सदन में उपेक्षित बहनों के साथ मनाया। बहनों से राखी बंधवाकर साड़ियाँ और मिष्ठान्न वितरित किए गए। यह सेवा-पहल अमर उजाला में भी प्रकाशित हुई।

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रक्षाबंधन 2026: कृष्णा गुरुजी ने कुष्ठ सेवा सदन की बहनों के साथ मनाया पर्व

रक्षाबंधन 2026 पर कृष्णा गुरुजी ने सामाजिक अपनत्व का प्रेरक संदेश दिया।

उन्होंने इंदौर के कुष्ठ सेवा सदन में निवासरत बहनों के साथ रक्षाबंधन मनाया। बहनों ने कृष्णा गुरुजी को राखी बाँधी।

इसके बाद उन्हें साड़ियाँ और मिष्ठान्न वितरित किए गए।

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि त्योहारों की खुशियाँ केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

इसलिए, समाज के उपेक्षित और वंचित वर्गों को भी उत्सव में शामिल करना चाहिए।

“यदि उपेक्षित वर्गों की ओर कोई नहीं है, तो हम सब उनके अपने हैं।”
—Krishna Guruji

परिवार के बाद उपेक्षित समाज के साथ रक्षाबंधन

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का पर्व है। कृष्णा गुरुजी इस भावना को परिवार की सीमाओं से आगे ले जा रहे हैं।

उन्होंने वर्ष 2018 में एक सामाजिक संकल्प लिया था। इसके अनुसार, वे पारिवारिक त्योहार मनाने के बाद उपेक्षित समाज के साथ भी खुशियाँ साझा करेंगे।

इसी संकल्प के क्रम में कृष्णा गुरुजी लगातार सातवें वर्ष कुष्ठ सेवा सदन पहुँचे। उन्होंने वहाँ रहने वाली बहनों से राखी बंधवाई।

साथ ही, उन्हें सामाजिक सम्मान और अपनत्व का विश्वास दिलाया।

इस कार्यक्रम की पूर्व घोषणा आप रक्षाबंधन 2026 पर कृष्णा गुरुजी की प्री-इवेंट जानकारी में पढ़ सकते हैं।

देखिए रक्षाबंधन 2026 का पूरा वीडियो

कुष्ठ सेवा सदन में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम की झलकियाँ इस वीडियो में देखी जा सकती हैं। इसमें बहनों का स्नेह और कार्यक्रम का आत्मीय वातावरण दिखाई देता है।

वीडियो सीधे YouTube पर देखें:
रक्षाबंधन 2026 पर कृष्णा गुरुजी का सेवा संदेश

बहनों को साड़ियाँ और मिष्ठान्न वितरित किए

कार्यक्रम में कुष्ठ सेवा सदन की बहनों ने कृष्णा गुरुजी को राखी बाँधी। इसके बाद सभी बहनों को साड़ियाँ और मिष्ठान्न वितरित किए गए।

इस आयोजन का उद्देश्य केवल उपहार देना नहीं था। इसका मूल उद्देश्य बहनों को सम्मान, अपनत्व और पारिवारिक जुड़ाव का अनुभव कराना था।

कृष्णा गुरुजी ने बहनों से बातचीत की और उनका हाल जाना। उपस्थित सहयोगियों ने भी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

सोच से संकल्प और संकल्प से सेवा

कृष्णा गुरुजी का मानना है कि केवल अच्छा विचार करना पर्याप्त नहीं है। जब सोच संकल्प बनती है, तभी वह समाज में परिवर्तन लाती है।

इसी सोच के साथ उन्होंने त्योहारों को मानव सेवा से जोड़ने का प्रयास शुरू किया। वे त्योहारों की परंपरा को नहीं बदलते।

बल्कि, त्योहार मनाने के उद्देश्य को सामाजिक सेवा से जोड़ते हैं।

“मैं त्योहारों को नहीं बदलता, बल्कि हम त्योहार किस उद्देश्य से मनाते हैं, उस उद्देश्य को बदलता हूँ।”
—Krishna Guruji

उनके अनुसार, त्योहार केवल प्रदर्शन या औपचारिकता नहीं बनने चाहिए। प्रत्येक पर्व प्रेम, समानता और मानवीय संवेदना बढ़ाने का माध्यम बने।

अमर उजाला ने प्रकाशित की रक्षाबंधन सेवा-पहल

कृष्णा गुरुजी की इस रक्षाबंधन सेवा-पहल को प्रमुख समाचार पत्र अमर उजाला ने भी प्रकाशित किया।

इस समाचार में कुष्ठ सेवा सदन की बहनों के साथ मनाए गए रक्षाबंधन का उल्लेख किया गया है।


