तब इंदौर से पूजा, प्रार्थना, दुआ और अरदास की एक वैश्विक श्रृंखला आरंभ हुई।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से घरों में रहने, अनुशासन बनाए रखने और कोरोना वॉरियर्स के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया था।
उसी राष्ट्रीय आह्वान से प्रेरित होकर कृष्णा गुरुजी ने 25 मार्च 2020 से प्रतिदिन निशुल्क ऑनलाइन सर्वधर्म प्रार्थना शुरू की।
यह आयोजन किसी एक धर्म, जाति, देश या समुदाय तक सीमित नहीं था।
इसका उद्देश्य कोरोना मरीजों के स्वास्थ्य के लिए सामूहिक मंगलकामना करना था। साथ ही, उनके परिवारों को मानसिक शक्ति देना
और डॉक्टरों, नर्सों, सुरक्षाकर्मियों, सफाईकर्मियों तथा सभी कोरोना वॉरियर्स के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भी इसका प्रमुख भाव था।
“दवा का कार्य डॉक्टर कर रहे थे और दुआ का दायित्व हम सबने मिलकर निभाया।” — कृष्णा गुरुजी
प्रधानमंत्री के आह्वान से मिली सेवा की प्रेरणा
24 मार्च 2020 के राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से घरों में रहने की अपील की थी।
उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों और सार्वजनिक स्थानों को संक्रमणमुक्त करने में जुटे
लोगों के बारे में सोचने तथा उनके लिए प्रार्थना करने का भी आग्रह किया था।
उस समय बाहर निकलना संभव नहीं था। इसलिए तकनीक को मानवता और
आध्यात्मिकता से जोड़कर घर-घर तक सकारात्मक ऊर्जा पहुँचाने का संकल्प लिया गया।
प्रधानमंत्री का 24 मार्च 2020 का आधिकारिक संबोधन यहाँ पढ़ें।
25 मार्च से प्रतिदिन रात 8:30 बजे प्रार्थना
लॉकडाउन के अगले ही दिन, 25 मार्च से यह ऑनलाइन प्रार्थना नियमित रूप से शुरू हुई।
इंटरनेट सुविधा वाला कोई भी व्यक्ति इसमें निशुल्क जुड़ सकता था।
अमेरिका, कनाडा, मलेशिया, सिंगापुर, बेल्जियम, दुबई, हांगकांग और अन्य देशों के साथ भारत के विभिन्न राज्यों से भी लोग शामिल हुए।
बाद में मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि इस पहल से 29 देशों के लोग जुड़ चुके थे।
प्रत्येक सत्र में प्रतिभागी अपने क्षेत्र के अनुभव साझा करते थे। वे कोरोना से बचाव, अनुशासन, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी बात करते थे।
इसके बाद कृष्णा गुरुजी ध्यान और कृतज्ञता की सामूहिक प्रार्थना करवाते थे। इसमें विश्व के सभी देशों, कोरोना मरीजों,
उनके परिवारों और सेवा में लगी चिकित्सा, सुरक्षा तथा सामाजिक वाहिनियों के कल्याण की कामना की जाती थी।
पूजा, प्रार्थना, दुआ और अरदास—मानवता के लिए एक साथ
इस श्रृंखला की सबसे बड़ी विशेषता इसका सर्वधर्म स्वरूप था। अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरु, प्रतिनिधि और साधक एक मंच पर आए।
किसी ने मंत्र पढ़े, किसी ने कुरान का मानवीय संदेश बताया, किसी ने गुरुवाणी और अरदास की, तो किसी ने बाइबल की प्रार्थना के माध्यम से विश्व के लिए मंगलकामना की।
जैन समाज के प्रतिनिधियों ने अहिंसा और त्याग का संदेश रखा।
Webdunia की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई से नौशीन, ईसाई धर्मगुरु बिशप स्वामी चाको, लंदन से डॉ. दिवाकर नकुल, टोरंटो से बलजिंदर सिंह,
जैन समुदाय से प्रदीप कासलीवाल और अन्य प्रतिनिधि भी जुड़े। हरियाणा के पूर्व उद्योग मंत्री श्री विपुल गोयल ने भी इस सामूहिक प्रार्थना की सराहना की।
वहीं, डॉ. आर.के. वाजपेयी ने आयुर्वेद, प्राणायाम और रोग प्रतिरोधक क्षमता के विषय में उपयोगी जानकारी साझा की।
एक विशेष मातृ दिवस सत्र में अनेक प्रतिभागी अपनी माताओं के साथ जुड़े।
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने भी इस वैश्विक प्रार्थना को आशीर्वाद दिया।
इसके अतिरिक्त, श्री कैलाश विजयवर्गीय भी एक विशेष सत्र में उपस्थित रहे।
