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		<title>सर्वपितृ अमावस्या पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन तर्पण: इंदौर से विश्व तक &#124; Krishna Guruji</title>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 17:27:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सर्वपितृ अमावस्या पर कृष्णा गुरुजी के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सामूहिक तर्पण का केंद्र बना इंदौर। भागीरथपुरा के दिवंगतों, पुणे के केतन अग्रवाल और अज्ञात आत्माओं की शांति के लिए देश-विदेश से प्रार्थना हुई। उज्जैन सिद्धवट, हरिद्वार, ऋषिकेश और पुष्कर की सहभागिता के साथ ब्राह्मण भोजन एवं जरूरतमंदों की सेवा की गई।</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/sarva-pitru-amavasya-online-tarpan/">सर्वपितृ अमावस्या पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन तर्पण: इंदौर से विश्व तक | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<article lang="hi">
<h2>सर्वपितृ अमावस्या तर्पण: ऑनलाइन जुड़ा विश्व परिवार</h2>
<p><strong>सर्वपितृ अमावस्या तर्पण</strong> के इस आयोजन में <strong>ऑनलाइन पितृ तर्पण</strong> और <strong>अंतरराष्ट्रीय सामूहिक तर्पण</strong> के माध्यम से देश-विदेश के परिवार जुड़े।</p>
<p><strong>Sarva Pitru Amavasya</strong> पर कृष्णा गुरुजी ने पूर्वजों के स्मरण, कृतज्ञता और सेवा का संदेश दिया।</p>
<p>10 अक्टूबर 2026 को आध्यात्मिक चिंतक <strong>कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong> के सान्निध्य में यह निःशुल्क कार्यक्रम आयोजित हुआ।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी की इस पहल का केंद्र इंदौर बना। वहीं उज्जैन के सिद्धवट, हरिद्वार, ऋषिकेश और पुष्कर से पंडितों ने सहभागिता की।</p>
<p>आयोजन का विशेष भाव था—<strong>अपने पितरों के साथ उन्हें भी याद करें, जिनका तर्पण करने वाला कोई नहीं है।</strong></p>
<p>इसलिए अपने पूर्वजों के साथ अज्ञात और असमय दिवंगत लोगों की आत्मशांति के लिए भी प्रार्थना की गई।</p>
<h2>इंदौर से देश-विदेश तक पहुँची सामूहिक प्रार्थना</h2>
<p>ऑनलाइन सत्र में अमेरिका, कनाडा, दुबई, सिंगापुर और यूरोप के विभिन्न स्थानों से लोग जुड़े।</p>
<p>इस माध्यम से दूर रहने वाले परिवारों को भी एक साथ पूर्वजों का स्मरण करने का अवसर मिला।</p>
<p>सहभागियों ने अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और दिवंगत प्रियजनों को नमन किया। साथ ही उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की,</p>
<p>जिन्होंने असमय किसी अपने को खो दिया। इस तरह आयोजन ने इंदौर, उज्जैन और पुणे को श्रद्धा के एक सूत्र में जोड़ा।</p>
<h2>भागीरथपुरा के दिवंगतों को श्रद्धांजलि</h2>
<p>सर्वपितृ अमावस्या पर इंदौर के <strong>भागीरथपुरा की दूषित पेयजल त्रासदी में दिवंगत हुए लोगों</strong> का विशेष स्मरण किया गया।</p>
<p>उनकी आत्मशांति और शोकाकुल परिवारों को संबल मिलने की प्रार्थना हुई।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने कहा कि किसी परिवार का दुःख केवल उसी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाज को संवेदना के साथ उसके साथ खड़ा होना चाहिए।</p>
<p>इसी भावना से कार्यक्रम में अपने परिवार के पूर्वजों के अतिरिक्त अन्य दिवंगतों को भी श्रद्धांजलि दी गई।</p>
<h2>पुणे के केतन अग्रवाल की स्मृति में तर्पण</h2>
<p>पुणे के युवा <strong>केतन अग्रवाल</strong> की स्मृति में भी सामूहिक तर्पण और प्रार्थना की गई। कृष्णा गुरुजी ने उनके पिताजी <strong>श्री विशाल अग्रवाल</strong> को कार्यक्रम में आमंत्रित किया था।</p>
<p>उनसे टेलीफोन पर चर्चा कर केतन की स्मृति में किए गए तर्पण की जानकारी भी दी गई।</p>
<p>किसी युवा का असमय चले जाना परिवार के लिए गहरा आघात होता है। इसलिए सहभागियों ने केतन को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिजनों के लिए धैर्य और संबल की कामना की।</p>
<h2>उज्जैन सिद्धवट से ऑनलाइन पितृ तर्पण</h2>
<p>उज्जैन का पावन <strong>सिद्धवट तीर्थ</strong> भी इस आयोजन में शामिल हुआ। सिद्धवट से लालू गुरु ने कृष्णा गुरुजी के सान्निध्य में ऑनलाइन जुड़कर तर्पण संपन्न कराया।<br />
उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सिद्धवट मंदिर और पावन शिप्रा के दर्शन कराए।</p>
<p>इसके साथ अन्य तीर्थस्थलों से जुड़े पंडितों ने भी प्रार्थना में सहभागिता की। ऋषिकेश से माँ गंगा के दर्शन कराए गए।</p>
<p>इस प्रकार ऑनलाइन माध्यम ने दूर बैठे लोगों को तीर्थ दर्शन और सामूहिक स्मरण से जोड़ा।</p>
<ul>
<li><strong>उज्जैन, सिद्धवट:</strong> लालू गुरु</li>
<li><strong>हरिद्वार:</strong> पंडित राजीव शर्मा</li>
<li><strong>ऋषिकेश:</strong> पंडित दिनेश जी</li>
<li><strong>पुष्कर:</strong> योगेश पराशर जी</li>
</ul>
<h2>सर्वपितृ अमावस्या पर ब्राह्मण भोजन और सेवा</h2>
<p><strong>कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी</strong> की ओर से आयोजन से जुड़े इन सभी तीर्थस्थलों पर ब्राह्मणों को भोजन कराया गया।</p>
<p>उज्जैन के सिद्धवट पर लालू गुरु ने तर्पण के साथ ब्राह्मण भोजन की स्थानीय व्यवस्था संपन्न कराई।</p>
<p>इसके अतिरिक्त अलग-अलग स्थानों पर जरूरतमंदों के लिए भोजन सेवा की गई।</p>
<p>मुंबई के हाजी अली क्षेत्र स्थित दिव्यांगजनों की संस्था में भी भोजन की व्यवस्था की गई।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने सेवा में भोजन पाने वालों की पसंद और सम्मान का ध्यान रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा भोजन दिया जाए,</p>
<p>जिसे लोग प्रसन्नता से ग्रहण करें। इस प्रकार श्रद्धा के साथ अपनापन भी व्यक्त हो सकता है।</p>
<h2>जिनका कोई नहीं, उनके लिए भी प्रार्थना</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी ने बताया कि वे लगभग बारह वर्षों से इस भावना के साथ आयोजन करते आ रहे हैं। ऑनलाइन कार्यक्रमों से पहले वे स्वयं उज्जैन जाकर सिद्धवट पर तर्पण करते थे</p>
<p>। उन्होंने लगभग 150 लोगों की लावारिस अस्थियों के विसर्जन में सेवा का अवसर मिलने का भी स्मरण किया।</p>
<p>इस वर्ष भी अज्ञात दिवंगतों और आपदाओं में जीवन खोने वाले लोगों को सामूहिक प्रार्थना में स्थान दिया गया।</p>
<p>धार्मिक आस्था के अनुरूप अतृप्त आत्माओं की शांति और सद्गति की कामना की गई।</p>
<blockquote><p>“हम हमारे लिए तो बहुत कुछ कर रहे हैं, क्यों न हम किसी और के लिए?”</p>
<footer>— कृष्णा गुरुजी, ऑनलाइन सत्र के दौरान</footer>
</blockquote>
<h2>कलयुग पुराण की दृष्टि: कृतज्ञता और करुणा</h2>
<p>कलयुग पुराण की अपनी व्याख्या में कृष्णा गुरुजी ने परंपराओं का भाव सरल भाषा में समझाने पर जोर दिया।</p>
<p>उनके अनुसार, अगली पीढ़ी को विधि के साथ उसका उद्देश्य भी समझाना आवश्यक है।</p>
<p>इससे युवा श्रद्धा, कृतज्ञता और सामाजिक जिम्मेदारी को अपने जीवन से जोड़ सकते हैं।</p>
<p>सत्र में देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण को धन्यवाद के भाव से समझाया गया:</p>
<ul>
<li><strong>देव ऋण:</strong> प्रकृति और जीवन को सहारा देने वाली शक्तियों के प्रति कृतज्ञता।</li>
<li><strong>ऋषि ऋण:</strong> ऋषियों, गुरुओं और ज्ञान देने वालों के प्रति सम्मान।</li>
<li><strong>पितृ ऋण:</strong> माता-पिता और पूर्वजों के प्रति धन्यवाद, जिनसे जीवन और संस्कार मिले।</li>
</ul>
<p>ध्यान के दौरान सहभागियों से अपने पूर्वजों का स्मरण करने का आग्रह किया गया।</p>
<p>साथ ही जिनके माता-पिता जीवित हैं, उन्हें उनके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा दी गई।</p>
<h2>अगली पीढ़ी को सेवा का संस्कार दें</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी ने अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। इस वर्ष उन्होंने अपनी माता की स्मृति में वृद्धाश्रम जाकर वृद्धजनों को भोजन परोसा।</p>
<p>उन्होंने परिवारों से आग्रह किया कि बच्चों को भी दिवंगत प्रियजनों की स्मृति में सेवा करना सिखाएँ।</p>
<p>इसके लिए वृद्धाश्रम, कुष्ठ सेवा आश्रम या जरूरतमंद परिवारों तक अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग पहुँचाया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने सुझाव दिया कि पारंपरिक तिथि याद न होने पर परिवार परिचित कैलेंडर की तारीख पर भी स्मरण</p>
<p>और भोजन सेवा कर सकता है। यह व्यस्त जीवन में सेवा की निरंतरता बनाए रखने का उनका प्रस्ताव था।</p>
<p><strong>Remember with gratitude. Serve with compassion.</strong><br />
अपने पूर्वजों को प्रेम से याद करें। उनकी स्मृति में किसी जरूरतमंद के जीवन में सहारा बनें।</p>
<h2>सर्वपितृ अमावस्या आयोजन की मीडिया कवरेज</h2>
<p>इस आयोजन की समाचार कवरेज के लिए साझा किए गए अमर उजाला और दैनिक भास्कर के लिंक नीचे उपलब्ध हैं।</p>
<p>संबंधित प्रकाशन की वेबसाइट पर मूल समाचार पढ़ें।</p>
<ul>
<li><a href="https://www.amarujala.com/madhya-pradesh/indore-international-collective-ritual-offering-of-water-for-the-victims-of-the-bhagirathpura-water-tragedy-2026-10-10/" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
अमर उजाला: भागीरथपुरा के दिवंगतों के लिए अंतरराष्ट्रीय सामूहिक तर्पण का समाचार<br />
</a></li>
<li><a href="https://dainik.bhaskar.com/cYLNB20p76b?ref=MjA4OTI0MDg4NTgyMTkxMTA0MA%3D%3D" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
दैनिक भास्कर: समाचार कवरेज पढ़ें<br />
</a></li>
</ul>
<h2>सर्वपितृ अमावस्या ऑनलाइन तर्पण: वीडियो देखें</h2>
<p>दोनों वीडियो नीचे उपलब्ध हैं। इन्हें यहाँ या सीधे YouTube पर देखा जा सकता है।</p>
<h3>कार्यक्रम का वीडियो</h3>
<div style="position: relative; width: 100%; height: 0; padding-bottom: 56.25%; overflow: hidden;"><iframe style="position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; border: 0;" title="सर्वपितृ अमावस्या ऑनलाइन तर्पण — Krishna Guruji" src="https://www.youtube-nocookie.com/embed/Hptdfaolv6I" width="560" height="315" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p><a href="https://youtu.be/Hptdfaolv6I" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br class="yoast-text-mark" />lass=&#8221;yoast-text-mark&#8221; /&gt;&gt;कार्यक्रम का वीडियो YouTube पर देखें<br />
</a></p>
<h3>आयोजन से संबंधित दूसरा वीडियो</h3>
<div style="position: relative; width: 100%; height: 0; padding-bottom: 56.25%; overflow: hidden;"><iframe style="position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; border: 0;" title="सर्वपितृ अमावस्या आयोजन से संबंधित दूसरा वीडियो" src="https://www.youtube-nocookie.com/embed/BbCVFB8PW8Q" width="560" height="315" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p><a href="https://youtu.be/BbCVFB8PW8Q" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
दूसरा वीडियो YouTube पर देखें<br />
</a></p>
<h2>विश्व परिवार का आभार</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी ने सहयोगी पंडितों, जयलक्ष्मी जी, Divine Astro Healing परिवार और  जुड़े सभी सहभागियों का आभार व्यक्त किया।</p>
<p>उनके सहयोग से तीर्थ दर्शन, सामूहिक प्रार्थना और भोजन सेवा का यह आयोजन संभव हुआ।</p>
<p>सत्र का समापन  सामूहिक शांति पाठ से हुआ।</p>
<p><strong>पितृ देवेभ्यो नमः।<br />
ॐ शान्तिः शान्तिः </strong></p>
<h2>पितृ तर्पण  पर संबंधित लेख</h2>
<ul>
<li><a href="https://krishnaguruji.com/pitru-tarpan-kya-hai-kaliyug-puran/"><br />
पितृ तर्पण क्या है? कलयुग पुराण की दृष्टि<br />
</a></li>
<li><a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-agli-pidhi-hamara-shradh/"><br />
क्या हमारी अगली पीढ़ी करेगी हमारा श्राद्ध?<br />
</a></li>
<li><a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-2026-pitron-ko-kaise-prasann-kare/"><br />
पितृपक्ष 2026: कलयुग में पितरों को कैसे करें प्रसन्न?<br />
</a></li>
</ul>
<p><strong>कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong><br />
आध्यात्मिक चिंतक | Spiritual Thinker<br />
कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी</p>
</article>
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		<title>सर्वपितृ अमावस्या 2026: सात तीर्थों से ऑनलाइन सामूहिक तर्पण &#124; Krishna Guruji</title>
		<link>https://krishnaguruji.com/sarva-pitru-amavasya-2026-online-samuhik-tarpan/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 11:25:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सर्वपितृ अमावस्या पर कृष्णा गुरुजी सात पितृ तीर्थों को जोड़कर निःशुल्क ऑनलाइन सामूहिक तर्पण आयोजित करेंगे। 10 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे ज्ञात-अज्ञात और असमय दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/sarva-pitru-amavasya-2026-online-samuhik-tarpan/">सर्वपितृ अमावस्या 2026: सात तीर्थों से ऑनलाइन सामूहिक तर्पण | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<article lang="hi"><strong>इंदौर, 9 अक्टूबर 2026। सर्वपितृ अमावस्या 2026</strong> पर सात पितृ तीर्थों से ऑनलाइन सामूहिक तर्पण होगा।</p>
<p>आध्यात्मिक चिंतक <strong>कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong> इस सभा का मार्गदर्शन करेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम <strong>10 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे भारतीय समय</strong> पर शुरू होगा।</p>
<p>इस अवसर पर अपने पितरों को याद किया जाएगा। साथ ही उन ज्ञात-अज्ञात लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिनकी मृत्यु असमय हुई।</p>
<p>उनके परिवारों के लिए भी शांति और संबल की प्रार्थना होगी।</p>
<h2>सर्वपितृ अमावस्या 2026 पर जुड़ेंगे सात तीर्थ</h2>
<p>गयाजी, हरिद्वार, ऋषिकेश, चाणोद, त्र्यंबकेश्वर, पुष्कर और उज्जैन के सिद्धवट से पंडितजन जुड़ेंगे।</p>
<p>पहले वे तीर्थों के दर्शन कराएंगे। इसके बाद सभी को तर्पण की विधि बताएंगे।</p>
<p>कई लोग पितृ तीर्थों तक नहीं पहुँच पाते। इसलिए वे इस सभा में अपने घर से भाग ले सकते हैं।</p>
<p>इसके अलावा विदेश में रहने वाले लोग भी ऑनलाइन दर्शन और प्रार्थना कर सकेंगे।</p>
<h2>असमय दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि</h2>
<p>इस वर्ष इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को याद किया जाएगा।</p>
