जिन अज्ञात मृत लोगों की अस्थियाँ लेने कोई अपना नहीं आया, उनके लिए कृष्णा गुरुजी और उनकी संस्था परिवार बनकर सामने आई।
इंदौर के विभिन्न मुक्तिधामों में रखी 152 लावारिस अस्थियों को एकत्र किया गया। इसके बाद उन्हें उज्जैन के सिद्धवट घाट ले जाया गया।
वहाँ विधि-विधान के साथ अस्थि विसर्जन, पिंडदान और तर्पण किए गए।
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी की इस मानवीय पहल को MP Tak और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों ने प्रमुखता से दिखाया।
इसके अलावा, World Book of Records, London ने कृष्ण कांत मिश्रा और Krishna Guruji Social Welfare Society को इस मानवीय सेवा के लिए सम्मानित किया।
“जिनका इस संसार में कोई नहीं रहा, उनके अंतिम संस्कार का दायित्व भी समाज को अपने परिवार की तरह निभाना चाहिए।” — कृष्णा गुरुजी
इंदौर के मुक्तिधामों में रखी थीं 152 लावारिस अस्थियाँ
इंदौर शहर के अलग-अलग मुक्तिधामों में कई अज्ञात लोगों की अस्थियाँ रखी हुई थीं। लंबे समय तक कोई परिजन उन्हें लेने नहीं आया था।
इनमें रामबाग मुक्तिधाम और जूनी इंदौर मुक्तिधाम सहित अन्य स्थानों की अस्थियाँ शामिल थीं। इंदौर नगर निगम के सहयोग से इन सभी अस्थियों को सम्मानपूर्वक एकत्र किया गया।
इस कार्य में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नटवर सारडा का सहयोग भी प्राप्त हुआ।
उनकी उपस्थिति और प्रशासनिक सहयोग से अस्थियों को विधिवत रूप से उज्जैन रवाना किया गया।
इसके बाद कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य वाहन से अस्थियों को लेकर उज्जैन पहुँचे।
जिस प्रकार संतान अपने माता-पिता का कर्तव्य निभाती है
कृष्णा गुरुजी का मानना है कि किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार का सम्मान उसके परिवार तक सीमित नहीं होना चाहिए।
यदि किसी मृत व्यक्ति का कोई परिजन उपलब्ध न हो, तो समाज को उसका परिवार बनना चाहिए।
इसी भावना के साथ 152 अज्ञात मृत लोगों की अस्थियों का विसर्जन किया गया। पूरी प्रक्रिया उसी श्रद्धा और सम्मान से संपन्न हुई
, जिस प्रकार कोई संतान अपने माता-पिता के लिए अंतिम धार्मिक कर्तव्य निभाती है।
यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था। बल्कि यह उन अज्ञात लोगों के प्रति मानवीय सम्मान व्यक्त करने का प्रयास था,
जिनकी मृत्यु के बाद कोई अपना उनके अंतिम संस्कार के लिए सामने नहीं आया।
उज्जैन के सिद्धवट पर विधिवत तर्पण
अस्थियों को उज्जैन स्थित सिद्धवट घाट पर ले जाया गया।
धार्मिक परंपरा में सिद्धवट को श्राद्ध, तर्पण और पितृ कर्म के लिए विशेष स्थान माना जाता है।
मोक्षदायिनी क्षिप्रा के तट पर विधिवत पूजा की गई। इसके बाद अस्थि विसर्जन, पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई।
पंडित लालू गुरु ने धार्मिक विधि संपन्न कराई। पूजा में मंत्रोच्चार, जल अर्पण, पुष्प, अक्षत और पिंडदान जैसे पारंपरिक कर्म किए गए।
इसके बाद ब्रह्मभोज आयोजित किया गया। साथ ही खीर और भोजन का वितरण भी किया गया।
MP Tak ने दिखाई कृष्णा गुरुजी की अनूठी पहल
MP Tak ने इस सेवा को “श्रीकृष्णा गुरुजी की अनोखी पहल” शीर्षक से प्रसारित किया। पत्रकार संदीप कुलश्रेष्ठ की report में पूरे आयोजन की वास्तविक तस्वीरें दिखाई गईं।
Report में अस्थियों को एकत्र करने से लेकर सिद्धवट पर पूजा, पिंडदान, तर्पण और भोजन वितरण तक की झलक शामिल है।
वीडियो में कृष्णा गुरुजी ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से अज्ञात लोगों के लिए इस प्रकार का तर्पण करते आ रहे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को अपने शहर में रहने वाले असहाय और लावारिस लोगों के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
MP Tak पर कृष्णा गुरुजी की अनूठी पहल देखें
ETV Bharat ने भी किया मानवीय सेवा का दस्तावेजीकरण
ETV Bharat ने इस पहल को “उज्जैन में कृष्ण गुरुजी की अनूठी पहल, इंदौर की 152 लावारिस अस्थियों का विधिवत विसर्जन” शीर्षक से प्रकाशित किया।
Report में बताया गया कि कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी ने अज्ञात लोगों की अस्थियों का सिद्धवट घाट पर विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण किया। इसके बाद ब्रह्मभोज और खीर वितरण भी हुआ।
ETV Bharat पर 152 लावारिस अस्थियों के विसर्जन की पूरी report देखें
World Book of Records, London ने किया सम्मानित
अज्ञात और लावारिस मृत लोगों के अंतिम संस्कार तथा सिद्धवट, उज्जैन में उनके लिए विधिवत धार्मिक कर्म करने की इस मानवीय सेवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला।
