गुरु कौन है?— एक प्रश्न ने बदल दी सोच | भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में गुरु पूर्णिमा 2026 | Krishna Guruji

गुरु कौन है? गुरु पूर्णिमा 2026 पर भैरवगढ़ केंद्रीय जेल, उज्जैन में कृष्णा गुरुजी द्वारा आयोजित मार्गदर्शक दिवस कार्यक्रम में बंदी भाइयों के साथ आत्मचिंतन और नए जीवन का संकल्प।
गुरु कौन है? गुरु पूर्णिमा 2026 पर भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में कृष्णा गुरुजी ने बंदी भाइयों को आत्मचिंतन, अनुशासन और नए जीवन का प्रेरक संदेश दिया।

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‘गुरु कौन है?’— एक प्रश्न ने बदल दी सोच, भैरवगढ़ जेल में बंदी भाइयों ने लिया नए जीवन का संकल्प

उज्जैन। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भैरवगढ़ केंद्रीय जेल, उज्जैन में लगातार पाँचवें वर्ष गुरु पूर्णिमा (मार्गदर्शक दिवस) का प्रेरक आयोजन किया गया।

इसके अतिरिक्त, आध्यात्मिक चिंतक एवं मानवसेवी कृष्णा गुरुजी ने बंदी भाइयों को आत्मचिंतन, अनुशासन

, सकारात्मक जीवन और समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनः शामिल होने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह था, जब कृष्णा गुरुजी ने बंदी भाइयों से पूछा—

“आपका गुरु कौन है, जिसके कारण आज आप यहाँ हैं?”

इस एक प्रश्न ने कार्यक्रम में उपस्थित बंदी भाइयों को अपने जीवन, निर्णयों, संगति और कर्मों पर गंभीर आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित किया।


मीडिया में कार्यक्रम की विशेष कवरेज

भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में आयोजित इस आध्यात्मिक एवं मानवीय कार्यक्रम को ऑनलाइन, वीडियो और प्रिंट मीडिया में प्रमुखता से स्थान मिला।

वार्ता न्यूज़ उज्जैन की वीडियो रिपोर्ट

वार्ता न्यूज़ उज्जैन द्वारा कार्यक्रम की वीडियो रिपोर्ट प्रसारित की गई। साथ ही,

वीडियो में गुरु पूर्णिमा आयोजन, बंदी भाइयों के साथ संवाद, गुरु पूजन और जीवन परिवर्तन का संदेश देखा जा सकता है।

अमर उजाला में प्रकाशित समाचार: गुरु पूर्णिमा 2026 पर भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में मार्गदर्शक दिवस कार्यक्रम।
अमर उजाला में प्रकाशित गुरु पूर्णिमा 2026 की समाचार कवरेज।
चर्चित राजनीति, लखनऊ में प्रकाशित समाचार: गुरु कौन है? एक प्रश्न ने बदल दी सोच। भैरवगढ़ केंद्रीय जेल, उज्जैन में गुरु पूर्णिमा 2026 पर कृष्णा गुरुजी द्वारा आयोजित मार्गदर्शक दिवस कार्यक्रम की कवरेज।
चर्चित राजनीति, लखनऊ में प्रकाशित समाचार— गुरु पूर्णिमा 2026 पर भैरवगढ़ केंद्रीय जेल, उज्जैन में कृष्णा गुरुजी के मार्गदर्शक दिवस कार्यक्रम और बंदी भाइयों के नए जीवन संकल्प की विशेष कवरेज।

">>>><strongअमर उजाला में प्रकाशित पूरा समाचार पढ़ें<br />


प्रिंट मीडिया कवरेज

अमर उजाला

अमर उजाला में प्रकाशित भैरवगढ़ केंद्रीय जेल के गुरु पूर्णिमा और मार्गदर्शक दिवस कार्यक्रम का समाचार
अमर उजाला में प्रकाशित समाचार— भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में गुरु पूर्णिमा पर बंदियों को आत्मसुधार और सकारात्मक जीवन का संदेश।

नईदुनिया

नईदुनिया में प्रकाशित समाचार— “गुरु कौन है?” कृष्णा गुरुजी के इस प्रश्न ने
बंदी भाइयों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।

चर्चित राजनीति, लखनऊ

चर्चित राजनीति लखनऊ में प्रकाशित भैरवगढ़ जेल गुरु पूर्णिमा और नए जीवन संकल्प का समाचार
चर्चित राजनीति, लखनऊ में प्रकाशित समाचार— बंदी भाइयों ने लिया सकारात्मक और अपराधमुक्त नए जीवन का संकल्प।