<p>साथ ही वृंदावन की नाव दुर्घटना के दिवंगत श्रद्धालुओं का स्मरण होगा। पुणे के केतन अग्रवाल को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी।</p>
<p>इसके अलावा अन्य ज्ञात-अज्ञात दिवंगतों के लिए भी प्रार्थना होगी। इस तरह सभा में अपने परिवार के साथ पूरे मानव परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की जाएगी।</p>
<h2>ग्यारह वर्षों से जारी सेवा</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी के अनुसार, वे विगत ग्यारह वर्षों से सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण और प्रार्थना करते आ रहे हैं।</p>
<p>उनके कार्य का आधार है <strong>“वसुधैव कुटुम्बकम्—विश्व एक परिवार है।”</strong> इसलिए इस पहल में उन लोगों का भी स्मरण होता है, जिनसे हमारा निजी परिचय नहीं था।</p>
<p>इस सेवा की पृष्ठभूमि जानने के लिए पढ़ें:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/152-lawaris-asthiyon-ka-visarjan-krishna-guruji/">152 लावारिस अस्थियों का विसर्जन और पूर्व मीडिया कवरेज</a>।<br />
इस लेख में सिद्धवट पर की गई सेवा का विवरण है। साथ ही संबंधित मीडिया रिपोर्टें भी जुड़ी हैं।</p>
<h2>MP Tak की पूर्व मीडिया रिपोर्ट</h2>
<p>इस वीडियो में कृष्णा गुरुजी की पूर्व सेवा से जुड़ी रिपोर्ट देखें। यह पुराने आयोजन का संदर्भ है। इसे 10 अक्टूबर 2026 की सभा की कवरेज न समझें।</p>
<div style="position: relative; width: 100%; height: 0; padding-bottom: 56.25%; margin: 20px 0;"><iframe style="position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; border: 0;" title="कृष्णा गुरुजी की पूर्व सेवा पर MP Tak की रिपोर्ट" src="https://www.youtube.com/embed/BORWVZkRnRQ" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p>इसके अलावा वीडियो सीधे खोलने के लिए<br />
<a href="https://youtu.be/BORWVZkRnRQ?si=tMihqexSwd-xCBTh" target="_blank" rel="noopener noreferrer">MP Tak की रिपोर्ट YouTube पर देखें</a>।</p>
<h2>देश-विदेश से जुड़ सकेंगे लोग</h2>
<p>भारत के साथ अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और मलेशिया से भी श्रद्धालु जुड़ेंगे।</p>
<p>इस प्रकार सभी एक साथ तीर्थ दर्शन और पितृ स्मरण कर सकेंगे। साथ ही दिवंगतों के परिवारों के लिए प्रार्थना करेंगे।</p>
<h2>ऑनलाइन तर्पण में कैसे जुड़ें?</h2>
<ul>
<li><strong>दिनांक:</strong> शनिवार, 10 अक्टूबर 2026</li>
<li><strong>समय:</strong> सुबह 10:30 बजे, भारतीय समय</li>
<li><strong>माध्यम:</strong> Zoom</li>
<li><strong>Meeting ID:</strong> 9826070286</li>
<li><strong>सहभागिता:</strong> पूर्णतः निःशुल्क</li>
</ul>
<p><strong>किसी भी प्रकार का दान या डोनेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा।</strong></p>
<p>जुड़ने के लिए<br />
<a href="https://zoom.us/j/9826070286" target="_blank" rel="noopener noreferrer">Zoom मीटिंग का लिंक खोलें</a>।<br />
इसके बाद स्क्रीन पर दिए निर्देशों का पालन करें। अथवा Zoom ऐप में <strong>Join</strong> दबाकर मीटिंग आईडी डालें।</p>
<h2>तर्पण की सामग्री</h2>
<p>जल से भरा एक पात्र, एक खाली पात्र, थोड़ा दूध, काले तिल और कुशा लेकर बैठें। इसके बाद पंडितजन के मार्गदर्शन में तर्पण करें।</p>
<h2>पितृ तर्पण का अर्थ समझें</h2>
<p>तर्पण के भाव को जानने के लिए पढ़ें:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-tarpan-kya-hai-kaliyug-puran/">पितृ तर्पण क्या है? जल अर्पण का अर्थ और कृतज्ञता</a>।</p>
<p>इसके अलावा<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/">पितृ पक्ष का महत्व</a><br />
और<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/social-service-initiatives/">कृष्णा गुरुजी की सामाजिक सेवा</a><br />
के बारे में भी जानें।</p>
<p><strong>सभी सादर आमंत्रित हैं।</strong> आइए, पितरों को याद करें। साथ ही असमय दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि दें।</p>
<p><strong>कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong><br />
आध्यात्मिक चिंतक<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/">krishnaguruji.com</a></p>
</article>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/sarva-pitru-amavasya-2026-online-samuhik-tarpan/">सर्वपितृ अमावस्या 2026: सात तीर्थों से ऑनलाइन सामूहिक तर्पण | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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		<title>पितृपक्ष में क्या हमारी अगली पीढ़ी करेगी हमारा श्राद्ध? &#124; Kaliyug Puran &#124; Krishna Guruji</title>
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		<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 17:12:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>व्यस्त जीवन में श्राद्ध की परंपरा कैसे आगे बढ़े? Krishna Guruji से जानें बच्चों को पूर्वजों, पारिवारिक संस्कार और कृतज्ञता से जोड़ने का सरल विचार।</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-agli-pidhi-hamara-shradh/">पितृपक्ष में क्या हमारी अगली पीढ़ी करेगी हमारा श्राद्ध? | Kaliyug Puran | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<article lang="hi"><strong>पितृ पक्ष</strong> हमें अपने पूर्वजों को याद करने का अवसर देता है। लेकिन <strong>श्राद्ध की परंपरा</strong> हमारी अगली पीढ़ी तक कैसे पहुँचेगी?</p>
<p>क्या हमारे बच्चे भी हमारा श्राद्ध करेंगे? यह प्रश्न आज परिवारों में संवाद का विषय बन सकता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी अपनी <strong>कलियुग पुराण की दृष्टि</strong> से इसी विषय पर चिंतन करते हैं। उनके अनुसार, बच्चों को परंपरा का अर्थ समझाना जरूरी है</p>
<p>। साथ ही, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के सरल अवसर भी देने चाहिए।</p>
<p>इस लेख में पारिवारिक संस्कार, पूर्वजों का स्मरण और सेवा पर चर्चा है। इसके अलावा, व्यस्त जीवन में परंपरा से जुड़े रहने के सुझाव भी हैं।</p>
<h2>वीडियो देखें: क्या हमारी अगली पीढ़ी करेगी हमारा श्राद्ध?</h2>
<p>इस संवाद में कृष्णा गुरुजी भविष्य की एक कल्पना रखते हैं। सौ वर्ष बाद पारिवारिक जीवन कैसा होगा?</p>
<p>उस समय बच्चे श्राद्ध पक्ष को किस रूप में अपनाएँगे?</p>
<div style="position: relative; width: 100%; height: 0; padding-bottom: 56.25%; overflow: hidden;"><iframe style="position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; border: 0;" title="पितृ पक्ष में क्या हमारी अगली पीढ़ी करेगी हमारा श्राद्ध? कृष्णा गुरुजी" src="https://www.youtube.com/embed/yC5l1YUcWlw" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p>सीधा YouTube लिंक:<br />
<a href="https://youtu.be/yC5l1YUcWlw" target="_blank" rel="noopener noreferrer">https://youtu.be/yC5l1YUcWlw</a></p>
<h2>पितृ पक्ष और श्राद्ध की पारिवारिक परंपरा</h2>
<p>श्राद्ध पक्ष में अनेक परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हैं। उनकी तिथि पर भोजन तैयार किया जाता है।</p>
<p>ब्राह्मण को आमंत्रित करके सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाता है।</p>
<p>कई घरों में पूर्वजों के प्रिय व्यंजन भी बनते हैं। साथ ही, अन्य जीवों के लिए अन्न का अंश निकाला जाता है।</p>
<p>इन अवसरों पर परिवार के सदस्य एकत्र होते हैं।</p>
<p>इस तरह बच्चों को दादा-दादी और दूसरे पूर्वजों की कहानियाँ सुनने का अवसर मिलता है।</p>
<p>वे उनके संघर्ष और अच्छे गुणों को जान पाते हैं।</p>
<p>इसलिए ऐसे आयोजन पारिवारिक स्मृतियों को भी आगे बढ़ाते हैं।</p>
<p>विषय का व्यापक परिचय:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/">कलियुग पुराण की दृष्टि से पितृ पक्ष का महत्त्व</a>।</p>
<h2>सौ साल बाद श्राद्ध का स्वरूप कैसा होगा?</h2>
<p>आज अनेक युवा नौकरी और व्यवसाय के कारण परिवार से दूर रहते हैं। कुछ दूसरे शहरों में हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वहीं, कई बच्चे विदेशों में अपना जीवन सँभाल रहे हैं।</p>
<p>यात्रा, काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण हर अवसर पर घर पहुँचना संभव नहीं होता।</p>
<p>फिर भी, इससे उनके मन का प्रेम अपने आप समाप्त नहीं हो जाता।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी वर्ष 2126 की कल्पना करते हुए एक प्रश्न उठाते हैं। क्या उस समय भी श्राद्ध का आयोजन आज जैसा होगा?</p>
<p>यह भविष्यवाणी नहीं, बदलती परिस्थितियों पर चिंतन है।</p>
<p>इसीलिए वे आज से संवाद शुरू करने का सुझाव देते हैं। हमें समझना होगा कि परंपरा का भाव नई पीढ़ी तक कैसे पहुँचाया जाए।</p>
<h2>क्या बच्चों को अपने दादा-दादी के नाम पता हैं?</h2>
<p>हम छोटी उम्र से बच्चों की प्रतिभा पहचानना चाहते हैं। किसी को क्रिकेट सिखाते हैं।</p>
<p>किसी को संगीत, विज्ञान या दूसरी गतिविधियों में आगे बढ़ाते हैं। यह अच्छी पहल है।</p>
<p>लेकिन इसके साथ एक सरल प्रश्न भी पूछें। क्या बच्चा अपने दादा-दादी और नाना-नानी के नाम जानता है?</p>
<p>क्या उसे उनके जीवन की कोई कहानी पता है?</p>
<blockquote><p>“बच्चे को सफल बनाने के साथ उसकी जड़ों से भी जोड़ें। उसे पता हो कि उसके जीवन के पीछे कितनी पीढ़ियों का योगदान है।”</p>
<p>— कृष्णा गुरुजी</p></blockquote>
<p>यह बात सभी बच्चों के बारे में सामान्य निष्कर्ष नहीं है। इसका उद्देश्य बड़ों को अपनी भूमिका याद दिलाना है।</p>
<p>आखिर परिवार का परिचय घर से ही शुरू होता है।</p>
<h3>परिवार की स्मृतियाँ साझा करने के सरल तरीके</h3>
<ul>
<li>बच्चों को दादा-दादी और नाना-नानी के नाम बताएँ।</li>
<li>पुरानी तस्वीरें दिखाकर उनमें मौजूद लोगों का परिचय दें।</li>
<li>पूर्वजों के जीवन की छोटी और सच्ची कहानियाँ सुनाएँ।</li>
<li>उनके अच्छे गुणों को दैनिक व्यवहार से जोड़ें।</li>
<li>परिवार की एक सरल वंशावली तैयार करें।</li>
<li>बुजुर्गों से बातचीत के लिए नियमित समय निकालें।</li>
</ul>
<p>इस प्रकार, अगली पीढ़ी और संस्कार का संबंध अनुभवों से बनता है। केवल निर्देश देने की तुलना में साझा समय अधिक आत्मीय हो सकता है।</p>
<h2>पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का क्या अर्थ है?</h2>
<p>हमारा जीवन केवल हमारे अपने प्रयासों का परिणाम नहीं है। माता-पिता का पालन-पोषण और पिछली पीढ़ियों का श्रम भी इसमें शामिल है।</p>
<p>इसलिए उनके योगदान को स्वीकार करना कृतज्ञता का एक रूप है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी अपने संवाद में देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का उल्लेख करते हैं। अपनी समकालीन व्याख्या में वे इन्हें तीन भावों से जोड़ते हैं।</p>
<ul>
<li><strong>देव ऋण:</strong> जीवन को सहारा देने वाली प्रकृति और दैवी व्यवस्था के प्रति आदर।</li>
<li><strong>ऋषि ऋण:</strong> ज्ञान देने वाले ऋषियों, गुरुओं और ज्ञान-परंपरा के प्रति आभार।</li>
<li><strong>पितृ ऋण:</strong> जीवन और संस्कार देने वाले माता-पिता तथा पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता।</li>
</ul>
<p>उनका संदेश है कि ऐसे योगदान का मूल्य केवल धन से नहीं चुकाया जा सकता। हालाँकि, हम अपने आचरण और सेवा से आभार व्यक्त कर सकते हैं।</p>
<h2>शास्त्रीय संदर्भ में तर्पण और जीवकल्याण</h2>
<p><strong>मनुस्मृति 3.70</strong> में “पितृयज्ञस्तु तर्पणम्” कहा गया है। अर्थात तर्पण को पितृयज्ञ के रूप में स्थान दिया गया है।</p>
<p>इसी प्रकार, <strong>विष्णु पुराण के तृतीय अंश, अध्याय 11</strong> में देव, ऋषि और पितरों के तर्पण का वर्णन है। आगे अन्य जीवों की तृप्ति की प्रार्थना भी मिलती है।</p>
<p>ये संदर्भ तर्पण और व्यापक जीवकल्याण की भावना समझने में सहायक हैं। हालाँकि, इनसे ऑनलाइन दान को हर अनुष्ठान का समान विकल्प नहीं मानना चाहिए।</p>
<p>ऑनलाइन सहयोग का सुझाव आधुनिक जीवन के लिए कृष्णा गुरुजी की व्यावहारिक व्याख्या है।</p>
<ul>
<li><a href="https://www.sanskritsahitya.org/vishnupuranam/3.11" target="_blank" rel="noopener noreferrer">विष्णु पुराण: तृतीय अंश, अध्याय 11</a></li>
<li><a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/manusmriti-with-the-commentary-of-medhatithi/d/doc199849.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मनुस्मृति 3.70: तर्पण को पितृयज्ञ कहने का संदर्भ</a></li>
</ul>
<p>तर्पण के अर्थ और हस्ततीर्थों के बारे में पढ़ें:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-tarpan-kya-hai-kaliyug-puran/">पितृ तर्पण क्या है? कलियुग पुराण की दृष्टि</a>।</p>
<h2>व्यस्त जीवन में श्राद्ध की भावना कैसे बनाए रखें?</h2>
<p>जो परिवार पारंपरिक विधि से श्राद्ध कर सकते हैं, वे अपनी परंपरा निभाएँ। वहीं, समय और व्यवस्था का अभाव हो तो स्मरण तथा सेवा के अवसर चुनें।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी का सुझाव है कि बच्चों को पहले इसका उद्देश्य समझाएँ। उनसे कहें कि पूर्वजों की स्मृति किसी अच्छे कार्य से भी जुड़ सकती है।</p>
<p>इसके लिए बड़े आयोजन की शर्त रखना आवश्यक नहीं है। अपनी क्षमता से किया गया उपयोगी सहयोग भी बच्चों को कृतज्ञता का अभ्यास सिखा सकता है।</p>
<h3>पूर्वजों की स्मृति में सेवा के विकल्प</h3>
<ul>
<li><strong>वृद्धाश्रम:</strong> आवश्यकता पूछकर भोजन या जरूरी सामग्री की व्यवस्था करें।</li>
<li><strong>बालगृह और शिक्षा:</strong> बच्चों की पढ़ाई या दैनिक आवश्यकताओं में सहयोग दें।</li>
<li><strong>अन्नक्षेत्र:</strong> जरूरतमंद लोगों के भोजन में सहायता करें।</li>
<li><strong>गौशाला:</strong> चारा, पानी और देखभाल की वास्तविक जरूरतों में योगदान दें।</li>
<li><strong>पशु-पक्षी सेवा:</strong> उपयुक्त भोजन और स्वच्छ पानी की व्यवस्था में सहयोग करें।</li>
</ul>
<p>सभी जगह दान करना अनिवार्य नहीं है। परिवार अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक सेवा भी चुन सकता है। इसके अलावा, बच्चों को उस निर्णय में शामिल करें।</p>
<p>संबंधित लेख:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-2026-pitron-ko-kaise-prasann-kare/">पितृपक्ष 2026: कलियुग में पितरों को कैसे करें प्रसन्न?</a></p>
<h2>ऑनलाइन दान करते समय क्या ध्यान रखें?</h2>
<p>दूर रहकर सहयोग करने के लिए ऑनलाइन माध्यम उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन केवल तस्वीर या भावनात्मक अपील देखकर भुगतान न करें। पहले संस्था की पहचान और जरूरत समझें।</p>
<ul>
<li>संस्था का आधिकारिक संपर्क और भुगतान विवरण जाँचें।</li>
<li>पूछें कि सहयोग किस काम में उपयोग होगा।</li>
<li>भुगतान की रसीद या पुष्टि सुरक्षित रखें।</li>
