जब मनोरंजन मर्यादा पार कर जाए, तब समाज को सोचना चाहिए

"मनोरंजन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा पर कृष्णा गुरुजी का विचार"

370 की बिरयानी से लेकर शव पर व्यंग्य तक — हँसी और मर्यादा की रेखा कहाँ खींची जाए? क्या केवल युवा जिम्मेदार हैं? विदेश की डिग्री या संस्कारों की डिग्री? भौतिक सुविधाएँ बढ़ीं, भावनात्मक जुड़ाव घटा समाज को कठिन विषयों पर संवाद करना होगा जो बोएंगे, वही काटेंगे क्या लोकप्रियता की दौड़ में संवेदनशीलता पीछे […]

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