कांवड़ यात्रा कलियुग में कितनी प्रासंगिक? | कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी का संदेश

कांवड़ यात्रा कलियुग में कितनी प्रासंगिक है? कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी का आध्यात्मिक संदेश दर्शाती फीचर इमेज।

श्रावण मास में कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक साधना, अनुशासन और आत्मशुद्धि का महापर्व है। कलियुग पुराण की दृष्टि से कृष्णा गुरुजी बताते हैं कि वास्तविक जलाभिषेक तब है, जब व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और स्वार्थ का त्याग कर शिव भाव को अपनाता है। खुलासा फर्स्ट और इंदौर समाचार में प्रकाशित यह संदेश आज के समाज में कांवड़ यात्रा की प्रासंगिकता पर एक सकारात्मक और चिंतनशील दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

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