<li>संभव हो तो स्थानीय परिचित से संस्था की जानकारी लें।</li>
<li>सहायता के उपयोग की उचित जानकारी माँगें।</li>
</ul>
<p>इस तरह दान एक जागरूक सेवा-संकल्प बन सकता है। साथ ही, बच्चे जिम्मेदारी से सहयोग करना भी सीखते हैं।</p>
<h2>श्राद्ध की तिथि याद न हो तो क्या करें?</h2>
<p>मृत्यु की अंग्रेजी तारीख और हिंदू तिथि एक जैसी नहीं होतीं। इसलिए केवल तारीख देखकर हर वर्ष वही श्राद्ध-तिथि मान लेना उचित नहीं है।</p>
<p>तिथि जानने के लिए मृत्यु की तारीख, वर्ष, समय और स्थान की जानकारी उपयोगी होती है।</p>
<p>विश्वसनीय पंचांग या जानकार पुरोहित से इसकी पुष्टि कराएँ।</p>
<p>तिथि ज्ञात न होने पर सर्वपितृ अमावस्या पूर्वजों के सामूहिक स्मरण का प्रचलित अवसर है।</p>
<p>धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपनी कुलपरंपरा का मार्गदर्शन लें।</p>
<p>वहीं, स्मृति-सेवा के लिए परिवार एक सुविधाजनक दिन तय कर सकता है।</p>
<p>उस दिन पूर्वजों को याद करें और बच्चों के साथ कोई उपयोगी कार्य करें।</p>
<h2>पितृ स्मरण और ध्यान का भाव</h2>
<p>वीडियो के अंत में माता-पिता और दादा-दादी के स्मरण पर आधारित ध्यान कराया गया है।</p>
<p>इसका उद्देश्य अपने जीवन में उनके योगदान को याद करना है।</p>
<p>सरल अभ्यास के लिए आराम से बैठें। श्वास सामान्य रखें। फिर माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी का चेहरा याद करें।</p>
<p>उनके किसी अच्छे गुण के प्रति आभार व्यक्त करें।</p>
<p>यदि चेहरा याद न हो तो उनका नाम स्मरण कर सकते हैं। आँखें बंद करना आवश्यक नहीं है।</p>
<p>भावुकता बढ़े तो विराम लें।</p>
<p>वीडियो की श्वास-संबंधी भाषा में एक स्पष्टता जरूरी है। एक नासिका से श्वास लेने का अर्थ केवल उसी ओर के</p>
<p>फेफड़े का उपयोग करना नहीं है। श्वास रोकने या जोर लगाने के बजाय सहज श्वसन रखें।</p>
<p>इस विषय से जुड़ा लेख:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-pranayama-a-breath-based-remedy-for-pitru-dosh/">पितृ प्राणायाम और पूर्वजों के स्मरण पर विचार</a>।</p>
<h2>जीवित माता-पिता को आज समय दें</h2>
<p>पूर्वजों की स्मृति का सम्मान करते हुए जीवित बुजुर्गों की जरूरतों पर भी ध्यान दें। उनके साथ बैठना और</p>
<p>उनकी बातें सुनना रिश्ते को मजबूत कर सकता है।</p>
<p>सुविधाएँ और उपहार प्रेम की अभिव्यक्ति हैं। इसके साथ समय और संवाद भी जरूरी हैं। इसलिए परिवार में नियमित बातचीत की आदत बनाएँ।</p>
<p>बच्चे जब बड़ों को अपने माता-पिता का सम्मान करते देखते हैं, तो वे व्यवहार से सीखते हैं। इस प्रकार संस्कार दैनिक जीवन का हिस्सा बनते हैं।</p>
<h2>अगली पीढ़ी को कैसी विरासत दें?</h2>
<blockquote><p>“बच्चों के लिए संपत्ति और अवसर छोड़ें। साथ ही, परिवार की स्मृतियाँ और सेवा के संस्कार भी दें।</p>
<p>उन्हें पता हो कि उनके जीवन के पीछे किन लोगों का योगदान है।”</p>
<p>— कृष्णा गुरुजी</p></blockquote>
<p>पितृ पक्ष का यह चिंतन हमें अपने व्यवहार की ओर लौटाता है। बच्चों से भविष्य में सम्मान की अपेक्षा रखने के साथ आज उन्हें आत्मीय अनुभव दें।</p>
<p>पूर्वजों की कहानियाँ सुनाएँ। उनके अच्छे गुणों पर चर्चा करें। फिर स्मरण को किसी उपयोगी सेवा से जोड़ें।</p>
<p>यही कलियुग पुराण की इस व्याख्या का संदेश है।</p>
<h2>अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न</h2>
<h3>बच्चों को श्राद्ध का अर्थ कैसे समझाएँ?</h3>
<p>उन्हें बताएँ कि यह दिवंगत पूर्वजों के स्मरण और सम्मान की परंपरा है। परिवार की कहानियों और सेवा के छोटे कार्यों से शुरुआत करें।</p>
<h3>क्या ऑनलाइन दान सभी श्राद्ध-कर्मों का विकल्प है?</h3>
<p>ऐसा सार्वभौमिक दावा नहीं किया जा सकता। यहाँ ऑनलाइन सहयोग को कृतज्ञता व्यक्त करने का समकालीन सेवा-माध्यम बताया गया है।</p>
<h3>क्या परिवार की स्मृतियाँ डिजिटल रूप में रख सकते हैं?</h3>
<p>हाँ। तस्वीरों, नामों और छोटी जीवन-कथाओं का पारिवारिक संग्रह बना सकते हैं। बुजुर्गों की सहमति से उनकी यादें रिकॉर्ड भी कर सकते हैं।</p>
<h3>क्या सेवा के लिए बड़ी राशि जरूरी है?</h3>
<p>नहीं। अपनी क्षमता से वास्तविक जरूरत पूरी करना महत्त्वपूर्ण है। समय, उपयोगी सामग्री और प्रत्यक्ष सहायता भी सेवा के रूप हैं।</p>
<p><strong>कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong><br />
अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक<br />
कलियुग पुराण की दृष्टि</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/">https://krishnaguruji.com/</a></p>
</article>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-agli-pidhi-hamara-shradh/">पितृपक्ष में क्या हमारी अगली पीढ़ी करेगी हमारा श्राद्ध? | Kaliyug Puran | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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		<title>पितृ तर्पण क्या है? जल अर्पण का अर्थ और कृतज्ञता &#124; Krishna Guruji In Kaliyug Puran</title>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 18:53:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>पितृ तर्पण केवल जल अर्पित करने की परंपरा नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सेवा का भाव है। जानिए तर्पण का शास्त्रीय अर्थ, हस्ततीर्थों की महत्ता और कलियुग पुराण की दृष्टि से युवा पीढ़ी इसे आज के जीवन में कैसे समझ सकती है।</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-tarpan-kya-hai-kaliyug-puran/">पितृ तर्पण क्या है? जल अर्पण का अर्थ और कृतज्ञता | Krishna Guruji In Kaliyug Puran</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<article lang="hi"><strong>पितृ तर्पण</strong> पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा है। <strong>पितृ पक्ष में तर्पण</strong> करते समय जल अर्पित किया जाता है।लेकिन इसका अर्थ क्या है? हाथ की स्थिति क्यों बदलती है? आज की युवा पीढ़ी इसे कैसे समझे?</p>
<p>इन प्रश्नों पर कृष्णा गुरुजी अपनी <strong>कलियुग पुराण की दृष्टि</strong> रखते हैं। वे तर्पण को स्मरण, कृतज्ञता और सेवा से जोड़ते हैं।</p>
<p>साथ ही, शास्त्रीय विधि और अपनी भावात्मक व्याख्या का अंतर स्पष्ट करते हैं।</p>
<h2>पितृ तर्पण क्या है? पितृ पक्ष में तर्पण</h2>
<p>तर्पण का मूल भाव तृप्त करना है। धार्मिक परंपरा में देवताओं, ऋषियों और पितरों के निमित्त अर्पण किया जाता है।</p>
<p>पूर्वजों के लिए किया गया तर्पण <strong>पितृ तर्पण</strong> कहलाता है।</p>
<p>श्राद्ध और तर्पण जुड़े हुए हैं। हालाँकि, दोनों का अर्थ पूरी तरह समान नहीं है।</p>
<p>श्राद्ध में भोजन, दान और दूसरे अनुष्ठान शामिल हो सकते हैं। वहीं, जलार्पण तर्पण का प्रमुख रूप है।</p>
<p>इसलिए तर्पण को समझने के लिए उसके भाव और विधि, दोनों पर ध्यान देना उपयोगी है।</p>
<h2>वीडियो: पितृ तर्पण पर कृष्णा गुरुजी का संवाद</h2>
<p>इस वीडियो में तर्पण के अर्थ और युवाओं की जिज्ञासाओं पर चर्चा है। इसके साथ पूर्वजों के स्मरण पर आधारित ध्यान भी शामिल है।</p>
<div style="position: relative; width: 100%; height: 0; padding-bottom: 56.25%; overflow: hidden;"><iframe style="position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; border: 0;" title="पितृ तर्पण क्या है? कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी" src="https://www.youtube.com/embed/IyMvDmomd1o" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p>सीधा वीडियो लिंक:<br />
<a href="https://youtu.be/IyMvDmomd1o" target="_blank" rel="noopener noreferrer">https://youtu.be/IyMvDmomd1o</a></p>
<h2>पितृ तर्पण किस पुराण में लिखा है?</h2>
<p><strong>विष्णु पुराण के तृतीय अंश, अध्याय 11, श्लोक 27–30</strong> में तर्पण का उल्लेख मिलता है।</p>
<p>इसमें देवताओं, ऋषियों और पितरों को हाथ के निर्धारित भागों से जल अर्पित करने का वर्णन है।</p>
<p>आगे श्लोक 32–38 में सभी जीवों की तृप्ति की प्रार्थना आती है।</p>
<p>इस प्रकार, तर्पण की भावना परिवार से आगे समस्त जीवन तक पहुँचती है।</p>
<p>मूल संदर्भ:<br />
<a href="https://www.sanskritsahitya.org/vishnupuranam/3.11" target="_blank" rel="noopener noreferrer">विष्णु पुराण — तृतीय अंश, अध्याय 11</a>।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, <strong>मनुस्मृति 3.70</strong> में कहा गया है—<strong>“पितृयज्ञस्तु तर्पणम्।”</strong> अर्थात तर्पण को पितृयज्ञ कहा गया है।</p>
<p>संदर्भ:<br />
<a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/manusmriti-with-the-commentary-of-medhatithi/d/doc199849.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मनुस्मृति 3.70 — पाठ और व्याख्या</a>।</p>
<h2>तर्पण में जल क्यों अर्पित किया जाता है?</h2>
<p>जल जीवन का आधार है। प्यास की तृप्ति का हमारा सीधा अनुभव जल से जुड़ा है। धार्मिक परंपरा में भी जलार्पण का विशेष स्थान है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी की भावात्मक व्याख्या में जल कृतज्ञता का माध्यम बनता है। पूर्वजों के कारण हमें जीवन मिला।</p>
<p>उनके श्रम और संस्कारों ने हमें आगे बढ़ाया। इसलिए जल अर्पित करते समय हम उनके योगदान को याद करते हैं।</p>
<blockquote><p>“अंजलि में जल लेते समय अपने पूर्वजों के उपकार याद करें। उनके प्रति कृतज्ञता को अपने व्यवहार में भी स्थान दें।”</p></blockquote>
<h2>क्या तर्पण का जल पितरों तक पहुँचता है?</h2>
<p>धार्मिक मान्यता में तर्पण पितरों की तृप्ति और शांति का माध्यम है। हालाँकि, जल के भौतिक रूप से</p>
<p>दूसरे लोक तक पहुँचने की प्रक्रिया प्रमाणित नहीं है। यह आस्था का विषय है।</p>
<p>कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी इसका मानवीय अर्थ समझाते हैं। उनके अनुसार, तर्पण</p>
<p>अपने जीवन के स्रोतों के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर है।</p>
<p>इस प्रकार, श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ कृतज्ञता और सेवा का अभ्यास भी जोड़ सकता है।</p>
<h2>हाथ की अलग-अलग मुद्राओं का क्या अर्थ है?</h2>
<p>तर्पण में हाथ के निर्धारित भागों को <strong>हस्ततीर्थ</strong> कहा जाता है। सामान्य बातचीत में इन्हें मुद्राएँ भी कहा जाता है।</p>
<p>लेकिन यहाँ मुख्य बात जल छोड़ने के स्थान की है।</p>
<ul>
<li><strong>देवतीर्थ:</strong> उँगलियों के अग्रभाग से संबंधित है।</li>
<li><strong>प्राजापत्य तीर्थ:</strong> छोटी उँगली के मूलभाग से संबंधित माना जाता है।</li>
<li><strong>पितृतीर्थ:</strong> अंगूठे और तर्जनी के बीच के भाग से संबंधित है।</li>
<li><strong>ब्रह्मतीर्थ:</strong> अंगूठे के मूल के पास का भाग है। इसका उपयोग आचमन में होता है।</li>
</ul>
<p>इन हस्ततीर्थों का उल्लेख <strong>मनुस्मृति 2.59</strong> में मिलता है। इनके प्रयोग को अपनी अनुष्ठान-पद्धति के अनुसार समझना चाहिए।</p>
<p>संदर्भ:<br />
<a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/manusmriti-with-the-commentary-of-medhatithi/d/doc145649.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मनुस्मृति 2.59 — हाथ के तीर्थों का वर्णन</a>।</p>
<p>इसके अलावा, दिशा और अंजलियों की संख्या में परंपरागत भेद मिलते हैं। इसलिए केवल हाथ की स्थिति देखकर पूरी विधि निर्धारित न करें। मंत्र, क्रम और दिशा अपनी कुलपरंपरा के अनुसार सीखें।</p>
<h2>देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण की भावना</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी अपने संवाद में तीन ऋणों को कृतज्ञता से जोड़कर समझाते हैं। यह उनकी समकालीन भावात्मक व्याख्या है।</p>
<ul>
<li><strong>देव ऋण:</strong> जीवन को सहारा देने वाली प्रकृति और दैवी व्यवस्था के प्रति आदर।</li>
<li><strong>ऋषि ऋण:</strong> ज्ञान देने वाले ऋषियों, गुरुओं और ज्ञान-परंपरा के प्रति आभार।</li>
<li><strong>पितृ ऋण:</strong> जीवन, पालन-पोषण और संस्कार देने वाले पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता।</li>
</ul>
<p>केवल जलार्पण से सभी दायित्व समाप्त हो जाते हैं, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। इसके साथ प्रकृति की रक्षा, ज्ञान का सम्मान और परिवार की देखभाल भी जरूरी है।</p>
<h2>व्यस्त युवा पितृ तर्पण की भावना से कैसे जुड़ें?</h2>
<p>आज अनेक युवा नौकरी और कॉर्पोरेट जीवन में व्यस्त हैं। कई लोग विदेश में रहते हैं। ऐसे में विस्तृत आयोजन कठिन हो सकता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी सुझाव देते हैं कि कुछ समय पूर्वजों के स्मरण के लिए निकालें। उनके जीवन की अच्छी बातें याद करें। फिर किसी उपयोगी सेवा का संकल्प लें।</p>
<p>सामग्री उपलब्ध न हो तो मानसिक स्मरण और कृतज्ञता की प्रार्थना कर सकते हैं। यह ध्यान का सरल अभ्यास है। इसे पूर्ण शास्त्रीय तर्पण-विधि का समान विकल्प घोषित नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>इस विषय को आगे समझने के लिए पढ़ें:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-2026-pitron-ko-kaise-prasann-kare/">पितृपक्ष 2026: कलियुग में पितरों को कैसे करें प्रसन्न?</a></p>
<h2>पितृ पक्ष में तर्पण के साथ सेवा का संकल्प</h2>
<p>पूर्वजों के स्मरण के साथ सेवा जोड़ने से कृतज्ञता व्यवहार में आती है। अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार कोई एक कार्य चुनें।</p>
<ul>
<li>किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सम्मानपूर्वक भोजन दें।</li>
<li>वृद्धाश्रम की आवश्यकता पूछकर सहयोग करें।</li>
<li>गौशाला में चारे और पानी की व्यवस्था में सहायता दें।</li>
<li>पक्षियों के लिए उपयुक्त दाना और स्वच्छ पानी रखें।</li>
<li>जीवित माता-पिता और बुजुर्गों के साथ समय बिताएँ।</li>
</ul>
<p>इसके साथ<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/">कलियुग पुराण की दृष्टि से पितृ पक्ष का महत्त्व</a><br />
भी जानें।</p>
<h2>पितृ स्मरण और ध्यान</h2>
<p>शांत बैठकर माता-पिता और पूर्वजों का चेहरा याद करें। उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करें। चित्र उपलब्ध न हो तो उनका नाम स्मरण करें।</p>
<p>श्वास सहज रखें। उसे रोकने या जोर लगाने की आवश्यकता नहीं है। असुविधा हो तो सामान्य श्वास लेते हुए केवल स्मरण करें।</p>
<p>संबंधित अनुभव और विचार:<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-pranayama-a-breath-based-remedy-for-pitru-dosh/">पितृ प्राणायाम और पूर्वजों के स्मरण पर लेख</a>।</p>
<h2>कृष्णा गुरुजी का संदेश</h2>
<blockquote><p>“परंपरा का अर्थ समझकर उसे आगे बढ़ाएँ। हमारी अंजलि में जल हो, मन में श्रद्धा हो और जीवन में सेवा हो। जिन्होंने हमें सहारा दिया, उनकी स्मृति में हम भी किसी का सहारा बनें।”</p></blockquote>
