अथर्ववेद के उपनिषद: मुण्डक से ब्रह्मज्ञान और माण्डूक्य से जानें ॐ व चेतना की चार अवस्थाएँ

Krishna Guruji explaining Atharvaveda Upanishads, Mundaka Upanishad, Om Meditation, Om Chanting and the four states of consciousness

कृष्णा गुरुजी से जानें अथर्ववेद के उपनिषद, ॐ का रहस्य, मन की चार अवस्थाएँ, जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय तथा सरल ॐ ध्यान और चैंटिंग का महत्व।

सोनम वांगचुक के मुद्दे पर सरकार संवाद करे: कृष्णा गुरुजी की अपील अमर उजाला में प्रकाशित

सोनम वांगचुक से संवाद करे सरकार – कृष्णा गुरुजी की अपील

कृष्णा गुरुजी ने सरकार से सोनम वांगचुक के मुद्दे पर शांतिपूर्ण संवाद शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और मानवता के हित में उनकी बात अवश्य सुनी जानी चाहिए।

सामवेद के उपनिषद: मन को शक्ति कौन देता है? ‘तत्त्वमसि’ का वास्तविक अर्थ

सामवेद के उपनिषद – मन को शक्ति कौन देता है और ‘तत्त्वमसि’ का वास्तविक अर्थ समझाते कृष्णा गुरुजी

सामवेद के उपनिषद के माध्यम से जानिए मन, चेतना, ब्रह्म और “तत्त्वमसि” का सरल रहस्य। केन उपनिषद और छांदोग्य उपनिषद की शिक्षाओं को आसान भाषा में समझें।

**क्या मृत्यु अंत है या एक नई शुरुआत? यजुर्वेद के उपनिषद और आधुनिक विज्ञान का चिंतन**

कृष्णा गुरुजी के साथ यजुर्वेद के उपनिषद पर प्रवचन – क्या मृत्यु अंत है या एक नई शुरुआत? कठोपनिषद में नचिकेता के प्रश्न का आधुनिक दृष्टिकोण से विश्लेषण।

यजुर्वेद के उपनिषदों पर आधारित यह लेख मृत्यु, आत्मा, चेतना और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद स्थापित करते हुए जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का संदेश देता है।

ऋग्वेद के उपनिषद: ऐतरेय और कौषीतकि उपनिषद का सरल परिचय

ऋग्वेद के उपनिषद ऐतरेय और कौषीतकि उपनिषद कृष्णा गुरुजी

ऋग्वेद के उपनिषद मनुष्य को अपने भीतर झाँकने की प्रेरणा देते हैं। वेदों में मंत्र, प्रार्थना और जीवन का मार्ग मिलता है। वहीं, उपनिषद जीवन से जुड़े गहरे प्रश्नों पर चिंतन कराते हैं। आज हम ऋग्वेद से जुड़े दो प्रमुख उपनिषदों को समझेंगे। ऐतरेय उपनिषद कौषीतकि या शांखायन उपनिषद उपनिषद क्या हैं? उपनिषद भारतीय आध्यात्मिक […]

अथर्ववेद का सार: निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि और प्रकृति से जुड़ने का वैदिक संदेश

अथर्ववेद का सार – निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि, योग और प्रकृति का वैदिक संदेश | कृष्णा गुरुजी

अथर्ववेद का सार जानें। निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि, योग, प्राणायाम, ध्यान, प्रकृति संरक्षण और संतुलित जीवन का वैदिक संदेश कृष्णा गुरुजी की सरल एवं तर्कपूर्ण व्याख्या के साथ।

सामवेद का सार: ऋग्वेद के मंत्रों को सुर, लय और सामगान देने वाला वेद | कृष्णा गुरुजी

सामवेद का सार – ऋग्वेद के मंत्रों को सुर, लय और सामगान देने वाला वेद | कृष्णा गुरुजी

सामवेद का सार: ऋग्वेद के मंत्रों को सुर, लय और सामगान देने वाला वेद सामवेद का सार समझने के लिए पहले ऋग्वेद और यजुर्वेद के संबंध को जानना आवश्यक है। चारों वेद भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण आधार हैं। हालांकि, प्रत्येक वेद की अपनी अलग भूमिका है। सबसे पहले हमने ऋग्वेद का सार जाना। ऋग्वेद […]

**यजुर्वेद का सार: यज्ञ, हवन, समर्पण और पर्यावरण संरक्षण का वैदिक संदेश**

यजुर्वेद हमें सिखाता है कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और मानवता के प्रति समर्पण का दिव्य मार्ग है। – कृष्णा गुरुजी

ऋग्वेद हमें प्रकृति और पंचमहाभूतों के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। वहीं, यजुर्वेद का सार हमें समझाता है कि उस कृतज्ञता को कर्म, यज्ञ, आहुति और समर्पण में कैसे बदला जाए।यजुर्वेद केवल हवन की विधियों का ग्रंथ नहीं है। यह श्रेष्ठ कर्म, सामाजिक सहभागिता, त्याग, अनुशासन और लोककल्याण का ज्ञान भी देता है। आज […]

बाबा अमरनाथ का समय से पहले पिघलना: प्रकृति की गंभीर चेतावनी, अब हमें संभलना होगा

बाबा अमरनाथ का समय से पहले पिघलना: प्रकृति की गंभीर चेतावनी | कृष्णा गुरुजी

बाबा अमरनाथ का समय से पहले पिघलना: प्रकृति की गंभीर चेतावनी, अब हमें संभलना होगा बाबा अमरनाथ के प्राकृतिक हिमलिंग का समय से पहले पिघलना केवल एक धार्मिक विषय नहीं है। यह संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रकृति की ओर से एक गंभीर चेतावनी और आत्ममंथन का अवसर है। अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक, कलियुग पुराण के […]

नई शुरुआत दीप जलाकर करें, फीता काटकर नहीं : कृष्णा गुरुजी

कृष्णा गुरुजी उद्घाटन में फीता काटने की परंपरा के स्थान पर दीप प्रज्ज्वलन और फीते को सम्मानपूर्वक हटाकर नई शुरुआत करने का संदेश देते हुए।

उद्घाटन में फीता काटने की परंपरा भारत सहित कई देशों में निभाई जाती है। नई शुरुआत दीप जलाकर करें, फीता काटकर नहीं : कृष्णा गुरुजी उद्घाटन केवल किसी भवन का द्वार खोलने की औपचारिकता नहीं है। वास्तव में, उद्घाटन में फीता काटने की परंपरा का विचार वर्षों से समाज में प्रचलित है। यह नई आशा, […]

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