अमर उजाला में रक्षाबंधन 2026 की पूरी खबर पढ़ें

गंगाराम जी ने कृष्णा गुरुजी का आभार व्यक्त किया

कुष्ठ सेवा सदन की ओर से गंगाराम जी ने कृष्णा गुरुजी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कृष्णा गुरुजी समय-समय पर सेवा सदन आते हैं।

वे यहाँ निवासरत लोगों के साथ त्योहार मनाने में सहयोग देते हैं।

“कृष्णा गुरुजी समय-समय पर हमारे बीच आते हैं। उनके साथ त्योहार मनाने से सभी को परिवार जैसा अपनापन मिलता है।

हम उनके और सभी सहयोगियों के हृदय से आभारी हैं।”
—गंगाराम जी, कुष्ठ सेवा सदन

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से यहाँ रहने वाले लोगों का मनोबल बढ़ता है। साथ ही, उन्हें समाज से जुड़े होने का विश्वास मिलता है।

कार्यक्रम में कौन-कौन उपस्थित रहे?

रक्षाबंधन कार्यक्रम में पिंकू यादव, उमापति पांडे और राजेश पंडित उपस्थित रहे।

अन्य सहयोगियों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सभी ने बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने उनके साथ समय बिताया और त्योहार की खुशियाँ साझा कीं।

कुष्ठ रोग से अधिक पीड़ा सामाजिक उपेक्षा देती है

कुष्ठ रोग को लेकर समाज में आज भी कई भ्रांतियाँ मौजूद हैं। इनके कारण प्रभावित लोगों को भेदभाव और सामाजिक दूरी का सामना करना पड़ता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कुष्ठ रोग का उपचार संभव है। फिर भी इससे प्रभावित लोगों को सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा सहनी पड़ती है।

भारत सरकार का राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम रोकथाम, जाँच, उपचार और पुनर्वास के लिए निःशुल्क सेवाएँ उपलब्ध कराता है।

इसका उद्देश्य सामाजिक कलंक को समाप्त करना भी है।

इसलिए कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के साथ बैठना और संवाद करना आवश्यक है।

इसके अलावा, उन्हें त्योहारों में शामिल करना सामाजिक सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

रक्षाबंधन 2025 की पहल की निरंतरता

कृष्णा गुरुजी ने वर्ष 2025 में भी कुष्ठ आश्रम की बहनों के साथ रक्षाबंधन मनाया था।

उस अवसर पर भी उन्होंने सम्मान, सुरक्षा और अपनत्व का संदेश दिया था।

पिछले वर्ष की सेवा-पहल यहाँ पढ़ें:

रक्षाबंधन 2025 पर कुष्ठ आश्रम में कृष्णा गुरुजी की अनूठी पहल

रक्षाबंधन का व्यापक आध्यात्मिक अर्थ

राखी केवल कलाई पर बाँधा गया धागा नहीं है। यह विश्वास, जिम्मेदारी और पारस्परिक सम्मान का प्रतीक है।

सच्ची रक्षा में किसी व्यक्ति के आत्मसम्मान और अधिकारों की रक्षा भी शामिल है। इसलिए रक्षाबंधन को सामाजिक सुरक्षा के संकल्प से जोड़ना आवश्यक है।

यदि समाज किसी उपेक्षित बहन को अपनत्व देता है, तो पर्व का उद्देश्य अधिक सार्थक बनता है।

यही कृष्णा गुरुजी के रक्षाबंधन संदेश का मूल भाव है।

समाज से कृष्णा गुरुजी की अपील

कृष्णा गुरुजी ने प्रत्येक परिवार से एक सरल अपील की। अपने परिवार के साथ त्योहार अवश्य मनाएँ।

इसके बाद किसी उपेक्षित, असहाय, दिव्यांग, वृद्ध या रोग से प्रभावित व्यक्ति के साथ भी खुशियाँ साझा करें।

  • किसी सेवा सदन या वृद्धाश्रम में समय बिताएँ।
  • उपेक्षित लोगों से सम्मानपूर्वक संवाद करें।
  • त्योहारों पर जरूरतमंद परिवारों को भी शामिल करें।
  • कुष्ठ रोग से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करें।
  • उपहार के साथ अपनत्व और सम्मान भी प्रदान करें।

“यदि एक भी उपेक्षित बहन को यह महसूस हो जाए कि वह अकेली नहीं है, तो यही सच्चे रक्षाबंधन की जीत होगी।”
—Krishna Guruji

यह कार्यक्रम कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसायटी के सौजन्य से आयोजित किया गया।

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रक्षाबंधन का सच्चा संदेश है—परिवार के साथ प्रेम और उपेक्षित समाज के साथ अपनत्व।

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