<p><strong>— कृष्णा गुरुजी</strong><br />
अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक<br />
कलियुग पुराण की दृष्टि</p>
</article>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-tarpan-kya-hai-kaliyug-puran/">पितृ तर्पण क्या है? जल अर्पण का अर्थ और कृतज्ञता | Krishna Guruji In Kaliyug Puran</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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		<title>मुंबई में Krishna Guruji का Divyang Yoga Session: Disability को Ability में बदलने का दिया संदेश</title>
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		<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:45:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>मुंबई में Krishna Guruji ने 150+ दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष Divyang Yoga Session लिया। पंचतत्व, प्राणायाम, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए उन्होंने Disability को Ability में बदलने का संदेश दिया।</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<article><strong>मुंबई, 5 अक्टूबर 2026।</strong> अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक, हीलर एवं योग मेंटर <strong>कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong> ने मुंबई स्थित <a href="https://fphmumbai.org/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">Fellowship of the Physically Handicapped (FPH), Mumbai</a> में विशेष <strong>Divyang Yoga Session</strong> लिया।</p>
<p>इस विशेष सत्र में 150 से अधिक दिव्यांग विद्यार्थी और युवा शामिल हुए। संस्था में ये विद्यार्थी विभिन्न प्रकार के कौशल सीख रहे हैं। इसके माध्यम से वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने योग को केवल आसन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने <strong>Divyang Yoga</strong> को पंचतत्व, प्राणायाम, पर्यावरण, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ा।</p>
<h2>Divyang Yoga Session Mumbai में मिला विशेष संदेश</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी ने विद्यार्थियों से कहा कि शरीर की किसी कमी को जीवन की सबसे बड़ी कमजोरी मान लेना सही नहीं है। व्यक्ति के भीतर अनेक ऐसी क्षमताएँ होती हैं, जिन्हें पहचानने की आवश्यकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब हमारा ध्यान केवल शरीर की कमी पर रहता है, तब हम अपनी दूसरी क्षमताओं को नहीं देख पाते। लेकिन जब हम उस कमी से ऊपर उठकर सोचते हैं, तब हमारे सामने नई संभावनाएँ खुलती हैं।</p>
<blockquote><p><strong>“अपनी Disability को अभिशाप नहीं, वरदान समझिए। शरीर की कमी से ऊपर उठकर अपनी विशेष क्षमता पहचानेंगे, तो आपकी Disability, Ability में बदल सकती है।”</strong></p></blockquote>
<p>कृष्णा गुरुजी ने अपने जीवन के अनुभव का उदाहरण भी विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने समझाया कि शारीरिक सीमा को अपनी पूरी पहचान नहीं बनने देना चाहिए।</p>
<p>आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच के साथ व्यक्ति अपने लिए और समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी की आध्यात्मिक और योग यात्रा के बारे में अधिक जानकारी के लिए <a href="https://krishnaguruji.com/" target="_self">KrishnaGuruji.com</a> पर पढ़ें।</p>
<h2>पंचतत्व से कैसे जुड़ा Divyang Yoga?</h2>
<p><strong>Divyang Yoga Session Mumbai</strong> के दौरान कृष्णा गुरुजी ने योग को प्रकृति के पाँच तत्वों से जोड़ा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि हमारा शरीर <strong>पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश</strong> से जुड़ा हुआ है।</p>
<p>इसलिए शरीर की देखभाल के साथ प्रकृति की देखभाल करना भी हमारा दायित्व है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने <strong>वायु तत्व को श्वास और प्राणायाम</strong> से जोड़ा। उन्होंने विद्यार्थियों को सरल तरीके से बताया कि</p>
<p>हमारी प्रत्येक श्वास प्रकृति से हमारे संबंध की याद दिलाती है।</p>
<p>इसी प्रकार पृथ्वी तत्व को उन्होंने <strong>पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण</strong> से जोड़ा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम अपने शरीर को नहलाते हैं और स्वच्छ रखते हैं, उसी प्रकार</p>
<p>प्रकृति को स्वच्छ रखना भी जरूरी है। पर्यावरण की रक्षा करना पंचतत्वों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।</p>
<h2>शरीर पाँच तत्वों से बना है</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी ने विद्यार्थियों को एक सरल उदाहरण के माध्यम से पंचतत्व का महत्व समझाया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अलग-अलग वस्तुओं और सामग्री से कोई उपयोगी चीज बनाई जाती है,</p>
<p>उसी प्रकार मानव शरीर भी प्रकृति के विभिन्न तत्वों से बना है।</p>
<p>इसलिए योग का अर्थ केवल शरीर को मोड़ना या कुछ आसन करना नहीं है। योग हमें अपने शरीर</p>
<p>, श्वास, मन और प्रकृति के बीच संबंध को समझने में भी सहायता करता है।</p>
<p>यही सोच <strong>Divyang Yoga</strong> को केवल शारीरिक अभ्यास से आगे लेकर जाती है।</p>
<h2>Disability को Ability में कैसे बदलें?</h2>
<p>इस विशेष सत्र का सबसे महत्वपूर्ण विषय था <strong>Disability to Ability</strong>।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति को सबसे पहले अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए।</p>
<p>शरीर की जो क्षमता उपलब्ध है, उसे विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हर व्यक्ति अपने साथ कोई न कोई विशेष गुण लेकर आता है। इसलिए जो नहीं है,</p>
<p>उस पर जीवनभर दुखी रहने के बजाय जो है, उसे विकसित करना अधिक महत्वपूर्ण है।</p>
<blockquote><p><strong>“आप दिव्यांग हैं, लेकिन आपके भीतर कोई विशेष वरदान भी है। अपनी कमी से ऊपर उठकर उस वरदान को खोजिए।”</strong></p></blockquote>
<p>उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वे भी केवल अपनी शारीरिक परेशानी पर ध्यान देते रहते,</p>
<p>तो शायद समाज के लिए कार्य करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाते।</p>
<p>उनका संदेश था कि परिस्थितियाँ कठिन हो सकती हैं। फिर भी व्यक्ति अपनी क्षमता, आत्मविश्वास और संकल्प के माध्यम से नई राह बना सकता है।</p>
<h2>देखें Krishna Guruji का Divyang Yoga Session</h2>
<p>मुंबई में आयोजित विशेष <strong>Divyang Yoga Session</strong> और कृष्णा गुरुजी के प्रेरक संदेश को इस वीडियो में देखा जा सकता है।</p>
<div class="video-container"><iframe title="Krishna Guruji Divyang Yoga Session Mumbai - Disability to Ability" src="https://www.youtube.com/embed/jPA9gLir01Q" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p><a href="https://youtu.be/jPA9gLir01Q?si=ozSZGa9XIFX2xfH_" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><strong>▶ YouTube पर पूरा Divyang Yoga Session देखें</strong></a></p>
<h2>योग सेशन के बाद देखा दिव्यांग साथियों का हुनर</h2>
<p>Divyang Yoga Session समाप्त होने के बाद कृष्णा गुरुजी ने संस्था के विभिन्न विभागों का भी भ्रमण किया।</p>
<p>संस्था की टीम उन्हें उन स्थानों पर लेकर गई, जहाँ दिव्यांग विद्यार्थी और युवा अलग-अलग प्रकार के कार्य सीख रहे हैं और कर रहे हैं।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने उनके द्वारा किए जा रहे <strong>हैंडलूम, प्रिंटिंग और अन्य skill-based activities</strong> को करीब से देखा।</p>
<p>उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। साथ ही उनके कौशल, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की भावना को सराहा।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने कहा कि किसी दिव्यांग व्यक्ति को केवल सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।</p>
<p>उसे अपनी प्रतिभा दिखाने के समान अवसर भी मिलने चाहिए।</p>
<h2>Skill Development से बढ़ता है आत्मविश्वास</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी के अनुसार <strong>Disability to Ability</strong> केवल एक प्रेरक नारा नहीं है। इसे शिक्षा,</p>
<p>प्रशिक्षण और skill development से जोड़ना भी जरूरी है।</p>
<p>जब कोई व्यक्ति अपने हाथों से कोई उपयोगी वस्तु तैयार करता है, प्रिंटिंग करता है या कोई नया कौशल सीखता है,</p>
<p>तब उसमें आत्मविश्वास बढ़ता है।</p>
<p>यही आत्मविश्वास आगे चलकर आत्मनिर्भरता की नींव बन सकता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने दिव्यांग विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।</p>
<h2>Fellowship of the PhysicallyHandicapped की पहल की प्रशंसा</h2>
<p>मुंबई स्थित <a href="https://fphmumbai.org/" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><strong>Fellowship of the Physically Handicapped</strong></a> दिव्यांग व्यक्तियों को कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए कार्य करती है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने संस्था में चल रही विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया।</p>
<p>उन्होंने दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और कार्य का अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों की प्रशंसा की।</p>
<p>उनका मानना है कि समाज में वास्तविक समावेशन तभी संभव है, जब दिव्यांग व्यक्तियों को सम्मान के साथ अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले।</p>
<h2>सुरेश अय्यर और विजय सामरा सहित टीम रही साथ</h2>
<p>इस अवसर पर <strong>सुरेश अय्यर जी, विजय सामरा जी</strong> तथा संस्था की टीम के सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<p>संस्था की टीम ने कृष्णा गुरुजी को विभिन्न विभागों में चल रहे कार्यों की जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने दिव्यांग विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे हैंडलूम, प्रिंटिंग और अन्य कार्यों को भी दिखाया।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने पूरी टीम के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कौशल के माध्यम से किसी</p>
<p>व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना मानव सेवा का महत्वपूर्ण स्वरूप है।</p>
<h2>Amar Ujala में प्रकाशित हुई Divyang Yoga Session की खबर</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी के मुंबई में आयोजित इस विशेष <strong>Divyang Yoga Session</strong> को</p>
<p>राष्ट्रीय समाचार माध्यम <strong>Amar Ujala</strong> ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया।</p>
<p>खबर में कृष्णा गुरुजी के <strong>Disability को Ability में बदलने</strong> के संदेश का उल्लेख किया गया।</p>
<p>साथ ही पंचतत्व, प्राणायाम और पर्यावरण से योग को जोड़ने की उनकी सोच को भी स्थान मिला।</p>
<p><a href="https://www.amarujala.com/india-news/krishna-guruji-conducts-a-special-divyang-yoga-session-in-mumbai-says-transform-disability-into-ability-2026-10-06/" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
<strong>📰 Amar Ujala में प्रकाशित पूरी खबर पढ़ें</strong><br />
</a></p>
<h2>Divyang Yoga Session की News Coverage देखें</h2>
<p>इस कार्यक्रम से संबंधित News Coverage नीचे दिए गए वीडियो में देखी जा सकती है।</p>
<div class="video-container"><iframe title="Krishna Guruji Divyang Yoga Mumbai News Coverage" src="https://www.youtube.com/embed/sd9OTXcFD_U" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=sd9OTXcFD_U" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><strong>▶ YouTube पर News Coverage देखें</strong></a></p>
<h2>दिव्यांग योग का उद्देश्य क्या है?</h2>
<p><strong>Divyang Yoga</strong> का उद्देश्य केवल योगासन करवाना नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य व्यक्ति को उसकी उपलब्ध क्षमताओं के प्रति जागरूक करना भी है।</p>
<p>योग के माध्यम से श्वास पर ध्यान दिया जा सकता है। प्राणायाम के माध्यम से मन को एकाग्र करने का अभ्यास किया जा सकता है।</p>
<p>वहीं सकारात्मक सोच के माध्यम से आत्मविश्वास को मजबूत किया जा सकता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी का संदेश है कि योग को व्यक्ति की परिस्थिति और क्षमता के अनुसार अपनाया जाना चाहिए।</p>
<p>योग का मार्ग हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। लेकिन उसका उद्देश्य स्वयं को बेहतर तरीके से समझना और अपनी क्षमता को विकसित करना है।</p>
<h2>योग को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी योग को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे हैं।</p>
<p>उनका मानना है कि योग केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों</p>
<p>और समाज के अन्य वर्गों को भी उनकी क्षमता के अनुसार योग से जोड़ा जा सकता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी के योग, आध्यात्मिकता और सामाजिक कार्यों से संबंधित अन्य लेख पढ़ने के लिए <a href="https://krishnaguruji.com/" target="_self"><strong>KrishnaGuruji.com</strong></a> देखें।</p>
<h2>Disability से Ability की ओर</h2>
<p>मुंबई में आयोजित यह <strong>Divyang Yoga Session</strong> योग, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संदेश लेकर आया।</p>
<p>शरीर की कोई एक सीमा किसी व्यक्ति की संपूर्ण पहचान नहीं हो सकती। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कोई न कोई विशेष क्षमता होती है।</p>
<p>जरूरत उस क्षमता को पहचानने की है। फिर उसे शिक्षा, कौशल और अभ्यास से विकसित करने की आवश्यकता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी का संदेश यही रहा कि दिव्यांगता को केवल कमी की दृष्टि से न देखें। उसके पीछे छिपी क्षमता को पहचानें।</p>
<blockquote><p><strong>“कमी पर नहीं, अपनी क्षमता पर ध्यान दीजिए। Disability के भीतर छिपी Ability को पहचानिए।” — Krishna Guruji</strong></p></blockquote>
<h2>एक सकारात्मक और समावेशी समाज की ओर</h2>
<p>दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति महत्वपूर्ण है। लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उन्हें सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का मंच देना।</p>
