गुरु पूर्णिमा पर भैरवगढ़ जेल में अनूठा आध्यात्मिक आयोजन

गुरु पूर्णिमा जेल में कृष्णा गुरुजी के साथ भैरवगढ़ जेल उज्जैन का मार्गदर्शन दिवस

Share This Post

गुरु पूर्णिमा जेल आयोजन | भैरवगढ़ जेल उज्जैन में कृष्णा गुरुजी का मार्गदर्शन दिवस

भैरवगढ़ जेल में गुरु पूर्णिमा का महत्व

उज्जैन, 21 जुलाई 2024। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार उज्जैन की भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में अनूठा आयोजन हुआ। इसे गुरु पूर्णिमा जेल आयोजन नाम दिया गया। हालांकि, आमतौर पर अन्य स्थानों पर पूजा-पाठ और भजन होते हैं। लेकिन, इस जेल परिसर में यह कार्यक्रम अलग ही नजर आया।

कृष्णा गुरुजी का संदेश और मार्गदर्शन

कृष्णा गुरुजी ने इस आयोजन में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा, “आप जेल में इसलिए नहीं, बल्कि पहले ही क्रोध, लोभ और ईर्ष्या के कैद में थे।” इसके अलावा, गुरुजी ने कहा कि सभी को भविष्य में नियमों का पालन करना चाहिए। इसलिए, उन्होंने सभी कैदियों को शपथ दिलाई। इसी वजह से, इस आयोजन में भजन और ध्यान भी कराया गया। इस बीच, कार्यक्रम का नाम मार्गदर्शन दिवस उज्जैन रखा गया।

भजन, ध्यान और कैदियों की सहभागिता

करीब 300–500 कैदियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। सुनील, जो काशीराम के पुत्र हैं, ने कहा, “ध्यान के दौरान एक अद्भुत ऊर्जा महसूस हुई। गुरुजी के दिलवाए संकल्प पर कायम रहेंगे।” इसके अलावा, कई बंदियों ने ढोलक और ताल बजाकर माहौल को और भी जीवंत बना दिया। इस तरह, कृष्णा गुरुजी जेल कार्यक्रम ने जेल में आध्यात्मिक वातावरण बना दिया।

पूरा आयोजन वीडियो में देखें

पूरा आयोजन और कृष्णा गुरुजी प्रवचन जेल में आप नीचे दिए वीडियो में देख सकते हैं। इस वीडियो में भजन, ध्यान और कैदियों की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

समारोह का आयोजन

इस आयोजन में उज्जैन जेल समाचार के मुताबिक जेलर डाबर, उप जेलर गोयल और अन्य सुरक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा, इंदौर से आए गुरुजी के चार अनुयायी मनोज भटनागर, पिंकू यादव और अनिल मीना भी समारोह में शामिल हुए।

समापन और आयोजन का महत्व

गुरु पूर्णिमा जेल आयोजन भैरवगढ़ जेल उज्जैन में सुधारात्मक गतिविधियों का प्रतीक बन गया है। इसके अलावा, इस कार्यक्रम ने साबित कर दिया कि आध्यात्मिकता और आत्म-सुधार की राह कैदियों को नई दिशा दे सकती है। जबकि, ऐसे आयोजन जेल के माहौल को सकारात्मक बना देते हैं।

“जहां अज्ञानता है, वहां गुरु होना चाहिए।”

यह रिपोर्ट Amar Ujala पर आधारित है। गुरु पूर्णिमा जेल आयोजन, भैरवगढ़ जेल उज्जैन, कृष्णा गुरुजी जेल कार्यक्रम और मार्गदर्शन दिवस उज्जैन से जुड़ी अन्य जानकारियां वीडियो में देखी जा सकती हैं।

Subscribe To Our Newsletter

Get updates and learn from the best

More To Explore

दशहरा पर गिलकी के भजिए विषय की फीचर इमेज में नमस्कार करते Krishna Guruji, रावण दहन, हरी गिलकी और भजियों की थाली।
FESTIVAL TRANSFORMATION

दशहरे पर गिलकी क्यों खाई जाती है? Kaliyug Puran से Krishna Guruji की व्याख्या

दशहरे पर गिलकी के भजिए खाने की मालवा की परंपरा क्या संदेश देती है? कृष्णा गुरुजी कलियुग पुराण की दृष्टि से इसे महामृत्युंजय मंत्र के मुक्ति-भाव और भीतर के विकारों से मुक्त होने के संकल्प से जोड़ते हैं।

रावण दहन का महत्व: जलते रावण के प्रतीक के साथ नमस्कार मुद्रा में कृष्णा गुरुजी और भीतर के दस विकारों के दहन का संदेश।
Blog

रावण दहन का महत्व: इस विजयादशमी भीतर के दस विकारों का भी दहन करें

रावण दहन का महत्व केवल पुतला जलाने तक सीमित नहीं है। यह अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे दस विकारों को पहचानने का अवसर है। कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी समझाते हैं कि ज्ञान का सदुपयोग, आत्मचिंतन और ध्यान कैसे विजयादशमी को सार्थक बना सकते हैं।

Do You Want To Boost Your Business?

drop us a line and keep in touch

Register Now

Lorem Ipsum dolar