गुरु पूर्णिमा: गुरु कौन है? | कलियुग पुराण के अनुसार गुरु का वास्तविक अर्थ

गुरु पूर्णिमा पर कृष्णा गुरुजी का संदेश – गुरु कौन है? कलियुग पुराण के अनुसार गुरु एक चेतना है, व्यक्ति नहीं।

गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि कृतज्ञता का उत्सव है। कृष्णा गुरुजी कलियुग पुराण के अनुसार बताते हैं कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि ज्ञान, वाणी और चेतना है। माता-पिता, शिक्षक, मेंटर और जीवन में सही मार्गदर्शन देने वाला प्रत्येक व्यक्ति गुरु है। सच्ची गुरु पूर्णिमा सभी गुरुओं के प्रति धन्यवाद व्यक्त करने और उनके ज्ञान को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प है।

क्या हमारा भाग्य जन्म से तय होता है? कर्म, ज्ञान और जीवन का वैदिक रहस्य | Krishna Guruji

क्या हमारा भाग्य जन्म से तय होता है? प्रश्न उपनिषद और अथर्ववेद पर कृष्णा गुरुजी का संदेश

भाग्य जन्म की परिस्थिति दे सकता है, लेकिन कर्म जीवन को दिशा देता है। प्रश्न उपनिषद, नचिकेता, सेवा, ज्ञान और संतोष पर कृष्णा गुरुजी का प्रेरक चिंतन।

अथर्ववेद के उपनिषद: मुण्डक से ब्रह्मज्ञान और माण्डूक्य से जानें ॐ व चेतना की चार अवस्थाएँ

Krishna Guruji explaining Atharvaveda Upanishads, Mundaka Upanishad, Om Meditation, Om Chanting and the four states of consciousness

कृष्णा गुरुजी से जानें अथर्ववेद के उपनिषद, ॐ का रहस्य, मन की चार अवस्थाएँ, जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय तथा सरल ॐ ध्यान और चैंटिंग का महत्व।

अथर्ववेद का सार: निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि और प्रकृति से जुड़ने का वैदिक संदेश

अथर्ववेद का सार – निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि, योग और प्रकृति का वैदिक संदेश | कृष्णा गुरुजी

अथर्ववेद का सार जानें। निरोगी जीवन, दीर्घायु, औषधि, योग, प्राणायाम, ध्यान, प्रकृति संरक्षण और संतुलित जीवन का वैदिक संदेश कृष्णा गुरुजी की सरल एवं तर्कपूर्ण व्याख्या के साथ।

**यजुर्वेद का सार: यज्ञ, हवन, समर्पण और पर्यावरण संरक्षण का वैदिक संदेश**

यजुर्वेद हमें सिखाता है कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और मानवता के प्रति समर्पण का दिव्य मार्ग है। – कृष्णा गुरुजी

ऋग्वेद हमें प्रकृति और पंचमहाभूतों के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। वहीं, यजुर्वेद का सार हमें समझाता है कि उस कृतज्ञता को कर्म, यज्ञ, आहुति और समर्पण में कैसे बदला जाए।यजुर्वेद केवल हवन की विधियों का ग्रंथ नहीं है। यह श्रेष्ठ कर्म, सामाजिक सहभागिता, त्याग, अनुशासन और लोककल्याण का ज्ञान भी देता है। आज […]

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