<p>कौशल प्रशिक्षण, योग, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी ने विद्यार्थियों के कार्यों को देखकर उनकी प्रशंसा की। उन्होंने संस्था की टीम को भी इस सेवा के लिए शुभकामनाएँ दीं।</p>
<p>मुंबई का यह कार्यक्रम एक संदेश छोड़ गया—<strong>शरीर की सीमा से आगे भी जीवन की अनेक संभावनाएँ हैं।</strong></p>
<hr />
<p><strong>Krishna Kant Mishra ‘Krishna Guruji’</strong><br />
International Spiritual Thinker, Healer &amp; Yoga Mentor</p>
<p><strong>Official Website:</strong><br />
<a href="https://krishnaguruji.com/" target="_self">KrishnaGuruji.com</a></p>
<p><strong>External Reference:</strong><br />
<a href="https://fphmumbai.org/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">Fellowship of the Physically Handicapped, Mumbai</a></p>
<p><strong>Media Coverage:</strong><br />
<a href="https://www.amarujala.com/india-news/krishna-guruji-conducts-a-special-divyang-yoga-session-in-mumbai-says-transform-disability-into-ability-2026-10-06/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">Amar Ujala – Krishna Guruji Divyang Yoga Session Mumbai</a></p>
</article>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/divyang-yoga-session-mumbai-krishna-guruji/">मुंबई में Krishna Guruji का Divyang Yoga Session: Disability को Ability में बदलने का दिया संदेश</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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		<title>पितृपक्ष 2026: कलयुग में पितरों को कैसे करें प्रसन्न? &#124; Krishna Guruji</title>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Oct 2026 17:41:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>पितृपक्ष 2026 केवल कर्मकांड का समय नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सेवा का अवसर है। कृष्णा गुरुजी कलयुग पुराण की दृष्टि से बताते हैं कि आज के व्यस्त जीवन में सरल तरीकों से भी पूर्वजों का सम्मान किया जा सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-2026-pitron-ko-kaise-prasann-kare/">पितृपक्ष 2026: कलयुग में पितरों को कैसे करें प्रसन्न? | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<article lang="hi"><strong>पितृपक्ष 2026</strong> में पितरों को कैसे प्रसन्न करें? विदेश में श्राद्ध कैसे करें  विदेश में रहने वाले अनेक परिवार यह प्रश्न पूछते हैं।</p>
<p>किसी को ब्राह्मण नहीं मिलते। वहीं कई लोग नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं। फिर भी उनके मन में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रहती है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी अपनी पुस्तक <strong>कलयुग पुराण</strong> के दृष्टिकोण से सरल मार्ग बताते हैं।  विदेश में श्राद्ध कैसे करें</p>
<p>उनके अनुसार, कृतज्ञता को स्मरण और सेवा में व्यक्त करें। साथ ही, अपनी क्षमता के अनुसार पारिवारिक परंपरा निभाएँ।</p>
<h2>पितृपक्ष 2026: व्यस्त जीवन में श्रद्धा कैसे व्यक्त करें?</h2>
<p>आज अनेक पति-पत्नी कामकाजी हैं। इसलिए घर पर विस्तृत आयोजन करना कठिन हो सकता है। विदेश में आवश्यक सामग्री</p>
<p>और मार्गदर्शन भी आसानी से नहीं मिलता। ऐसे में स्वयं को अपराधबोध में न रखें।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी का आग्रह है कि समय के अनुसार सेवा का रास्ता खोजें। उदाहरण के लिए, किसी बुजुर्ग को भोजन कराएँ।</p>
<p>जरूरतमंद परिवार की सहायता करें। इसके अलावा, पशु-पक्षियों के भोजन और पानी की व्यवस्था करें।</p>
<p>यह सेवा-केंद्रित दृष्टिकोण है। इसे सभी पारंपरिक विधियों का अनिवार्य विकल्प न समझें। अपनी कुल-परंपरा के विषय में जानकार से मार्गदर्शन लें।</p>
<h2>पूरा सत्संग देखें | Watch the Full Video</h2>
<p>इस चर्चा में विदेश में श्राद्ध, सेवा और पूर्वजों के स्मरण पर बात हुई है। अंत में पितृ-स्मरण के साथ ध्यान भी कराया गया है।</p>
<div style="position: relative; width: 100%; aspect-ratio: 16/9;"><iframe style="position: absolute; inset: 0; width: 100%; height: 100%; border: 0;" title="कलयुग में पितरों को कैसे करें प्रसन्न? कृष्णा गुरुजी का सत्संग" src="https://www.youtube.com/embed/tPfM35LhyVI" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p><a href="https://youtu.be/tPfM35LhyVI" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
कृष्णा गुरुजी का पूरा सत्संग YouTube पर देखें<br />
</a>।</p>
<h2>पितृपक्ष में कृतज्ञता का भाव क्यों महत्वपूर्ण है?</h2>
<p>हमारे माता-पिता और पूर्वजों से हमें जीवन मिला। उनके प्रयासों से परिवार आगे बढ़ा। इसलिए उनका स्मरण हमें अपने संबंधों का महत्व समझाता है।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी पितरों के प्रति प्रेम और आशीर्वाद का भाव रखने को कहते हैं। हर कठिनाई को उनकी नाराज़गी से जोड़ना उचित नहीं है।</p>
<p>बल्कि समस्या के व्यावहारिक कारण समझें और समाधान खोजें।</p>
<p>इस विषय को विस्तार से समझने के लिए<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/"><br />
पितृ पक्ष का महत्व और कृतज्ञता का संदेश<br />
</a> पढ़ें।</p>
<h2>शास्त्रों में अन्नदान और जीवों की सेवा</h2>
<p><a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/manusmriti-with-the-commentary-of-medhatithi/d/doc199849.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
मनुस्मृति 3.70<br />
</a><br />
में पंचमहायज्ञों का उल्लेख है। इनमें ज्ञान, पितरों, देवताओं, जीवों और अतिथियों के प्रति कर्तव्य शामिल हैं।</p>
<p>इसी तरह,<br />
<a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/manusmriti-with-the-commentary-of-medhatithi/d/doc199871.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
मनुस्मृति 3.92<br />
</a><br />
में कुत्तों, पक्षियों और छोटे जीवों के लिए अन्न रखने का उल्लेख मिलता है। ये गृहस्थ के दैनिक कर्तव्यों के प्रसंग हैं।</p>
<p>इसके अलावा,<br />
<a href="https://press-files.anu.edu.au/downloads/press/n8264/html/book03.xhtml" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
विष्णु पुराण के तृतीय अंश, अध्याय 11<br />
</a><br />
में जीवों के भोजन की चर्चा है। कृष्णा गुरुजी इन संदर्भों से करुणा और जिम्मेदारी की प्रेरणा लेते हैं।</p>
<p>हालाँकि पंचमहायज्ञ और पंचबलि अलग प्रसंग हैं। उन्हें एक ही सूची न मानें। श्राद्ध की विशेष विधियाँ परिवार और परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।</p>
<h2>पितृपक्ष 2026 में सेवा के पाँच सरल माध्यम</h2>
<h3>1. बुजुर्गों और जरूरतमंदों को भोजन</h3>
<p>पहले किसी वृद्धाश्रम या भोजन सेवा से संपर्क करें। उनकी आवश्यकता समझकर सहयोग दें। यदि संभव हो, स्वयं जाकर सम्मानपूर्वक भोजन परोसें।</p>
<h3>2. गौशाला में सहयोग</h3>
<p>किसी विश्वसनीय गौशाला से चारे और पानी की जरूरत पूछें। फिर अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दें।</p>
<p>ऑनलाइन सहायता करते समय संस्था और भुगतान विवरण जाँचें।</p>
<h3>3. श्वान और पालतू साथियों की देखभाल</h3>
<p>स्थानीय पशुसेवा समूह के माध्यम से भोजन में सहयोग कर सकते हैं। वहीं घर के पालतू साथी का नियमित आहार सुनिश्चित करें। उसके पास साफ पानी भी रखें।</p>
<h3>4. पक्षियों और छोटे जीवों के लिए व्यवस्था</h3>
<p>पक्षियों के लिए स्वच्छ स्थान पर उपयुक्त दाना और पानी रखें। साथ ही, पात्र नियमित साफ करें। छोटे जीवों की सहायता में स्वच्छता और स्थानीय नियमों का ध्यान रखें।</p>
<h3>5. श्रद्धालुओं के लिए भोजन और पानी</h3>
<p>तीर्थस्थलों पर आने वाले लोगों की जरूरत भी समझें। भोजन या पीने के पानी की व्यवस्था में सहयोग करें। इस प्रकार पूर्वजों का स्मरण सामुदायिक सेवा से जुड़ सकता है।</p>
<p><strong>ये सेवा के व्यावहारिक विकल्प हैं। यह शास्त्रीय पंचबलि की निश्चित सूची नहीं है।</strong></p>
<h2>सिद्धवट, उज्जैन में सेवा का संकल्प</h2>
<p>इस सत्संग में कृष्णा गुरुजी ने सिद्धवट की अपनी सेवा-पहल साझा की। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए खीर और पानी की व्यवस्था का उल्लेख किया।</p>
<p>पानी की आवश्यकता समझकर सहयोग करने की बात भी कही।</p>
<p>उनका संदेश है कि पहले वास्तविक जरूरत पहचानें। उसके बाद उसी के अनुसार सहायता पहुँचाएँ। इससे दान उपयोगी सेवा बन सकता है।</p>
<h2>विदेश में श्राद्ध कैसे करें? | Guidance for Families Abroad</h2>
<p>अमेरिका, सिएटल या किसी अन्य स्थान पर रहने वाले परिवार स्थानीय सेवा चुन सकते हैं।</p>
<p>उदाहरण के लिए, भोजन सहायता संस्था या पशु आश्रय से जुड़ें।</p>
<p>भारत की विश्वसनीय संस्था को भी सहयोग दे सकते हैं।</p>
<p>साथ ही, बच्चों को पूर्वजों की कहानियाँ सुनाएँ। उनका कोई अच्छा गुण अपनाने का संकल्प लें।</p>
<p>इस तरह परिवार की स्मृतियाँ अगली पीढ़ी तक पहुँचेंगी।</p>
<p lang="en"><strong>For families abroad:</strong> Remember your ancestors with gratitude. Support a trusted food charity</p>
<p lang="en">, elder-care service, or animal shelter</p>
<p lang="en">. Follow family traditions where possible. Let remembrance inspire kindness throughout the year.</p>
<h2>पितृ-स्मरण और सरल ध्यान</h2>
<p>कुछ मिनट शांत बैठें और श्वास सहज रखें। इसके बाद अपने प्रिय पूर्वजों को याद करें। उनसे मिले प्रेम और संस्कारों के लिए धन्यवाद दें।</p>
<p>कृष्णा गुरुजी वीडियो में स्मरण के साथ श्वास-अभ्यास कराते हैं। अभ्यास में जोर न लगाएँ। असुविधा होने पर रुक जाएँ।</p>
<p>केवल सामान्य श्वास के साथ स्मरण भी कर सकते हैं।</p>
<h2>पितृपक्ष 2026 से आगे भी सेवा जारी रखें</h2>
<p>पूर्वजों की स्मृति को किसी अच्छे कार्य से जोड़ें। भोजन, पानी, समय और अपनापन अपनी क्षमता के अनुसार दें।</p>
<p>फिर इस भावना को पूरे वर्ष बनाए रखें।</p>
<p>इसी विषय पर कृष्णा गुरुजी का लेख</p>
<p><a href="https://www.amarujala.com/columns/blog/krishna-guruji-shared-these-thoughts-on-pitru-paksha-shraadh-reincarnation-and-blessings-2026-09-29/">https://www.amarujala.com/columns/blog/krishna-guruji-shared-these-thoughts-on-pitru-paksha-shraadh-reincarnation-and-blessings-2026-09-29/</a><br />
<a href="https://krishnaguruji.com/kya-aapka-bhi-shraddha-ho-raha-hai/"><br />
क्या आपका भी कहीं श्राद्ध हो रहा है?<br />
</a> पढ़ें।</p>
<p><strong>आप अपने पूर्वजों की स्मृति में कौन-सा सेवा-संकल्प लेंगे? अपनी बात कमेंट में साझा करें।</strong></p>
<p><strong>कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong><br />
अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक<br />
<a href="https://krishnaguruji.com/">www.krishnaguruji.com</a></p>
</article>
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		<title>क्या आपका भी श्राद्ध हो रहा है? पितृपक्ष और पितृ ध्यान &#124; Krishna Guruji</title>
		<link>https://krishnaguruji.com/kya-aapka-bhi-shraddha-ho-raha-hai/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:53:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blog]]></category>
		<category><![CDATA[KALIYUG PURAN]]></category>
		<category><![CDATA[Krishna Guruji]]></category>
		<category><![CDATA[Pitra Paksh]]></category>
		<category><![CDATA[Pitra Dhyan]]></category>
		<category><![CDATA[Pitru Paksha 2026]]></category>
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		<category><![CDATA[कलयुग पुराण]]></category>
		<category><![CDATA[पितृ ध्यान]]></category>
		<category><![CDATA[पितृपक्ष 2026]]></category>
		<category><![CDATA[पितृपक्ष में क्या करें]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्वजों का आशीर्वाद]]></category>
		<category><![CDATA[वृद्धाश्रम सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[श्राद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[श्राद्ध में सेवा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>क्या आपका भी श्राद्ध हो रहा है? पितृपक्ष पर Krishna Guruji का विचारोत्तेजक प्रश्न पढ़ें। जानें, उन्होंने अपनी माता की स्मृति को वृद्धाश्रम में सेवा से कैसे जोड़ा और पितृ ध्यान में आशीर्वाद देने का भाव क्यों रखा।</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>पितृपक्ष में क्या करें श्राद्ध में सेवा क्या करे </strong></p>
<p><strong>क्या आपका भी श्राद्ध हो रहा है?</strong> यह प्रश्न सुनकर आप चौंक सकते हैं।</p>
<p>श्राद्ध में सेवा, पितृपक्ष में हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं।</p>
<p>हम उनके नाम पर श्राद्ध करते हैं और आशीर्वाद माँगते हैं। पर क्या आपने कभी उलटा प्रश्न किया?</p>
<p>अगर पुनर्जन्म में आपका विश्वास है, तो क्या कोई पिछले जन्म का प्रियजन आपको भी याद कर रहा होगा?</p>
<p>यही प्रश्न मैं आज आपके सामने रख रहा हूँ। यह मेरा आध्यात्मिक चिंतन है। इसे किसी शास्त्र का सीधा वचन मत समझिए।</p>
<p>आइए, इस विचार से पितृपक्ष, सेवा और पितृ ध्यान को जोड़ें।</p>
<h2>क्या आपका भी श्राद्ध हो रहा है? गीता से उठता एक प्रश्न</h2>
<p><a href="https://bhagavadgita.com/chapter/2/verse/22" target="_blank" rel="noopener noreferrer">भगवद्गीता 2.22</a> में शरीर बदलने की तुलना पुराने वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र पहनने से की गई है।</p>
<p>इसी उपमा से मेरे मन में एक प्रश्न उठा। अगर आत्मा ने पहले भी कोई जीवन जिया हो, तो उस जीवन के संबंध कहाँ होंगे?</p>
<p>जैसे आप अपने दादा-दादी या माता-पिता का श्राद्ध करते हैं, वैसे कोई आपको भी याद करता होगा।</p>
<p>यह एक संभावना पर आधारित प्रश्न है। इसका उद्देश्य डर पैदा करना नहीं है। मैं चाहता हूँ कि आप स्वयं भी आशीर्वाद देने का भाव जगाएँ।</p>
<h2>गणेश उत्सव से पितृपक्ष तक: जीवन की कड़ी</h2>
<p>श्रावण में वर्षा आती है। धरती धुलती है और प्रकृति हरी होती है। फिर मिट्टी से गणेश जी की मूर्ति बनती है।</p>
<p>मैं बच्चों को इस क्रम में जीवन का संदेश समझाता हूँ।श्राद्ध में सेवा,</p>
<p>गणेश जी के बड़े कान कहते हैं: अधिक सुनो। छोटा मुँह कहता है: कम बोलो। छोटी आँखें ध्यान से देखने की प्रेरणा देती हैं।</p>
<p>बड़ा मस्तक बुद्धि का उपयोग याद दिलाता है। दस दिन हम मूर्ति को घर में रखते हैं। साथ ही, इन गुणों को अपने भीतर जगाने का संकल्प लेते हैं।</p>
