कलियुग में चातुर्मास कितना प्रासंगिक? परंपरा नहीं, जिम्मेदारी का महापर्व | कृष्णा गुरुजी

भगवान विष्णु की योगनिद्रा के माध्यम से कलियुग में चातुर्मास का संदेश देते हुए कृष्णा गुरुजी – प्रकृति संरक्षण, मानव सेवा और जिम्मेदारी

  कलियुग में चातुर्मास कितना प्रासंगिक? जिम्मेदारी और सेवा का संदेश कलियुग में चातुर्मास का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह केवल व्रत और उपवास का समय है? या यह जिम्मेदारी, सेवा और आत्मचिंतन का पर्व भी है? सनातन परंपरा में चातुर्मास का विशेष महत्व है। However, समय के साथ जीवन की परिस्थितियां बदल गई […]

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