World Book of Records, London ने कृष्ण कांत मिश्रा यानी कृष्णा गुरुजी को इस सेवा के लिए सम्मानित किया। Official report में उनके नाम के साथ Krishna Guruji Social Welfare Society का भी उल्लेख किया गया है।
World Book of Records की report के अनुसार, कृष्ण कांत मिश्रा को उज्जैन के siddhavat पर अज्ञात और लावारिस मृत लोगों के अंतिम संस्कार संबंधी कर्म करके मानवता की सेवा में योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया।
यह सम्मान महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित “वर्तमान में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता” विषयक कार्यक्रम में प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता तत्कालीन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने की। कार्यक्रम का संचालन World Book of Records, London के President एडवोकेट संतोष शुक्ला ने किया।
यह सम्मान किसी एक धार्मिक अनुष्ठान का नहीं, बल्कि उन अज्ञात लोगों के प्रति निभाए गए मानवीय दायित्व का सम्मान था, जिनका अंतिम कर्तव्य निभाने वाला कोई अपना मौजूद नहीं था।
World Book of Records की official report पढ़ें
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी का सहयोग
यह सेवा कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से पूरी हुई।
संस्था के सदस्यों ने अस्थियों को एकत्र करने, उज्जैन ले जाने और धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराने में भाग लिया।
इस पहल में तनुजा कुलकर्णी, मनीष सोलंकी, अजय वर्गीय, मनीष बजाज, विशाल वर्मा
और अतुल सहित संस्था के सहयोगी उपस्थित रहे।
MP Tak की report में कृष्णा गुरुजी ने विशेष रूप से तनुजा और मनीष सोलंकी के सहयोग का उल्लेख किया।
हर वर्ष सर्वपितृ अमावस्या पर निभाया जाता है दायित्व
कृष्णा गुरुजी द्वारा अज्ञात मृत लोगों के लिए तर्पण और प्रार्थना का कार्य केवल एक बार नहीं किया गया।
वे प्रतिवर्ष सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर उज्जैन जाकर ऐसे लोगों के लिए तर्पण करते रहे हैं।
हालाँकि, 152 लावारिस अस्थियों का सामूहिक और विधिवत विसर्जन अपने स्तर और सामाजिक संदेश के कारण विशेष बन गया।
कोविड काल में परिस्थितियाँ अलग थीं। इसलिए उस समय अज्ञात मृत लोगों और
दिवंगत आत्माओं के लिए ऑनलाइन प्रार्थना और तर्पण का आयोजन किया गया। इससे सेवा की निरंतरता बनी रही।
यह पहल कृष्णा गुरुजी की सामाजिक पहचान को कैसे दर्शाती है?
कृष्णा गुरुजी की पहचान केवल spiritual healing तक सीमित नहीं है।
उनकी सेवा का एक महत्वपूर्ण पक्ष उन लोगों तक पहुँचना है, जो समाज की मुख्यधारा से छूट जाते हैं।
जेलों में योग, दिव्यांगों के साथ कार्यक्रम, कुष्ठ आश्रम में सेवा, भिक्षुकों और किन्नर समुदाय के लिए कार्यक्रम,
कुलियों के साथ योग और अज्ञात लोगों के अंतिम संस्कार जैसे कार्य इसी विचार से जुड़े हैं।
इस पहल में प्रचार से अधिक कर्तव्य की भावना दिखाई देती है।
इसके अलावा, MP Tak और ETV Bharat की स्वतंत्र media reports
इस सेवा का सार्वजनिक और ऐतिहासिक प्रमाण प्रस्तुत करती हैं।
World Book of Records, London का सम्मान इस सेवा को प्राप्त अंतरराष्ट्रीय मान्यता का आधिकारिक प्रमाण है।
कृष्णा गुरुजी की Free Spiritual Healing और Self-Power Mission के बारे में भी पढ़ें।
उनकी विश्व शांति और मानव एकता की वार्षिक पहल के बारे में
जानने के लिए Global Healing Day का आधिकारिक page देखें।
समाज के लिए कृष्णा गुरुजी का संदेश
MP Tak से बातचीत में कृष्णा गुरुजी ने नागरिकों से अपील की कि
वे अपने-अपने शहरों में लावारिस और असहाय लोगों के प्रति जिम्मेदारी निभाएँ।
किसी अज्ञात व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे सम्मानजनक अंतिम विदाई देना केवल प्रशासन का दायित्व नहीं है।
यह समाज की सामूहिक मानवीय जिम्मेदारी भी है।
“अपने माता-पिता के लिए तो सभी श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
लेकिन जिनका कोई नहीं है, उनके लिए समाज को आगे आना चाहिए।” — कृष्णा गुरुजी
मानवता मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती
152 अज्ञात लोगों की अस्थियों का विधिवत विसर्जन हमें एक गहरा संदेश देता है।
व्यक्ति का नाम भले ज्ञात न हो, लेकिन उसका मानवीय सम्मान समाप्त नहीं होता।
अंतिम विदाई हर मनुष्य का अधिकार है। कृष्णा गुरुजी और उनकी संस्था ने इस अधिकार को धार्मिक श्रद्धा
, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय करुणा के साथ पूरा करने का प्रयास किया।
जब किसी अज्ञात मृत व्यक्ति के लिए समाज परिवार बनकर खड़ा होता है,
तभी मानवता अपने वास्तविक अर्थ में जीवित दिखाई देती है।