<p>इसके बाद मैं पूछता हूँ: यह शरीर हमें किससे मिला? हमारे माता-पिता से। उनसे पहले हमारे दादा-दादी और पूर्वज थे।</p>
<p>इसलिए गणेश उत्सव के बाद पितृपक्ष मुझे कृतज्ञता का अवसर लगता है। यह त्योहारों को जोड़ने की मेरी जीवन-केंद्रित व्याख्या है।</p>
<h2>पितृपक्ष में क्या करें? मेरा अपना अनुभव</h2>
<p>लगभग 22 वर्षों तक मैंने अपनी माता का श्राद्ध घर पर किया। सुबह से परिवार भोजन की तैयारी में लग जाता था।</p>
<p>खीर बनती थी और ब्राह्मण को आमंत्रित किया जाता था। इस बार मैंने उसी स्मृति को सेवा से जोड़ने का निर्णय लिया।</p>
<p>मैं अपनी पत्नी आरती, बड़ी भाभी और भतीजे के साथ वृद्धाश्रम गया। वहाँ बुज़ुर्गों को उनकी पसंद का भोजन परोसा। कुछ लोग चल-फिर सकते थे।</p>
<p>कुछ बिस्तर पर थे। हमने दोनों तक भोजन पहुँचाने का प्रयास किया। वहाँ मैंने तस्वीरें नहीं खिंचवाईं। मेरे लिए वह दिन प्रदर्शन का नहीं था।</p>
<p>वापस आते समय परिवार को भोजन कराया। मैंने उनसे कहा, आज माँ की स्मृति में आपने प्रेम से सेवा की है। यह बात कहते हुए मुझे मन में संतोष हुआ।</p>
<p>साथ ही, मैंने वृद्धाश्रम की दवाइयों की आवश्यकता में सहयोग का संकल्प लिया।</p>
<p>मैं अपनी परंपरा का अपमान नहीं करता। श्रद्धा से ब्राह्मण भोजन कराने वालों का सम्मान करता हूँ। पर दक्षिणा, औपचारिकता और भय को</p>
<p>केंद्र में रखकर किए कर्म पर प्रश्न ज़रूर उठाता हूँ। साथ ही, जहाँ वास्तविक आवश्यकता दिखे, वहाँ भी पहुँचिए।</p>
<h2>श्राद्ध में सेवा: नई पीढ़ी परंपरा कैसे निभाए?</h2>
<p>आज बहुत से युवा नौकरी के कारण दूसरे शहरों या देशों में रहते हैं। उनके लिए</p>
<p>पुराने ढंग की पूरी व्यवस्था करना कठिन हो सकता है।</p>
<p>फिर भी वे माता-पिता की स्मृति को जीवित रख सकते हैं।</p>
<p>अपनी क्षमता के अनुसार किसी वृद्धाश्रम में भोजन के लिए सहयोग दें। वहाँ रहने वालों के अनुरूप भोजन चुनें।</p>
<p>किसी ज़रूरतमंद की दवाइयों या देखभाल में सहायता करें। समय हो, तो स्वयं जाकर बुज़ुर्गों के साथ बैठें।</p>
<p>पहले जगह और उसकी वास्तविक आवश्यकता समझें। फिर अपना योगदान दें।</p>
<p>तन, मन या धन—तीनों से सेवा संभव है। हर व्यक्ति जितना कर सकता है, उतना करे।</p>
<p>मेरे लिए कृतज्ञता का मूल्य खर्च की राशि से नहीं मापा जाता।</p>
<p>सेवा करते समय कर्ता भाव भी छोड़िए। विनम्रता से किया छोटा काम भी मन को तृप्त कर सकता है।</p>
<p>भोजन के प्रश्न पर मेरा अलग लेख पढ़ें: <a href="https://krishnaguruji.com/shraddha-mein-kheer-puri-anivarya-hai-kya/">क्या श्राद्ध के भोजन में खीर-पूड़ी अनिवार्य है?</a></p>
<h2>प्राचीन ग्रंथों में श्राद्ध और मेरी कलयुग पुराण दृष्टि</h2>
<p>श्राद्ध केवल आज का विचार नहीं है। <a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/the-skanda-purana/d/doc502195.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">स्कंद पुराण के नागर खंड, अध्याय 216</a> में श्राद्ध और पितरों के पक्ष का प्रसंग मिलता है।</p>
<p>उस अध्याय में तिथि तथा अमावस्या का भी उल्लेख है।श्राद्ध में सेवा,</p>
<p>इसी तरह <a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/padma-purana-sanskrit/d/doc427677.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">पद्म पुराण, सृष्टि खंड, अध्याय 34</a> में तीर्थ-श्राद्ध, तर्पण और पिण्डदान का वर्णन है।</p>
<p>साथ ही, इन ग्रंथों की विधियों का अपना पारंपरिक स्थान है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वृद्धाश्रम में सेवा करना मेरी आज के जीवन के लिए दी हुई प्रेरणा है। इसे पुराणों का शब्दशः विधान बताना उचित नहीं होगा।</p>
<p>मेरी कलयुग पुराण दृष्टि का आग्रह सरल है: पूर्वजों को श्रद्धा दें। फिर उस भावना को किसी जीवित व्यक्ति की सहायता तक पहुँचाएँ।</p>
<p>पितृपक्ष का व्यापक अर्थ जानने के लिए <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/">पितृ पक्ष का महत्व: कृतज्ञता का पर्व</a> भी पढ़ें।</p>
<h2>पितृ ध्यान कैसे करें? आशीर्वाद भी दें</h2>
<p>अब कुछ क्षण अपने लिए निकालिए। आराम से बैठें और आँखें बंद करें। एक लंबी, सहज श्वास लें।</p>
<p>अपने माता-पिता का चेहरा याद करें।</p>
<p>बचपन में मिले उनके स्पर्श और देखभाल को याद करें।</p>
<p>फिर दादा-दादी और अन्य पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता महसूस करें। उनसे मंगलकामना करें।</p>
<p>साथ ही, मन में यह संभावना रखें कि कोई आपको भी स्मरण कर रहा होगा।</p>
<p>उन सभी के लिए शुभभाव भेजें। सभी जीवों के सुख की कामना करें।</p>
<p>अंत में सहज श्वास लें और कृतज्ञता के साथ आँखें खोलें।</p>
<p>पूरे पितृपक्ष अपने को आशीर्वाद मुद्रा में रखिए। प्रसन्न रहें।</p>
<p>अहंकार और क्रोध कम करें। किसी से कटु वचन न बोलें।</p>
<p>अपने पूर्वजों की स्मृति को प्रेम, सेवा और विनम्रता से जोड़ें।</p>
<p><strong>पितृ देवो नमः। जीवन आपका, सुझाव मेरा। — Krishna Guruji</strong></p>
<h2>पूरा संवाद वीडियो में देखें</h2>
<p>इस विषय पर मेरा पूरा संवाद और पितृ ध्यान नीचे दिए वीडियो में सुनें:</p>
<p><a href="https://youtu.be/yNRAd_tV1hI?si=x7CePy2rNu6-eon9" target="_blank" rel="noopener noreferrer">▶ क्या आपका भी कोई श्राद्ध कर रहा है? — YouTube पर देखें</a></p>
<div class="wp-block-embed__wrapper" style="position: relative; padding-bottom: 56.25%; height: 0; overflow: hidden; max-width: 100%;"><iframe style="position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; border: 0;" title="क्या आपका भी कोई श्राद्ध कर रहा है? पितृ ध्यान | Krishna Guruji" src="https://www.youtube-nocookie.com/embed/yNRAd_tV1hI" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></div>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/kya-aapka-bhi-shraddha-ho-raha-hai/">क्या आपका भी श्राद्ध हो रहा है? पितृपक्ष और पितृ ध्यान | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>पितृ पक्ष का महत्व: कृतज्ञता का पर्व &#124; कलियुग पुराण &#124; Krishna Guruji</title>
		<link>https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Sep 2026 13:59:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[KALIYUG PURAN]]></category>
		<category><![CDATA[Pitra Paksh]]></category>
		<category><![CDATA[Kaliyug Puran]]></category>
		<category><![CDATA[Krishna Guruji]]></category>
		<category><![CDATA[Pitru Paksha]]></category>
		<category><![CDATA[कलियुग पुराण]]></category>
		<category><![CDATA[कृष्णा गुरुजी]]></category>
		<category><![CDATA[तर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[पितृ पक्ष]]></category>
		<category><![CDATA[पितृ पक्ष का महत्व]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता]]></category>
		<category><![CDATA[माता-पिता की सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[श्राद्ध]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रेम और योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। कृष्णा गुरुजी ‘कलियुग पुराण’ की दृष्टि से श्रावण, गणेश उत्सव और पितृ पक्ष का जीवन से संबंध समझाते हैं। पढ़ें श्रद्धा, तर्पण, सेवा और अज्ञात भय से मुक्ति का संदेश।</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/">पितृ पक्ष का महत्व: कृतज्ञता का पर्व | कलियुग पुराण | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<article lang="hi"><strong>पितृ पक्ष: जिनसे मिला शरीर, उनके प्रति कृतज्ञता का पर्व</strong></p>
<p><strong>.कलियुग पुराण की दृष्टि कृष्णा गुरुजी का पितृ पक्ष संदेश</strong></p>
<p>कृष्णा गुरुजी का पितृ पक्ष संदेश</p>
<p>पितृ पक्ष का महत्व पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करना है.</p>
<p>उनके प्रेम और त्याग से हमारा जीवन आगे बढ़ा है.</p>
<p>इसलिए यह समय स्मरण, श्रद्धा और सेवा का अवसर है.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी अपनी पुस्तक ‘कलियुग पुराण’ की दृष्टि से इसका अर्थ समझाते हैं.</p>
<p>उनका संदेश है—पितृ पक्ष को अज्ञात भय का कारण न बनाएँ.</p>
<p>इसके बजाय पूर्वजों के प्रति प्रेम और कृतज्ञता रखें.</p>
<h2>पितृ पक्ष को लेकर भय क्यों? कलियुग पुराण की दृष्टि</h2>
<p>कई लोगों को अपने पितरों की नाराज़गी का डर रहता है.</p>
<p>कुछ लोग काम रुकने को भी इससे जोड़ते हैं.</p>
<p>वहीं श्राद्ध की विधि छूटने की आशंका दूसरों को परेशान करती है.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी के अनुसार, हर परेशानी को पितरों की नाराज़गी मानना उचित नहीं है.</p>
<p>जीवन की समस्याओं के व्यावहारिक कारण भी होते हैं.</p>
<p>इसलिए कारण समझकर समाधान का प्रयास करें.</p>
<blockquote><p>“जिन्होंने हमारी खुशी चाही, उनका स्मरण हमें संबल दे.”</p>
<p>“अपने पूर्वजों के प्रति प्रेम और आशीर्वाद का भाव रखें.”</p></blockquote>
<h2>कलियुग पुराण की दृष्टि से उत्सवों का संदेश</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी वर्षा ऋतु की उत्सव-शृंखला में जीवन के संदेश देखते हैं.</p>
<p>यह उनकी प्रतीकात्मक और जीवन-केंद्रित व्याख्या है.</p>
<p>इसमें प्रकृति, व्यक्तित्व और परिवार का संबंध दिखाई देता है.</p>
<h3>श्रावण: प्रकृति का सम्मान कृष्णा गुरुजी का पितृ पक्ष संदेश</h3>
<p>वर्षा धरती को सींचती है और हरियाली लाती है.</p>
<p>नदी-नालों में प्रवाह बढ़ता है.</p>
<p>इसी समय श्रावण में शिव आराधना और रुद्राभिषेक होते हैं.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी इसमें प्रकृति के सम्मान की प्रेरणा देखते हैं.</p>
<p>उनके अनुसार, आराधना के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी निभाएँ.</p>
<p>उदाहरण के लिए, पानी बचाएँ और पेड़ों की देखभाल करें.</p>
<h3>गणेश उत्सव: व्यक्तित्व सँवारने की सीख</h3>
<p>इसके बाद गणेश उत्सव आता है.</p>
<p>धरती की मिट्टी से गणेश प्रतिमा आकार लेती है.</p>
<p>उनके स्वरूप को जीवन की सीख से भी जोड़ सकते हैं.</p>
<ul>
<li><strong>बड़े कान:</strong> ध्यान से सुनें और दूसरों को समझें.</li>
<li><strong>बड़ा मस्तक:</strong> विवेक से सोचें और उचित निर्णय लें.</li>
<li><strong>छोटा मुख:</strong> संयमित, सार्थक और मधुर बोलें.</li>
<li><strong>छोटी आँखें:</strong> एकाग्र होकर बारीकी से देखें.</li>
<li><strong>सूँड़:</strong> परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन अपनाएँ.</li>
</ul>
<p>हम मिट्टी की प्रतिमा को सुंदर रूप देते हैं.</p>
<p>लेकिन अपने व्यवहार को कितना सुंदर बनाते हैं?</p>
<p>कृष्णा गुरुजी इसी प्रश्न पर आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हैं.</p>
<p>माता-पिता के माध्यम से हमें यह पंचतत्त्व का शरीर मिला है.</p>
<p>इसलिए आँखों, कानों, वाणी और बुद्धि का उचित उपयोग करें.</p>
<p>पूजा की सीख हमारे आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए.</p>
<h3>पितृ पक्ष: जिनसे जीवन मिला, उनका धन्यवाद</h3>
<p>गणेश उत्सव के बाद पितृ पक्ष आता है.</p>
<p>अब ध्यान अपने माता-पिता और पूर्वजों के योगदान की ओर जाता है.</p>
<p>उनके माध्यम से हमें जीवन और संस्कार मिले हैं.</p>
<p>इसलिए कृतज्ञता व्यक्त करना हमारा दायित्व है.</p>
<p>इस व्याख्या में श्रावण प्रकृति के प्रति संवेदना जगाता है.</p>
<p>गणेश उत्सव व्यक्तित्व सँवारने की प्रेरणा देता है.</p>
<p>वहीं पितृ पक्ष हमें परिवार और पूर्वजों से जोड़ता है.</p>
<h2>पितृ पक्ष का महत्व हमारी जीवनधारा से जुड़ा है</h2>
<p>अपने अनेक बड़े-बुज़ुर्गों को हमने साक्षात देखा है.</p>
<p>उनका स्नेह पाया और संघर्षों से सीख ली है.</p>
<p>परिवार के त्याग से हमें आगे बढ़ने के अवसर मिले हैं.</p>
<p>कुछ पूर्वजों को देखने का अवसर नहीं मिला.</p>
<p>फिर भी उनका योगदान हमारी जीवनधारा में शामिल है.</p>
<p>इसीलिए सभी पूर्वजों के प्रति आभार का भाव रखें.</p>
<blockquote><p>“हमारी श्वास पूर्वजों से मिली जीवनधारा की निरंतरता है.”</p>
<p>“इस भाव से उनका अंश हमारे अस्तित्व में है.”</p></blockquote>
<p>कृष्णा गुरुजी इस भावना को संस्कारों से जोड़ते हैं.</p>
<p>पूर्वजों की अच्छी सीख अपनाएँ और बच्चों को उनकी कहानियाँ सुनाएँ.</p>
<p>इससे परिवार की स्मृतियाँ अगली पीढ़ी तक पहुँचती हैं.</p>
<h2>देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण</h2>
<p>सनातन परंपरा में देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का विचार मिलता है.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी इन्हें जीवन की जिम्मेदारियों से जोड़कर समझाते हैं.</p>
<ul>
<li><strong>देव ऋण:</strong> जीवन के आधारों के प्रति आदर.</li>
<li><strong>ऋषि ऋण:</strong> ज्ञान की परंपरा के प्रति आभार.</li>
<li><strong>पितृ ऋण:</strong> माता-पिता और पूर्वजों के प्रति जिम्मेदारी.</li>
</ul>
<p>इस दृष्टि का संदेश अपने जीवन में मिले सहयोग को पहचानना है.</p>
<p>इसके बाद कृतज्ञता को व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है.</p>
<h2>श्राद्ध का भाव: श्रद्धा और स्मरण</h2>
<p>परिवार अपनी परंपरा के अनुसार दिवंगत परिजन की चंद्र तिथि पर श्राद्ध करते हैं.</p>
<p>क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधियाँ अलग हो सकती हैं.</p>
<p>फिर भी स्मरण और सम्मान का भाव महत्वपूर्ण है.</p>
<p>दिवंगत परिजन की पसंद का भोजन बनाना एक आत्मीय माध्यम हो सकता है.</p>
<p>उसे किसी व्यक्ति को सम्मानपूर्वक खिलाएँ.</p>
<p>इस प्रकार प्रियजन की स्मृति सेवा से जुड़ सकती है.</p>
<h3>ब्राह्मण भोजन और ज़रूरतमंद की सेवा</h3>
<p>परंपरागत श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन का स्थान है.</p>
<p>अपनी परंपरा निभाते हुए ज़रूरतमंद लोगों की सहायता भी करें.</p>
<p>किसी भूखे को भोजन करा सकते हैं.</p>
<p>इसके अलावा, शिक्षा और बुज़ुर्गों की देखभाल में सहयोग दे सकते हैं.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी के अनुसार, सहायता के साथ सम्मान जरूरी है.</p>
<p>दान पाने वाले व्यक्ति के प्रति अपनापन रखें.</p>
<p>इससे पूर्वजों की स्मृति किसी की खुशी का कारण बन सकती है.</p>
<h3>क्या महँगा या गरिष्ठ भोजन आवश्यक है?</h3>
<p>कई परिवार श्राद्ध में खीर और पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं.</p>
<p>हालांकि श्रद्धा को व्यंजनों की संख्या से नहीं मापना चाहिए.</p>
<p>अपनी क्षमता, परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार भोजन रखें.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी सरल भोजन और सच्चे भाव को महत्व देते हैं.</p>
<p>उनके अनुसार, सामाजिक दबाव में अत्यधिक खर्च करना आवश्यक नहीं है.</p>
<p>प्रियजन की पसंद का साधारण भोजन भी प्रेमपूर्ण स्मरण बन सकता है.</p>
<h2>तर्पण: जल अर्पण और आभार</h2>
<p>धार्मिक परंपरा में तर्पण जल अर्पण और तृप्ति की भावना से जुड़ा कर्म है.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी इसमें कृतज्ञता की प्रेरणा भी देखते हैं.</p>
<p>यह उनकी जीवन-केंद्रित व्याख्या है.</p>
<p>देव, ऋषि और पितरों का स्मरण करें.</p>
<p>साथ ही, जीवन में ज्ञान और सहारा देने वालों के प्रति आभार रखें.</p>
<p>इससे अपने संबंधों और मिले सहयोग का महत्व समझ आता है.</p>
<blockquote><p>“प्रियजन की स्मृति में निकला आँसू प्रेम की अभिव्यक्ति है.”</p>
<p>“उसी प्रेम को सेवा में बदलना स्मरण को और सार्थक बनाता है.”</p></blockquote>
<h2>क्या कोई आपका भी श्राद्ध कर रहा होगा?</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी युवाओं के सामने एक विचारोत्तेजक प्रश्न रखते हैं.</p>
<p>यदि आप पुनर्जन्म में विश्वास रखते हैं, तो पिछले जन्म के संबंधों पर विचार करें.</p>
<p>संभव है, आप किसी अन्य परिवार का हिस्सा रहे हों.</p>
<p>वहाँ कोई आपको अपने पूर्वज के रूप में स्मरण करता हो.</p>
<p>यह आध्यात्मिक चिंतन की संभावना है, पिछले जन्म का प्रमाण नहीं.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी इस विचार को आशीर्वाद देने के भाव से जोड़ते हैं.</p>
<blockquote><p>“जब पितरों से आशीर्वाद चाहते हैं, तो स्वयं भी दूसरों के लिए शुभकामना रखें.”</p>
<p>“अपने व्यवहार से किसी की कठिनाई कम करें.”</p></blockquote>
<p>इस विचार को करुणा और क्षमा के रूप में अपनाएँ.</p>
<p>संबंधों में सद्भाव रखें और दूसरों को शांति दें.</p>
<p>इस प्रकार आशीर्वाद का भाव दैनिक व्यवहार का हिस्सा बन सकता है.</p>
<h2>पितृ पक्ष में अज्ञात भय से काम न रोकें</h2>
<p>कुछ लोग इस अवधि में आवश्यक काम और खरीद-बिक्री टाल देते हैं.</p>
<p>इसके पीछे कभी-कभी अनिष्ट की आशंका होती है.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी केवल भय के आधार पर निर्णय लेने से बचने का संदेश देते हैं.</p>
<p>पहले काम की आवश्यकता और परिस्थितियों को समझें.</p>
<p>इसके बाद पारिवारिक मान्यताओं पर सम्मानपूर्वक चर्चा करें.</p>
<p>अंत में विवेक से निर्णय लें.</p>
<p>पितृ दोष जैसी धारणाओं को लेकर स्वयं को लगातार दोषी न मानें.</p>
<p>हर परेशानी को पूर्वजों की नाराज़गी का संकेत समझना जरूरी नहीं है.</p>
<p>इसलिए वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजें और पूर्वजों के प्रति प्रेम बनाए रखें.</p>
<h2>जीवित माता-पिता की सेवा भी जरूरी है</h2>
<p>दिवंगत पूर्वजों की श्रद्धा के साथ जीवित बुज़ुर्गों का सम्मान करें.</p>
<p>उनकी बात ध्यान से सुनें.</p>
<p>साथ बैठकर समय बिताएँ और दैनिक जरूरतों का ध्यान रखें.</p>
<p>कृष्णा गुरुजी इसे कृतज्ञता का प्रत्यक्ष रूप मानते हैं.</p>
<p>इसलिए सेवा को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ.</p>
<p>प्रेमपूर्ण व्यवहार से परिवार में अपनापन बढ़ता है.</p>
<h2>युवाओं के लिए छह सरल कदम</h2>
<p>पितृ पक्ष का महत्व छोटे कार्यों से जीवन में उतार सकते हैं.</p>
<p>इसके लिए बड़ा आयोजन आवश्यक नहीं है.</p>
<ol>
<li>माता-पिता से पूर्वजों की कहानियाँ पूछें.</li>
<li>परिवार के संघर्ष और सीख लिखकर सुरक्षित रखें.</li>
<li>किसी बुज़ुर्ग की अच्छी आदत अपनाएँ.</li>
<li>दिवंगत की स्मृति में भोजन या शिक्षा में सहयोग दें.</li>
<li>जीवित माता-पिता के साथ नियमित समय बिताएँ.</li>
<li>मतभेद होने पर सम्मानपूर्वक संवाद करें.</li>
</ol>
<h2>कलियुग पुराण का उद्देश्य</h2>
<p>कृष्णा गुरुजी युवाओं को सनातन परंपराओं के अर्थ से जोड़ना चाहते हैं.</p>
<p>इसी उद्देश्य से उन्होंने ‘कलियुग पुराण’ लिखा है.</p>
<p>उनका प्रयास परंपराओं के प्रति रुचि और समझ विकसित करना है.</p>
<p>युवा प्रश्न पूछें और जीवनोपयोगी संदेश समझें.</p>
<p>इसके बाद उन सीखों को अपने व्यवहार में अपनाएँ.</p>
<p>प्रकृति का सम्मान, परिवार की जिम्मेदारी और मानवसेवा इसी सोच के हिस्से हैं.</p>
<blockquote><p>“जिनसे जीवन मिला, उन्हें धन्यवाद दें.”</p>
<p>“अपने जीवन से किसी दूसरे का भला करें.”</p>
<p>“पितृ पक्ष को प्रेम, सेवा और कृतज्ञता का पर्व बनाएँ.”</p></blockquote>
<h2>पितृ पक्ष पर कृष्णा गुरुजी का वीडियो</h2>
<p>संक्षिप्त संदेश सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.</p>
<p><a href="https://www.youtube.com/shorts/Ujgzdrazt84" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
<strong>▶ पितृ पक्ष पर Krishna Guruji का YouTube Shorts देखें</strong><br />
</a></p>
<hr />
<footer><strong>विचार: कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’</strong></p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक एवं ‘कलियुग पुराण’ के लेखक.</p>
<p>यह लेख कृष्णा गुरुजी की जीवन-केंद्रित आध्यात्मिक व्याख्या पर आधारित है.</p>
<p>पारिवारिक एवं क्षेत्रीय धार्मिक परंपराओं में भिन्नता हो सकती है.</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/"><br />
कृष्णा गुरुजी के अन्य विचार पढ़ें<br />
</a></p>
</footer>
</article>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/pitru-paksha-ka-mahatva-kaliyug-puran/">पितृ पक्ष का महत्व: कृतज्ञता का पर्व | कलियुग पुराण | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>क्या श्राद्ध के भोजन में खीर-पूड़ी अनिवार्य है? &#124; कलियुग पुराण की दृष्टि से Krishna Guruji</title>
		<link>https://krishnaguruji.com/shraddha-mein-kheer-puri-anivarya-hai-kya/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 04:52:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[KALIYUG PURAN]]></category>
		<category><![CDATA[Pitra Paksh]]></category>
		<category><![CDATA[Ancestor Remembrance]]></category>
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		<category><![CDATA[Feeding the Needy]]></category>
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		<category><![CDATA[खीर-पूड़ी]]></category>
		<category><![CDATA[पितरों की स्मृति]]></category>
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		<category><![CDATA[मानव सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[श्राद्ध का भोजन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>क्या श्राद्ध के भोजन में खीर-पूड़ी अनिवार्य है? Krishna Guruji की कलियुग पुराण दृष्टि से जानें, पितृपक्ष में भोजन पाने वाले की ज़रूरत और सेवा का भाव क्यों महत्वपूर्ण है</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कलियुग पुराण की दृष्टि से — कृष्णा गुरुजी</strong></p>
<p>पितृपक्ष आते ही कई घरों में श्राद्ध का भोजन  में  खीर-पूड़ी बनती है। ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है।</p>
<p>भोजन के अंश अन्य जीवों के लिए भी रखे जाते हैं।</p>
<p>मैं इस परंपरा को प्रणाम करता हूँ। फिर भी मेरे मन में एक प्रश्न है: <strong>क्या श्राद्ध के भोजन में खीर-पूड़ी अनिवार्य है?</strong></p>
<p>मेरे कलियुग पुराण का उद्देश्य पुरानी परंपराओं को आज के जीवन से जोड़ना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><code>पितृपक्ष</code> जो उस समय प्रासंगिक था, उसे</p>
<p>आज की परिस्थिति में भी परखना चाहिए। श्रद्धा का भाव जीवित रहे। साथ ही, जिसे भोजन मिले, उसकी आवश्यकता भी देखी जाए।</p>
<h2>श्राद्ध का भोजन में खीर-पूड़ी बनाने का प्रचलन क्यों है?</h2>
<p>पहले घरों में दूध से खीर बनती थी। चावल और दूध का यह भोजन कई परिवारों को प्रिय था। लोग पितरों की पसंद के पकवान भी बनाते थे।</p>
<p>समय के साथ खीर-पूड़ी बहुत से घरों में श्राद्ध के भोजन का हिस्सा बन गई।</p>
<p>लेकिन प्रचलन और अनिवार्यता में अंतर है। <a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/the-skanda-purana/d/doc502198.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">स्कंद पुराण के नागर खंड, अध्याय २१९</a> में एक विशेष तिथि और</p>
<p>नक्षत्र के प्रसंग में खीर का उल्लेख है। वहाँ से यह नियम नहीं निकलता कि हर श्राद्ध में खीर-पूड़ी दोनों बनानी होंगी।</p>
<p>इसी प्रकार, <a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/manusmriti-with-the-commentary-of-medhatithi/d/doc199861.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मनुस्मृति ३.८२</a> में अन्न के साथ जल, दूध, कंद और फल का भी उल्लेख मिलता है।</p>
<p>इसलिए मेरा प्रश्न है: हम एक ही पकवान पर इतना आग्रह क्यों करें?</p>
<h2>क्या श्राद्ध में खीर-पूड़ी सबको खिलाना उचित है?</h2>
<p>आज किसी व्यक्ति को शक्कर से परहेज़ हो सकता है। किसी बुजुर्ग को हल्का भोजन खाने की सलाह मिली हो सकती है।</p>
<p>किसी अन्य व्यक्ति के लिए गेहूँ से बना भोजन उपयुक्त न हो। ऐसे में भोजन का स्वरूप उस व्यक्ति के अनुसार बदलना चाहिए।</p>
<p>यदि आप वृद्धाश्रम में भोजन करा रहे हैं, तो वहाँ रहने वालों से पूछिए। वे क्या खाते हैं? उन्हें क्या पसंद है? किन चीज़ों से उन्हें परहेज़ है?</p>
<p>खीर उनके लिए ठीक है, तो खीर बनवाइए। उन्हें सादा भोजन चाहिए, तो सादा भोजन बनवाइए।</p>
<p><strong>श्राद्ध का भोजन पाने वाले की ज़रूरत से बड़ा कोई पकवान नहीं होना चाहिए।</strong></p>
<p>आज भोजन और स्वास्थ्य पर हमारी समझ भी बढ़ी है। <a href="https://www.who.int/publications/i/item/WHO-NMH-NHD-15.3" target="_blank" rel="noopener noreferrer">विश्व स्वास्थ्य संगठन</a> शक्कर का सेवन सीमित रखने की सलाह देता है।</p>
<p>इसलिए जिसे मीठे से परहेज़ है, उस पर परंपरा के नाम पर मीठा खाने का आग्रह क्यों करें?</p>
<h2>श्राद्ध के भोजन के अंश अनेक जीवों तक क्यों पहुँचते हैं?</h2>
<p>हमारे यहाँ भोजन का हिस्सा ब्राह्मण या अभ्यागत के लिए रखा जाता है।</p>
<p>गाय, कौवे, कुत्ते और छोटे जीवों के लिए भी अन्न रखा जाता है।</p>
<p>मैं इसके पीछे हमारे ऋषि-मुनियों की व्यापक दृष्टि देखता हूँ।</p>
<p>पक्षी आकाश में रहते हैं। चींटियाँ और कीड़े धरती पर रहते हैं। गाय और श्वान हमारे आसपास रहते हैं।<br />
भिक्षुक या ज़रूरतमंद व्यक्ति भी हमारे बीच ही है।</p>
<p>पितरों की स्मृति में बना भोजन इन सब तक पहुँचे।</p>
<p><a href="https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/manusmriti-with-the-commentary-of-medhatithi/d/doc199871.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मनुस्मृति ३.९२</a> में पक्षियों, कुत्तों और छोटे जीवों के लिए अन्न रखने का उल्लेख मिलता है।</p>
<p>इसे सभी जीवों के प्रति कृतज्ञता से जोड़कर देखना मेरी <strong>कलियुग पुराण की दृष्टि</strong> है।</p>
<p>आज किसी शहर में कौवा आसानी से न दिखे, तो परंपरा का भाव मत भूलिए। पक्षियों और</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>दूसरे जीवों के लिए अन्न रखने का भाव आगे बढ़ाइए।</p>
<h2>ब्राह्मण भोजन कराएँ, तो श्रद्धा का भाव भी देखें</h2>
<p>पुराने समय में भिक्षा पर निर्भर ब्राह्मण को भोजन कराना सम्मान और सहायता का रूप था।</p>
<p>आज भी कोई आपके पितरों के प्रति भाव लेकर आए</p>
<p>, तो उसे श्रद्धा से भोजन कराइए।</p>
<p>लेकिन जजमान को यह भी देखना चाहिए कि भोजन केवल औपचारिकता न बन जाए।</p>
<p>यदि कहीं दक्षिणा की अपेक्षा भाव पर भारी पड़ रही है</p>
<p>, तो उस पर विचार कीजिए। मेरे लिए श्राद्ध में भाव सबसे पहले आता है।</p>
<p>मैं ब्राह्मण भोजन की परंपरा का अपमान नहीं करता। मैं इतना कहता हूँ कि किसी भूखे व्यक्ति को भोजन देना भी महत्वपूर्ण है।</p>
<p>जिसकी बड़ी आवश्यकता दवा है, उसकी दवाइयों में सहायता करना भी सेवा है।</p>
<h2>पितरों की स्मृति में भोजन के साथ दवाइयों की सहायता करें</h2>
<p>माता-पिता या दादा-दादी की तिथि आए, तो उनकी स्मृति में किसी ज़रूरतमंद का सहारा बनें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आप किसी वृद्धाश्रम या अनाथालय में भोजन करा सकते हैं। वहाँ के लोगों के अनुरूप भोजन बनवाएँ।</p>
<p>यदि आपके माता-पिता का निधन किसी बीमारी से हुआ था, तो उस बीमारी से जूझ रहे गरीब मरीजों की सहायता करें।</p>
<p>अपनी क्षमता के अनुसार किसी</p>
<p>अस्पताल में दवाइयों का सहयोग दें। किसी परिवार के लिए दवाइयों की सहायता,</p>
<p>भोजन से भी बड़ी आवश्यकता हो सकती है।</p>
<p>मैं चाहता हूँ कि आज की व्यस्त युवा पीढ़ी भी पितृपक्ष का भाव आगे ले जाए। हर परिवार अपनी क्षमता के<br />
अनुसार सेवा का रास्ता चुन सकता है।</p>
<p>यही बात मैंने <a href="https://krishnaguruji.com/152-lawaris-asthiyon-ka-visarjan-krishna-guruji/">अज्ञात दिवंगत लोगों के सम्मान पर अपने लेख</a> में भी साझा की है।</p>
<h2>श्राद्ध का भोजन  में खीर-पूड़ी से बढ़कर क्या है?</h2>
<p>मेरे लिए उत्तर है: <strong>श्रद्धा, कृतज्ञता और सामने वाले की आवश्यकता।</strong> खीर-पूड़ी बनाना चाहें, तो बनाइए।</p>
<p>लेकिन उसे हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य भोजन मत मानिए।</p>
<p>पितृपक्ष को अज्ञात भय का समय भी मत बनाइए। अपने माता-पिता को याद कीजिए। उन्होंने जीवन भर आपकी प्रसन्नता चाही थी।</p>
<p>उनकी स्मृति में किसी भूखे को भोजन दें। किसी रोगी की दवाइयों में सहायता करें। अन्न का एक अंश दूसरे जीवों तक भी पहुँचाएँ।</p>
<p>परंपरा का भाव तभी आगे जाएगा, जब नई पीढ़ी उसे अपने जीवन में निभा पाएगी। मेरे लिए कलियुग में श्राद्ध का यही प्रश्न है:</p>
<p><strong>आज आपके पितरों की याद से किसे राहत मिली?</strong></p>
<p>त्योहारों को सेवा से जोड़ने पर मेरे अन्य विचार <a href="https://krishnaguruji.com/kaliyug-me-chaturmas/">कलियुग में चातुर्मास की प्रासंगिकता</a></p>
<p>और <a href="https://krishnaguruji.com/social-service-initiatives/">कृष्णा गुरुजी की सेवा पहलों</a> में भी पढ़ सकते हैं।</p>
<p><strong>— कृष्णा गुरुजी</strong><br />
अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/shraddha-mein-kheer-puri-anivarya-hai-kya/">क्या श्राद्ध के भोजन में खीर-पूड़ी अनिवार्य है? | कलियुग पुराण की दृष्टि से Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
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		<title>Vighnaharta Award 2026: गणेश आरती के मानवीकरण से अंतरराष्ट्रीय सम्मान तक &#124; Krishna Guruji</title>
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		<dc:creator><![CDATA[krishna guruji]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:58:31 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[FESTIVAL TRANSFORMATION]]></category>
