प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में अपनी सामर्थ्य के अनुसार राशि दान करें। यह योगदान राष्ट्रसेवा बनेगा और आपके जीवन में एक सकारात्मक कर्म भी जोड़ेगा।
वास्तव में, 15 अगस्त को राष्ट्र के नाम सत्कर्म करने का यह एक अनूठा अवसर है।
यह किसी निश्चित ज्योतिषीय फल का दावा नहीं है। यह दान, सेवा और नागरिक जिम्मेदारी पर आधारित कृष्णा गुरुजी की आध्यात्मिक-ज्योतिषीय व्याख्या है।
इसका उद्देश्य राष्ट्रप्रेम को केवल एक दिन की भावना नहीं, बल्कि जीवन का नागरिक संस्कार बनाना है।
15 अगस्त पर राष्ट्रप्रेम को सत्कर्म में क्यों बदलें?
हर वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को पूरा भारत तिरंगे के रंग में रंग जाता है। जगह-जगह राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।
राष्ट्रगान और देशभक्ति के गीत हमारे मन को छूते हैं। उस समय देश के प्रति प्रेम, सम्मान और गर्व का भाव जागता है।
लेकिन एक प्रश्न मन में आता है। क्या हमारा राष्ट्रप्रेम केवल इन दो दिनों तक सीमित रहना चाहिए?
15 अगस्त को राष्ट्र के नाम सत्कर्म करने का उद्देश्य एक गहरी सामाजिक चेतना भी देता है।
जिस देश ने हमें पहचान, सुरक्षा और सम्मान दिया, उसके लिए हम कोई छोटा-सा नेक कार्य क्यों न करें?
इसलिए कृष्णा गुरुजी चाहते हैं कि राष्ट्रीय पर्वों पर राष्ट्रप्रेम हमारे व्यवहार में भी दिखाई दे।
“दान की राशि छोटी हो सकती है। लेकिन उसके पीछे छिपा राष्ट्रप्रेम बहुत बड़ा होता है।” — कृष्णा गुरुजी
क्या है ‘Do For Nation = Donation’ मुहिम?
कृष्णा कांत मिश्रा, जिन्हें लोग कृष्णा गुरुजी के नाम से जानते हैं, पिछले पाँच वर्षों से “Do For Nation = Donation” मुहिम चला रहे हैं।
इसका उद्देश्य राष्ट्रीय पर्वों को सार्थक नागरिक भागीदारी से जोड़ना है।
मुहिम का संदेश बहुत सरल है। प्रत्येक भारतीय 15 अगस्त और 26 जनवरी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में अपनी क्षमता के अनुसार राशि दान करे।
न्यूनतम योगदान भी राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर सकता है।
यह अभियान किसी राजनीतिक दल, नेता अथवा विचारधारा से जुड़ा हुआ नहीं है। यह केवल भारत और जरूरतमंद भारतीयों के लिए एक नागरिक अपील है।
देश-विदेश से जुड़ रहे हैं भारतीय और NRI
इस मुहिम ने विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों को भी प्रेरित किया है। कई देशों के NRIs ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में राशि जमा करके अभियान का समर्थन किया।
रिपोर्ट के अनुसार भारत के साथ अमेरिका, कनाडा, दुबई, स्वीडन, नेपाल, मलेशिया, सिंगापुर और हांगकांग में रहने वाले प्रवासी भारतीय भी इस पहल से जुड़े।
इस प्रकार एक राष्ट्रीय भावना ने सीमाओं के पार रहने वाले भारतीयों को एक सूत्र में जोड़ा।
एक सत्कर्म से सूर्य, शनि और राहु का प्रतीकात्मक संबंध
कृष्णा गुरुजी इस राष्ट्रसेवा को आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी समझाते हैं। पारंपरिक ज्योतिष में सूर्य को राजा, सरकार, शासन और सत्ता का कारक माना जाता है।
वहीं, शनि श्रमिक, जनसामान्य और प्रजा का प्रतिनिधित्व करता है।
आज अधिकतर लोग ऑनलाइन माध्यम से भुगतान करते हैं। आधुनिक ज्योतिषीय व्याख्या में राहु को तकनीक, डिजिटल नेटवर्क और अदृश्य व्यवस्था से जोड़ा जाता है।
अचानक आने वाले संकट और अप्रत्याशित घटनाएं भी राहु के भाव से संबंधित मानी जाती हैं।
इसलिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में ऑनलाइन दान एक नेक कार्य के माध्यम से तीन ग्रहों के प्रतीकात्मक भावों को जोड़ता है:
- सूर्य: सरकार, शासन और राष्ट्रीय सत्ता का प्रतीक।