महाकाल को गुरु मानकर हुआ सामूहिक गुरु पूजन

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महाकाल को परम गुरु मानते हुए सामूहिक गुरु पूजन से हुई।

बंदी भाइयों ने श्रद्धा और अनुशासन के साथ पूजा में भाग लिया। इसके बाद प्रसाद के रूप में पेड़ा वितरित किया गया।

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि गुरु केवल किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है।

गुरु ज्ञान, विवेक, अनुशासन और सही दिशा का प्रतीक है।

जीवन में जो व्यक्ति हमें गलत मार्ग से हटाकर उचित दिशा दिखाए, वह हमारे लिए गुरु और मार्गदर्शक हो सकता है।

क्रोध, लोभ और गलत संगति से भटकता है जीवन

अपने संबोधन में कृष्णा गुरुजी ने कहा कि कई बार क्षणिक क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, अहंकार, बदले की भावना और गलत संगति

व्यक्ति को अपराध के मार्ग पर ले जाती है। एक गलत निर्णय व्यक्ति को परिवार और समाज से दूर कर सकता है।

इसके बाद. कि कलियुग कर्मप्रधान युग है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

केवल अतीत पर पछताने के बजाय वर्तमान को सुधारना और भविष्य के लिए सही संकल्प लेना आवश्यक है।

“गलती जीवन का अंत नहीं है। गलती को स्वीकार कर स्वयं को सुधारना ही नए जीवन की शुरुआत है।”

कारावास में जेल अधिकारी ही मार्गदर्शक

कृष्णा गुरुजी ने बंदी भाइयों से कहा कि जब तक वे कारावास में हैं, तब तक जेल प्रशासन और

अधिकारी उनके अनुशासन, सुरक्षा और सुधार के मार्गदर्शक हैं।

। साथ ही, उनके निर्देशों का पालन करना तथा जेल के नियमों में रहकर

स्वयं को बेहतर बनाना ही वास्तविक गुरु सम्मान है।

इस अवसर पर जेलर डाबर जी, अमित मालवीय जी, बिरला जी और

 

अंतिम जी का बंदी भाइयों द्वारा सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया

। कृष्णा गुरुजी ने अधिकारियों का परिचय बंदी भाइयों के वर्तमान मार्गदर्शकों के रूप में कराया।

भजनों से भावुक हुआ वातावरण

कार्यक्रम में प्रेरक भजनों की प्रस्तुति भी हुई। “तेरी कर्म कहानी तेरी आत्मा ही जाने, परमात्मा ही जाने”

जैसे भजनों ने कार्यक्रम को भावपूर्ण बना दिया। अनेक बंदी भाई अपने जीवन और कर्मों का आत्मचिंतन करते हुए भावुक दिखाई दिए।

जेल से बाहर निकलने के बाद सही मार्गदर्शक  चुने

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि कारावास से बाहर निकलने के बाद उचित मार्गदर्शक चुनें।
परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्व निभाएँ।
ऐसा कोई कार्य दोबारा न करें, जिसके कारण फिर जेल आना पड़े।

साथ ही. कहा कि व्यक्ति का सच्चा परिवर्तन उसके विचार, व्यवहार और कर्म से दिखाई देता है।

जेल से बाहर निकलने के बाद ईमानदारी, परिश्रम, संयम और

सेवा के मार्ग को अपनाना ही गुरु पूर्णिमा तथा मार्गदर्शक दिवस का वास्तविक संदेश है।

बंदी भाइयों ने लिया सकारात्मक जीवन का संकल्प में बंदी भाइयों ने बुराइयों और गलत आदतों को छोड़कर

अनुशासित, सकारात्मक और समाजोपयोगी जीवन जीने का संकल्प लिया।

अंत में. परिवार का सम्मान करने, गलत संगति से दूर रहने और अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदार बनने की भावना व्यक्त की।

कार्यक्रम में जेल प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसायटी की ओर से

राकेश बजाज, भारती मंडलोई, पिंकू यादव और नितेश पटेल ने  सहयोग प्रदान किया।

यह कार्यक्रम कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसायटी के सौजन्य से आयोजित किया गया।


कृष्णा गुरुजी का संदेश

“सही गुरु वह है, जो हमें अपने भीतर झाँकना सिखाए, गलत कर्म से रोके और जीवन को मानवता,

अनुशासन तथा सेवा की दिशा में आगे बढ़ाए।”

कृष्णा गुरुजी के आध्यात्मिक, सामाजिक और मानवीय कार्यों की अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें:


KrishnaGuruji.com

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