		<category><![CDATA[Ganesh Chaturthi]]></category>
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		<category><![CDATA[Vighnaharta Award 2026]]></category>
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		<category><![CDATA[गणेश चतुर्थी 2026]]></category>
		<category><![CDATA[विघ्नहर्ता अवॉर्ड 2026]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Vighnaharta Award 2026 में Krishna Guruji ने गणेश आरती के मानवीकरण से जुड़े दस सेवाभावियों का सम्मान किया। पढ़ें तीन वर्षों की यात्रा, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, Webdunia coverage और देखें पूरा YouTube कार्यक्रम।</p>
<p>The post <a href="https://krishnaguruji.com/vighnaharta-award-2026-ganesh-aarti-manavikaran/">Vighnaharta Award 2026: गणेश आरती के मानवीकरण से अंतरराष्ट्रीय सम्मान तक | Krishna Guruji</a> appeared first on <a href="https://krishnaguruji.com">krishnaguruji</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<article lang="hi">&nbsp;</p>
<p><strong>इंदौर, 26 सितंबर 2026।</strong><br />
<strong>Vighnaharta Award 2026</strong> ने गणेश उत्सव को पूजा से आगे बढ़ाकर मानव सेवा से जोड़ने का संदेश दिया।<br />
Krishna Guruji की इस पहल का आधार है <strong>“गणेश आरती का मानवीकरण”</strong>।<br />
इस वर्ष दस अलग-अलग क्षेत्रों में समाज के वास्तविक विघ्न दूर करने वाले</p>
<p>व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया।</p>
<p>यह अभियान वर्ष 2024 में इंदौर से शुरू हुआ था।<br />
वर्ष 2025 में यह दूसरे वर्ष में पहुंचा।<br />
अब 2026 में Vighnaharta Award अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है।<br />
Webdunia ने भी इस तीन वर्ष की यात्रा और दस सम्मानितों को प्रमुखता से प्रकाशित किया।</p>
<p><a href="https://hindi.webdunia.com/indore/vighnaharta-award-2026-third-year-indore-national-international-126092600052_1.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
Webdunia पर Vighnaharta Award 2026 की पूरी खबर पढ़ें<br />
</a></p>
<h2>Vighnaharta Award 2026 और गणेश आरती का मानवीकरण</h2>
<p>Krishna Guruji ने गणेश आरती की प्रसिद्ध पंक्तियों को मानव सेवा से जोड़ा:</p>
<blockquote><p><strong>“अंधन को आँख देत, कोढ़न को काया,<br />
बाँझन को गर्भ देत, निर्धन को माया।”</strong></p></blockquote>
<p>इन पंक्तियों का भाव केवल आरती तक सीमित नहीं है।<br />
समाज में ऐसे अनेक लोग हैं, जो किसी की दृष्टि, स्वास्थ्य, मातृत्व, शिक्षा या जीवन की बाधा दूर कर रहे हैं।<br />
इसी सेवा को Vighnaharta Award 2026 के माध्यम से सम्मानित किया गया।</p>
<h2>Vighnaharta Award 2026 के दस सम्मानित</h2>
<h3>1. नंदकिशोर व्यास — “अंधन को आँख देत”</h3>
<p>महर्षि दधीचि देहदान-अंगदान समिति के संस्थापक <strong>नंदकिशोर व्यास</strong> को नेत्रदान सेवा के लिए सम्मानित किया गया।<br />
यह सम्मान गणेश आरती की “अंधन को आँख देत” पंक्ति से जुड़ा है।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/vighnaharta-award-2026-nandkishore-vyas/" target="_blank" rel="noopener"><br />
नंदकिशोर व्यास के सम्मान की पूरी कहानी पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>2. यामिनी निवासकर — “कोढ़न को काया देत”</h3>
<p>कुष्ठ प्रभावित लोगों की सेवा के लिए <strong>यामिनी निवासकर</strong> को कुष्ठ सेवा सम्मान प्रदान किया गया।<br />
उनकी सेवा उपचार के साथ सम्मान और अपनत्व का संदेश देती है।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/kushth-seva-sadan-vighnaharta-award-2026/" target="_blank" rel="noopener"><br />
यामिनी निवासकर के सम्मान के बारे में पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>3. Ankura Hospital — “बाँझन को गर्भ देत”</h3>
<p><strong>Dr. Aastha Jain Mathur और Dr. Ritu Surana Haripriya</strong> को मातृत्व एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।<br />
यह सम्मान संतान की आशा रखने वाले दंपतियों की चिकित्सा सेवा से जुड़ा है।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/vighnaharta-award-2026-ankura-hospital-aastha-mathur/" target="_blank" rel="noopener"><br />
Ankura Hospital Vighnaharta Award 2026 पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>4. अनुराग सचदेवा — “निर्धन को माया”</h3>
<p>जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने वाले <strong>अनुराग सचदेवा</strong> को निःशुल्क शिक्षा सेवा सम्मान दिया गया।<br />
यहां “माया” को शिक्षा, अवसर और आत्मनिर्भरता से जोड़ा गया है।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/vighnaharta-award-2026-anurag-sachdeva/" target="_blank" rel="noopener"><br />
अनुराग सचदेवा के सम्मान की पूरी कहानी पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>5. मनोविकास समिति, उज्जैन — बुद्धि प्रदायक सेवा सम्मान</h3>
<p>विशेष बच्चों की शिक्षा और बौद्धिक विकास के लिए कार्यरत <strong>मनोविकास समिति,</strong></p>
<p><strong> उज्जैन</strong> को बुद्धि प्रदायक सेवा सम्मान दिया गया।<br />
संस्था के 40 से अधिक शिक्षकों का भी अभिनंदन किया गया।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/ganesh-chaturthi-2026-vighnaharta-award-ujjain/" target="_blank" rel="noopener"><br />
मनोविकास समिति का Vighnaharta Award 2026 पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>6. स्व. एडवोकेट अभिजीता राठौर — अंगदान सम्मान</h3>
<p>अंगदान के माध्यम से कई लोगों को जीवन का अवसर देने वाली<br />
<strong>स्व. एडवोकेट अभिजीता राठौर</strong> को मरणोपरांत सम्मानित किया गया।<br />
यह सम्मान मानव सेवा को जीवन के बाद भी जारी रखने का संदेश देता है।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/vighnaharta-award-2026-abhijita-rathore/" target="_blank" rel="noopener"><br />
अभिजीता राठौर का Vighnaharta Award 2026 पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>7. पं. अतुल रामनारायण तिवारी — आध्यात्मिक चेतना सेवा सम्मान</h3>
<p>वेद-पुराण अध्ययन, शंखनाद और आध्यात्मिक जागरूकता के प्रसार के लिए<br />
<strong>पं. अतुल रामनारायण तिवारी</strong> को सम्मानित किया गया।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/vighnaharta-award-2026-atul-ramnarayan-tiwari/" target="_blank" rel="noopener"><br />
अतुल रामनारायण तिवारी के सम्मान के बारे में पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>8. Dr. Jagun Singh — “दर्द की विघ्नहर्ता”</h3>
<p>फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीजों के दर्द और शारीरिक बाधाओं को कम करने के लिए<br />
<strong>Dr. Jagun Singh</strong> को Physiotherapy Seva Samman दिया गया।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/dr-jagun-singh-vighnaharta-award-2026/" target="_blank" rel="noopener"><br />
Dr. Jagun Singh Vighnaharta Award 2026 पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>9. पार्थ जैन एवं अवनि जैन — पर्यावरण के विघ्नहर्ता</h3>
<p>अपने विवाह को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने वाले<br />
<strong>पार्थ जैन और अवनि जैन</strong> को पर्यावरण के विघ्नहर्ता सम्मान से सम्मानित किया गया।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/ganesh-chaturthi-2026-paryavaran-vighnaharta-award/" target="_blank" rel="noopener"><br />
पर्यावरण Vighnaharta Award की पूरी कहानी पढ़ें<br />
</a></p>
<h3>10. पंकज यादव — यातायात सुरक्षा सम्मान</h3>
<p>इंदौर के यातायात आरक्षक <strong>पंकज यादव</strong> को सड़क सुरक्षा और साहस के लिए<br />
<strong>Vighnaharta Award 2026 – यातायात सुरक्षा सम्मान</strong> प्रदान किया गया।</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/vighnaharta-award-2026-pankaj-yadav/" target="_blank" rel="noopener"><br />
पंकज यादव के सम्मान और मीडिया कवरेज को पढ़ें<br />
</a></p>
<h2>सम्मान देने का तरीका भी रहा अलग</h2>
<p>Vighnaharta Award 2026 की एक विशेषता यह रही कि Krishna Guruji ने सम्मानित व्यक्तियों को किसी बड़े मंच</p>
<p>पर बुलाने के बजाय स्वयं उनके घर, संस्था या कार्यस्थल तक पहुंचकर सम्मानित किया।</p>
<p>उन्हें <strong>तिरंगा दुपट्टा पहनाया गया</strong> और Vighnaharta Award प्रदान किया गया।<br />
इस तरह सम्मान सेवा करने वाले व्यक्ति के अपने परिवेश में पहुंचा।</p>
<h2>Vighnaharta Award पूरी तरह निःशुल्क</h2>
<p>Krishna Guruji ने स्पष्ट किया कि यह पूरी पहल <strong>पूर्णतः निःशुल्क</strong> है।<br />
किसी व्यक्ति या संस्था से nomination, award, participation या ceremony के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।</p>
<p>इसका उद्देश्य केवल वास्तविक सेवाभावियों को सामने लाना है।<br />
साथ ही, उनके कार्यों से समाज को प्रेरित करना भी इस अभियान का उद्देश्य है।</p>
<h2>26 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन</h2>
<p>Vighnaharta Award 2026 के समापन अवसर पर 26 सितंबर को Zoom के माध्यम से</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन आयोजित हुआ।<br />
भारत के साथ विदेशों से भी प्रतिभागी जुड़े।</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन <strong>जयलक्ष्मी गणपति ने Seattle, USA</strong> से किया।<br />
समापन पर <strong>गजानन जी ने Canada</strong> से आभार व्यक्त किया।</p>
<p>इस अवसर पर 2024, 2025 और 2026 की Vighnaharta Award यात्रा को भी याद किया गया।<br />
विभिन्न सम्मानित व्यक्तियों के कार्यों के बारे में प्रतिभागियों को बताया गया।</p>
<h2>YouTube पर देखें Vighnaharta Award 2026 कार्यक्रम</h2>
<p>Vighnaharta Award 2026 के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यक्रम और Krishna Guruji के</p>
<p>गणेश आरती के मानवीकरण संदेश को YouTube पर देखा जा सकता है।</p>
<div class="wp-block-embed__wrapper"><iframe title="Vighnaharta Award 2026 International Ceremony | Krishna Guruji" src="https://www.youtube.com/embed/gHv6_vTts7k" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"><br />
</iframe></div>
<p><a href="https://youtu.be/gHv6_vTts7k?si=ZKdlFMFL6zTHutxb" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><br />
YouTube पर पूरा Vighnaharta Award 2026 कार्यक्रम देखें<br />
</a></p>
<h2>अनुराग सचदेवा ने शिक्षा सेवा का अनुभव साझा किया</h2>
<p>कार्यक्रम में अनुराग सचदेवा ने बताया कि उनकी टीम पढ़ाई से दूर बच्चों तक पहुंचती है।<br />
बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाता है।</p>
<p>इसके बाद उन्हें स्कूल और CBSE शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।<br />
साथ ही आगे के करियर पर भी ध्यान दिया जाता है।</p>
<h2>रुपाली जैन ने भिक्षुकमुक्त शहर अभियान के बारे में बताया</h2>
<p>कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता <strong>रुपाली जैन</strong> ने भिक्षुकमुक्त शहर अभियान की जानकारी दी।<br />
उन्होंने रोजगार और सम्मानजनक पुनर्वास को इस अभियान का महत्वपूर्ण भाग बताया।</p>
<p>यह प्रयास इंदौर के साथ अन्य शहरों तक भी आगे बढ़ाया जा रहा है।</p>
<h2>“दस दिन गणेश जी को रखा, लेकिन समाज को क्या दिया?”</h2>
<p>Krishna Guruji ने कहा कि गणेश उत्सव केवल दस दिन पूजा और प्रसाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए।</p>
<blockquote><p><strong>“हमें स्वयं से पूछना चाहिए कि इन दस दिनों में हमने किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन का कौन-सा विघ्न दूर किया?”</strong></p></blockquote>
<p>उन्होंने गणेश जी के स्वरूप को जीवन प्रबंधन से भी जोड़ा।</p>
<ul>
<li><strong>बड़े कान:</strong> अधिक सुनें।</li>
<li><strong>छोटा मुख:</strong> कम बोलें।</li>
<li><strong>तीक्ष्ण दृष्टि:</strong> गहराई से देखें।</li>
<li><strong>लंबी सूंड:</strong> आने वाली परेशानी को पहले पहचानें।</li>
<li><strong>बड़ा मस्तक:</strong> बुद्धि और विवेक का प्रयोग करें।</li>
</ul>
<h2>Ganesh Chaturthi 2027 तक एक विघ्न दूर करने का संकल्प</h2>
<p>Krishna Guruji ने सभी से संकल्प लेने का आग्रह किया कि अगले गणेश उत्सव तक</p>
<p>वे कम से कम एक व्यक्ति के जीवन का कोई वास्तविक विघ्न दूर करें।</p>
<p>यह सेवा शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, रोजगार, मातृत्व, दिव्यांग सेवा, वृद्ध सेवा या किसी अन्य क्षेत्र में हो सकती है।</p>
<h2>अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ओर Vighnaharta Award</h2>
<p>इंदौर से वर्ष 2024 में शुरू हुई यह मुहिम अब तीसरे वर्ष में पहुंच चुकी है।<br />
Webdunia ने भी इस यात्रा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विस्तार की</p>
<p>ओर बढ़ती पहल के रूप में प्रकाशित किया है।</p>
<p>अब अगले चरण में Vighnaharta Award को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की तैयारी है।<br />
इसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का लक्ष्य है।</p>
<p>Krishna Guruji ने कहा कि भविष्य में भी यह सम्मान <strong>निःशुल्क</strong> रहेगा।<br />
योग्य सेवाभावियों तक स्वयं पहुंचकर सम्मान देने की परंपरा जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<h2>Vighnaharta Award 2027 के लिए नाम आमंत्रित</h2>
<p>यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति या संस्था वर्षों से किसी दूसरे के जीवन की वास्तविक बाधा दूर कर रही है,</p>
<p>तो उसका नाम Vighnaharta Award 2027 के लिए सुझाया जा सकता है।</p>
<p>उद्देश्य है समाज में ऐसे लोगों को पहचान देना, जो अपने कर्म से वास्तविक विघ्नहर्ता बन रहे हैं।</p>
<h2>अंतिम संदेश</h2>
<p><strong>गणेश आरती केवल गाई न जाए।<br />
उसके भाव को मानव सेवा के रूप में जीवन में उतारा जाए।</strong></p>
<p><strong>— Krishna Guruji</strong><br />
अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक<br />
Krishna Guruji Social Welfare Society<br />
One World Family</p>
<p><a href="https://krishnaguruji.com/" target="_blank" rel="noopener"></p>
<blockquote class="wp-embedded-content" data-secret="mRq2ZRtXIE"><p><a href="https://krishnaguruji.com/">Home</a></p></blockquote>
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