- शनि: श्रमिक, प्रजा और सहायता पाने वाले नागरिकों का प्रतीक।
- राहु: ऑनलाइन माध्यम, डिजिटल नेटवर्क और अचानक आने वाले संकटों का प्रतीक।
कृष्णा गुरुजी कहते हैं, “जब हम ऑनलाइन माध्यम से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दान करते हैं,
तब एक सत्कर्म में तीन भाव जुड़ जाते हैं।
सरकार का प्रतिनिधित्व सूर्य करता है। सहायता प्राप्त करने वाली प्रजा का प्रतिनिधित्व शनि करता है।
वहीं, ऑनलाइन माध्यम और अप्रत्याशित संकट राहु के भाव से जुड़े हैं।”
हालांकि, केवल धन देने से ग्रहों के परिणाम तुरंत बदल जाने का कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।
यह एक आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक व्याख्या है।
फिर भी, ज्योतिष और अध्यात्म में निःस्वार्थ दान, सेवा और सत्कर्म को सकारात्मक कर्म माना गया है।
15 अगस्त को राष्ट्र के नाम सत्कर्म से ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ संकेत मिल सकते हैं।
इसलिए सच्ची ग्रह शांति केवल निजी स्वार्थ से नहीं आती। वह करुणा, सेवा और किसी जरूरतमंद के काम आने वाले कर्म से जुड़ती है।
आपका दान कहां काम आता है?
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का उपयोग प्राकृतिक आपदाओं और बड़ी दुर्घटनाओं में राहत प्रदान करने के लिए किया जाता है।
इसके अतिरिक्त जरूरतमंद लोगों के कुछ चिकित्सा उपचारों में भी सहायता दी जाती है।
यह कोष जनता के योगदान से संचालित होता है।
इस प्रकार आपकी छोटी-सी राशि किसी संकटग्रस्त व्यक्ति अथवा परिवार के काम आ सकती है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की आधिकारिक जानकारी यहां देखें।
दान के विकल्प देखने के लिए केवल PM India की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें।
‘Do For Nation = Donation’ की यात्रा के वीडियो देखें
इन वीडियो के माध्यम से मुहिम का संदेश, जनअपील और इसकी यात्रा को समझें:
- ‘Do For Nation = Donation’ अभियान वीडियो 1
- ‘Do For Nation = Donation’ अभियान वीडियो 2
- ‘Do For Nation = Donation’ अभियान वीडियो 3
राष्ट्रीय पर्व पर दान को नागरिक संस्कार बनाएं
हम अपने जन्मदिन और पारिवारिक अवसरों पर खर्च करते हैं।
उसी प्रकार देश के दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों पर भी कुछ राशि राष्ट्र के नाम समर्पित की जा सकती है।
इस 15 अगस्त को केवल शुभकामनाएं न दें। तिरंगे को नमन करें। राष्ट्रगान गाएं।
इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार आधिकारिक माध्यम से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में योगदान करें।
15 अगस्त को राष्ट्र के नाम सत्कर्म वास्तव में एक प्रेरणादायक नागरिक जिम्मेदारी है।
कृष्णा गुरुजी किसी से बड़ी राशि देने का आग्रह नहीं करते। प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार न्यूनतम राशि दे सकता है।
उद्देश्य व्यक्तिगत रूप से धन एकत्र करना नहीं है।
उद्देश्य नागरिकों के भीतर राष्ट्र के प्रति योगदान का संस्कार जगाना है।
जब आप 15 अगस्त को तिरंगे को नमन करें, तब देश के किसी जरूरतमंद नागरिक को भी याद करें।
इस प्रकार हमारा राष्ट्रप्रेम केवल शब्दों और गीतों तक सीमित नहीं रहेगा। वह हमारे आचरण में भी दिखाई देगा।
“15 अगस्त को राष्ट्र के नाम करें यह सत्कर्म—छोटी राशि, बड़ा राष्ट्रभाव और सकारात्मक कर्म का संकल्प।” — कृष्णा गुरुजी
Do For Nation = Donation
छोटी राशि, बड़ा राष्ट्रभाव।
जय हिंद!
कृष्णा कांत मिश्रा (कृष्णा गुरुजी)
संस्थापक—Do For Nation = Donation मुहिम
इंदौर, मध्य प्रदेश
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