अलग-अलग शहरों और धर्मस्थलों से जुड़े धर्म प्रमुखों ने मानवता और विश्व कल्याण का साझा संदेश दिया।
घर बैठे हुए मक्का-मदीना से कैलाश मानसरोवर तक दर्शन
लॉकडाउन में लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकते थे। इसलिए इन ऑनलाइन सत्रों में भारत और विश्व के प्रमुख आस्था स्थलों के दर्शन भी करवाए गए।
श्रृंखला के अलग-अलग दिनों में मक्का-मदीना, हेमकुंड साहिब, कैलाश मानसरोवर और अनेक प्रमुख धार्मिक स्थलों की आध्यात्मिक यात्राएँ कराई गईं।
इसके साथ बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की श्रृंखला भी आयोजित हुई। ओंकारेश्वर से पंडित अखिलेश दीक्षित मंत्रों के साथ जुड़े।
उज्जैन के कालभैरव मंदिर से मुख्य पुजारी पंडित राजेश चतुर्वेदी के सहयोग से लाइव रात्रि आरती दिखाई गई।
केदारनाथ सहित अलग-अलग शिवधामों के दर्शन ने घरों में बैठे लोगों को आस्था, आशा और मानसिक संबल दिया।
ये दर्शन केवल धार्मिक यात्रा नहीं थे। प्रत्येक दर्शन को कोरोना मरीजों के स्वास्थ्य,
उनके परिवारों के साहस और विश्व से महामारी समाप्त होने की प्रार्थना से जोड़ा गया।
इस प्रकार तकनीक ने बंद दरवाजों के बीच भी मनुष्य को मनुष्य से और आस्था को मानवता से जोड़े रखा।
करीब 90 दिनों की नियमित प्रार्थना का कैलाश मानसरोवर के साथ समापन
कृष्णा गुरुजी के अनुसार, यह ऑनलाइन सर्वधर्म प्रार्थना श्रृंखला करीब 90 दिनों तक नियमित चली।
अंतिम विशेष सत्र में कैलाश मानसरोवर की आध्यात्मिक यात्रा
और दर्शन के साथ इसका भावपूर्ण समापन हुआ। इस पूरी अवधि में मूल संदेश एक ही रहा—घर में रहें, सुरक्षित रहें,
डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और मानवता के लिए मिलकर प्रार्थना करें।
यह पहल चिकित्सा का विकल्प नहीं थी। इसके विपरीत, इसमें बार-बार स्पष्ट किया गया कि इलाज का कार्य डॉक्टर और चिकित्सा विज्ञान कर रहे हैं।
सामूहिक प्रार्थना का उद्देश्य मरीजों और परिवारों को भावनात्मक शक्ति देना तथा सेवाकर्मियों के प्रति कृतज्ञता जगाना था।
MP Tak, Webdunia और MP News में मिली पहचान
इंदौर से संचालित इस वैश्विक प्रयास को प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भी स्थान दिया। Webdunia ने 29 अप्रैल 2020 की अपनी विस्तृत रिपोर्ट में
इसे कोरोना पीड़ितों के लिए इंदौर से हो रही ऑनलाइन वैश्विक सर्वधर्म प्रार्थना बताया।
रिपोर्ट में 25 मार्च से प्रतिदिन रात 8:30 बजे चल रहे निशुल्क सत्र, 29 देशों की सहभागिता और विभिन्न धर्म प्रतिनिधियों के विचारों का उल्लेख किया गया।
- Webdunia: कोरोना पीड़ितों के लिए इंदौर में ग्लोबल प्रार्थना, जुड़े 29 देशों के लोग
- MP Tak: कोरोना से लड़ने के लिए ऑनलाइन प्रार्थना
- MP News: लॉकडाउन में इंदौर से विश्वव्यापी प्रार्थना की विशेष रिपोर्ट
MP Tak की वीडियो रिपोर्ट
MP News की वीडियो रिपोर्ट
उस दौर से आज तक—एक मानवता, एक प्रार्थना
कोरोना काल की यह पहल इस विश्वास का जीवंत उदाहरण बनी कि दूरी के समय भी दिलों को जोड़ा जा सकता है।
जब धर्मों की प्रार्थनाएँ एक साथ मानवता के लिए उठती हैं,
तब पूजा, दुआ, अरदास और प्रार्थना के शब्द अलग हो सकते हैं, लेकिन उनका भाव एक ही रहता है।
इसी सर्वधर्म और विश्व-परिवार की भावना को कृष्णा गुरुजी आज भी Global Healing Day
तथा नियमित आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।
निःशुल्क हीलिंग सेवाओं की जानकारी के लिए Free Spiritual Healing with Krishna Guruji पेज भी देखा जा सकता है।
मानवता सबसे बड़ा धर्म है। संकट के समय अनुशासन, चिकित्सा, सेवा, कृतज्ञता और प्रार्थना—ये सभी मिलकर आशा का प्रकाश बनते हैं।
— कृष्णा गुरुजी (कृष्णा कांत मिश्रा)
संस्थापक, कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी

