राहुल गांधी का मनुस्मृति पर बयान: प्राचीन ग्रंथ ज्ञान का विषय हैं, न कि राजनीति का हथियार

राहुल गांधी का मनुस्मृति पर बयान—प्राचीन ग्रंथ ज्ञान का विषय हैं, राजनीति का हथियार नहीं

राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर कृष्णा गुरुजी की संतुलित दृष्टि: प्राचीन ग्रंथ, महिला सम्मान, इतिहास और राजनीतिक विमर्श।

भगवान विष्णु जल में क्यों रहते हैं? पद्म पुराण का रहस्य और Kaliyug Puran दृष्टि

भगवान विष्णु जल में क्यों रहते हैं—पद्म पुराण और Kaliyug Puran दृष्टि समझाते कृष्णा गुरुजी

भगवान विष्णु जल में क्यों रहते हैं? पद्मनाभ, कमल पर ब्रह्माजी और शेषनाग के रहस्य को पद्म पुराण तथा कृष्णा गुरुजी की Kaliyug Puran दृष्टि से समझिए।

सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई? भविष्य पुराण का रहस्य और Krishna Guruji की Kaliyug Puran दृष्टि

भविष्य पुराण में सृष्टि की उत्पत्ति और हिरण्यगर्भ का रहस्य समझाते Krishna Guruji

सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई? भविष्य पुराण में वर्णित हिरण्यगर्भ, पंचतत्त्व और Cosmic Creation के रहस्य को Krishna Guruji की Kaliyug Puran दृष्टि से समझिए।

नाग पंचमी 2026: जिस नाग से हम डरते हैं, उसी की पूजा क्यों करते हैं? — कृष्णा गुरुजी की कलियुग पुराण दृष्टि

नाग पंचमी 2026 कलियुग पुराण कृष्णा गुरुजी भगवान शिव और नाग देवता

जिस नाग की हम नाग पंचमी पर पूजा करते हैं, उसी से सामान्य दिनों में डरते क्यों हैं? नाग पंचमी 2026 पर कृष्णा गुरुजी की कलियुग पुराण दृष्टि से जानिए नाग पूजा, सजगता, शिव तत्व और प्रकृति संरक्षण का संदेश।

कलियुग में चातुर्मास कितना प्रासंगिक? परंपरा नहीं, जिम्मेदारी का महापर्व | कृष्णा गुरुजी

भगवान विष्णु की योगनिद्रा के माध्यम से कलियुग में चातुर्मास का संदेश देते हुए कृष्णा गुरुजी – प्रकृति संरक्षण, मानव सेवा और जिम्मेदारी

  कलियुग में चातुर्मास कितना प्रासंगिक? जिम्मेदारी और सेवा का संदेश कलियुग में चातुर्मास का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह केवल व्रत और उपवास का समय है? या यह जिम्मेदारी, सेवा और आत्मचिंतन का पर्व भी है? सनातन परंपरा में चातुर्मास का विशेष महत्व है। However, समय के साथ जीवन की परिस्थितियां बदल गई […]

सामवेद के उपनिषद: मन को शक्ति कौन देता है? ‘तत्त्वमसि’ का वास्तविक अर्थ

सामवेद के उपनिषद – मन को शक्ति कौन देता है और ‘तत्त्वमसि’ का वास्तविक अर्थ समझाते कृष्णा गुरुजी

सामवेद के उपनिषद के माध्यम से जानिए मन, चेतना, ब्रह्म और “तत्त्वमसि” का सरल रहस्य। केन उपनिषद और छांदोग्य उपनिषद की शिक्षाओं को आसान भाषा में समझें।

**यजुर्वेद का सार: यज्ञ, हवन, समर्पण और पर्यावरण संरक्षण का वैदिक संदेश**

यजुर्वेद हमें सिखाता है कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और मानवता के प्रति समर्पण का दिव्य मार्ग है। – कृष्णा गुरुजी

ऋग्वेद हमें प्रकृति और पंचमहाभूतों के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। वहीं, यजुर्वेद का सार हमें समझाता है कि उस कृतज्ञता को कर्म, यज्ञ, आहुति और समर्पण में कैसे बदला जाए।यजुर्वेद केवल हवन की विधियों का ग्रंथ नहीं है। यह श्रेष्ठ कर्म, सामाजिक सहभागिता, त्याग, अनुशासन और लोककल्याण का ज्ञान भी देता है। आज […]

राम मंदिर दान चोरी को राजनीतिक हथियार न बनाएं : कृष्णा गुरुजी का संदेश

राम मंदिर दान चोरी को राजनीतिक हथियार न बनाने का संदेश देते हुए कृष्णा गुरुजी का फीचर इमेज, पृष्ठभूमि में अयोध्या राम मंदिर और दानपात्र का चित्र।

राम मंदिर दान चोरी को राजनीतिक हथियार न बनाएं : कृष्णा गुरुजी लेखक: कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’ अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक एवं मार्गदर्शक राम मंदिर दान चोरी की घटना से हर राम भक्त आहत है। यह केवल धन की चोरी नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। प्रभु श्रीराम के चरणों में […]

ऋग्वेद का सार: मानव सभ्यता का प्राचीनतम ज्ञान और आधुनिक संदेश

ऋग्वेद का सार: मानव सभ्यता का प्राचीनतम ज्ञान और आधुनिक संदेश - कृष्णा गुरुजी

ऋग्वेद: मानव सभ्यता की प्राचीनतम ज्ञानधारा और उसका आधुनिक संदेश लेखक: कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’ ऋग्वेद केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है। वास्तव में, यह मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन ज्ञान, चिंतन और आध्यात्मिक दर्शन का अमूल्य खजाना है। आज भी इसके मंत्र हमें प्रकृति, समाज और मानवता के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा […]

मंदिरों में दान या आस्था का व्यापार? श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन से मेरी विनम्र अपील

मंदिरों में दान, आस्था, पारदर्शिता और धार्मिक व्यवस्था पर कृष्णा गुरुजी का चिंतन

  मंदिरों में दान या आस्था का व्यापार? श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन से मेरी विनम्र अपील कृष्णा गुरुजी का आध्यात्मिक चिंतन आज बड़े दुखी मन से कहना पड़ रहा है कि जिस आस्था और भावनाओं के साथ श्रद्धालु मंदिरों में दान करते हैं, कहीं न कहीं उन्हीं भावनाओं और आस्था का व्यापार भी होने लगा […]

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