शिव के त्रिशूल का कलियुग पुराण संदेश | रुद्र ज्ञान | Krishna Guruji

भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल क्यों है? कृष्णा गुरुजी कलियुग पुराण की दृष्टि से त्रिशूल, वात-पित्त-कफ, मानसिक संतुलन और आंतरिक शिवतत्त्व का संदेश समझा रहे हैं।
शिवजी के सिर पर चंद्रमा और हाथ में डमरू क्यों है? तीन फैक्ट्रियों का रहस्य

शिवजी के मस्तक पर चंद्रमा और हाथ में डमरू क्यों है? कृष्णा गुरुजी से जानिए इनके आध्यात्मिक अर्थ तथा हृदय में Fire, वाणी में Sugar और मस्तिष्क में Ice—जीवन की तीन फैक्ट्रियों का रहस्य।
महाकाल की भस्मारती का रहस्य: शिव और भस्म का क्या संबंध है?

कृष्णा गुरुजी (कृष्णा कांत मिश्रा) एक आध्यात्मिक चिंतक, योग साधक और ‘कलियुग पुराण’ के लेखक हैं। वे जटिल आध्यात्मिक विषयों को तर्कपूर्ण, सरल और समकालीन भाषा में समझाने के लिए जाने जाते हैं। योग, ध्यान, मानवता, उत्सव रूपांतरण, दिव्य एस्ट्रो हीलिंग तथा सर्वधर्म प्रार्थना के माध्यम से वे लोगों को अपने भीतर के दिव्य तत्व को पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं। इस लेख में प्रस्तुत विचार ‘कलियुग पुराण’ की आध्यात्मिक दृष्टि पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य परंपराओं के पीछे छिपे संकेतों को आधुनिक संदर्भ में समझाना है।
कांवड़ यात्रा कलियुग में कितनी प्रासंगिक? | कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी का संदेश

श्रावण मास में कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक साधना, अनुशासन और आत्मशुद्धि का महापर्व है। कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी बताते हैं कि वास्तविक जलाभिषेक तब है, जब व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और स्वार्थ का त्याग कर शिव भाव को अपनाता है। खुलासा फर्स्ट और इंदौर समाचार में प्रकाशित यह संदेश आज के समाज में कांवड़ यात्रा की प्रासंगिकता पर एक सकारात्मक और चिंतनशील दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
गुरु कौन है?— एक प्रश्न ने बदल दी सोच | भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में गुरु पूर्णिमा 2026 | Krishna Guruji

गुरु कौन है? गुरु पूर्णिमा 2026 पर भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में कृष्णा गुरुजी ने बंदी भाइयों को आत्मचिंतन, अनुशासन और नए जीवन का प्रेरक संदेश दिया।
गुरु पूर्णिमा: गुरु कौन है? | कलियुग पुराण के अनुसार गुरु का वास्तविक अर्थ

गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि कृतज्ञता का उत्सव है। कृष्णा गुरुजी कलियुग पुराण के अनुसार बताते हैं कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि ज्ञान, वाणी और चेतना है। माता-पिता, शिक्षक, मेंटर और जीवन में सही मार्गदर्शन देने वाला प्रत्येक व्यक्ति गुरु है। सच्ची गुरु पूर्णिमा सभी गुरुओं के प्रति धन्यवाद व्यक्त करने और उनके ज्ञान को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प है।
कलियुग में चातुर्मास कितना प्रासंगिक? परंपरा नहीं, जिम्मेदारी का महापर्व | कृष्णा गुरुजी

कलियुग में चातुर्मास कितना प्रासंगिक? जिम्मेदारी और सेवा का संदेश कलियुग में चातुर्मास का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह केवल व्रत और उपवास का समय है? या यह जिम्मेदारी, सेवा और आत्मचिंतन का पर्व भी है? सनातन परंपरा में चातुर्मास का विशेष महत्व है। However, समय के साथ जीवन की परिस्थितियां बदल गई […]
क्या हमारा भाग्य जन्म से तय होता है? कर्म, ज्ञान और जीवन का वैदिक रहस्य | Krishna Guruji

भाग्य जन्म की परिस्थिति दे सकता है, लेकिन कर्म जीवन को दिशा देता है। प्रश्न उपनिषद, नचिकेता, सेवा, ज्ञान और संतोष पर कृष्णा गुरुजी का प्रेरक चिंतन।
अथर्ववेद का सार: निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि और प्रकृति से जुड़ने का वैदिक संदेश

अथर्ववेद का सार जानें। निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि, योग, प्राणायाम, ध्यान, प्रकृति संरक्षण और संतुलित जीवन का वैदिक संदेश कृष्णा गुरुजी की सरल एवं तर्कपूर्ण व्याख्या के साथ।
बाबा अमरनाथ का समय से पहले पिघलना: प्रकृति की गंभीर चेतावनी, अब हमें संभलना होगा

बाबा अमरनाथ का समय से पहले पिघलना: प्रकृति की गंभीर चेतावनी, अब हमें संभलना होगा बाबा अमरनाथ के प्राकृतिक हिमलिंग का समय से पहले पिघलना केवल एक धार्मिक विषय नहीं है। यह संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रकृति की ओर से एक गंभीर चेतावनी और आत्ममंथन का अवसर है। अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक, कलियुग पुराण के […]